वर्ष 2009 में बच्चों-बच्चों के बिच विवाद के कारण हुई थी हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला

वर्ष  2009 में बच्चों-बच्चों के बिच विवाद के कारण हुई थी हत्या के एक मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए त्वरित न्यायालय द्वितीय वीरेंद्र सिंह की अदालत के द्वारा भादवि की धारा 302/34 भा०द०वि० के अंतर्गत दोषी पाते हुए दो अभियुक्तों को सश्रम आजीवन कारावास के साथ ही 1 लाख 50 हजार रुपये प्रति व्यक्ति जुर्माना की सज़ा सुनाई है.न्यायालय ने कहा है कि जुर्माने की राशि का 80 फीसद हिस्सा मृतक की पत्नी अथवा कानूनी उत्तराधिकारी को दिया जाएगा तथा शेष 20 फीसद सरकारी खजाने में जमा कराया जाएगा. जुर्माने की राशि अदा नहीं करने पर 7 वर्षों का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
बता दें कि नावडेरा की निवासी राधिका देवी ने बताया कि 8 मई 2009 को सुबह उनके पति अक्षय कुमार गोड़ अपने घर में थे तभी गाँव के ही निवासी जगनारायण गोड़ एवं राम गोविंद गोड़ निवासी हाथ में डंडा लिए आए और गाली गलौज करने लगे तथा जान मारने की नीयत से उनके सिर तथा बदन पर ताबड़तोड़ कई पर प्रहार कर दिए. इस हमले में अक्षय का माथा फूट गया तथा वह बेहोश हो गये. आसपास के लोग आये तो अभियुक्तगण भाग गये. स्थानीय लोगों की सहायता से सदर अस्पताल बक्सर लाया गया जहां उनके प्राथमिक उपचार के पश्चात पीएमसीएच पटना रेफर कर दिया गया जहां उनके इलाज के क्रम में 15 मई 2009 को करीब समय 11:45 बजे रात्रि में उनकी मृत्यु हो गई. उन्हीने बताया था कि घटना का कारण बच्चों-बच्चों के बीच झगड़ा था.
मामले के संबंधित डुमराँव थाने में  कांड संख्या 86/09 दर्ज कराया गया व मामला त्वारित न्याय परिषद में लाया गया था. जिसमें सेशन ट्रायल 281/09 दर्ज कराया गया था. मंगलवार को हुई न्यायिक कार्यवाही के दौरान अभियोजन पक्ष की तरफ से अधिवक्ता राम कृष्णा चौबे व त्रिलोकी मोहन मौजूद रहे.वहीं बचाव पक्ष की तरफ से दिनेश यादव ने मामले की पैरवी की.
– बक्सर बिहार से सवांददाता राघव कुमार पाण्डेय की रिपोर्ट

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