कैसे जीते दिल परिवार और अपने बच्चो का,ममता सेवा संस्थान द्वारा जनहित में जारी डॉ रजनीश जैन

समय के साथ हमारे सोच विचार में बदलाव भी जरूरी है ।हम परम्परागत विचार धारा के साथ सुखी परिवार की आधारशिला नही रख सकते ।
हमे सामजिक कुरीतियों को त्यागना होगा ।
हमे यह भी समझना होगा कि आज घर और घर के बाहर क्या चल रहा है ।
आज के बच्चे स्वच्छनंद जीवन जीना चाहते है ऐसी दशा में उनके मनोभाव को जानकर उनके ही अनुसार प्रोत्साहन देकर घर परिवार और समाज की जरूरत बताना हमारा लक्ष्य होना चाहिए ।
(1) विवाह के संदर्भ में बात करे –
राजस्थान आज भी सामाजिक कुरीतियों के लिए जाना जाता है ।लेन देंन और रीति रिवाज के नाम पर जीवन परण लेंन देंन और रिवाज इस पर चिन्तन होना चाहिए ।कुरीतियों को त्यागे ।
सोचे जब बच्चे गेर समाज मे विवाह कर ले या बच्चे का विवाह ही न हो तब किससे अपने सामाजिक रीति रिवाज, रस्मो का पालन करवाएंगे
(2) कठिन परिस्थितियों में बच्चो का साथ दे -बच्चे जीवन भर गलतियां और शैतानियां करते है किंतु जब वे परेशान हो या अवसाद में तब उनका साथ दे और जब वे उस परेशानी या अवसाद से उभर आये तब उन्हें उनकी गलतियों का एहसास कराए ।
(3) पेरेंट्स अपने विचारों में बदलाव लाये – आजकल कामकाजी बच्चे के लिए ऐसे अनेक अवसर आते है जब वे एकाकी हो जाते है ।एक उदाहरण ले ले – बच्चो के यहाँ बच्चो का होना, उनका लालन पालन । शिक्षा या रोजगार के वक़्त की चुनोतियाँ ।यह एक कठिन वक़्त है जब उन्हें हमारी जरूरत है , हम उन्हें सहारा दे ।उनके साथ साये की तरह रहकर उनकी सेवा करे और जब उनके बच्चों के यहां बच्चों के होने का वक़्त आये तब उनके साथ रहकर उनका सहारा बने , पोते पोती नाती नातिन को सुरक्षित रूप से बड़ा करने में मदद करे ।यह सेवा और सवेदनशीलता उन्हें आजीवन उनको आपके प्रति कर्तव्यों का अहसास कराएगी ।
(4) अपनी उपयोगिता को बनाये रखे – जब तक स्वयं आत्मनिर्भर है तब तक बच्चो पर बोझ न बने ।जरूरत अनुसार उनके कार्यो में हाथ बटाये स्वयं भी कार्य जारी रखे ।स्वयं की उपयोगिता हेतु सामाजिक कार्य, सेवाओ को अपने जीवन का अंग बना ले ।
(5) आराम शब्द को तिलांजलि दे – जीवन की खुशियां तभी तक है जब तक आप सक्रिय है आराम शब्द कहने में बड़ा आसान है कटने में बड़ा मुश्किल ।मेने अपने जीवन मे सेकड़ो ऐसे व्यक्तियों का अध्धयन किया जो सेवानिवृत्त होकर आरामतलब जिंदगी के सपने सजोकर बैठे थे किंतु जैसे ही उन्होंने ऐसी जिंदगी की शुरुआत की मानसिक अवसाद ने उन्हें घेर लिया और वे अनेक शारीरिक , मानसिक, पारिवारिक समस्याओं से घिर गए ।
आशा है आज का यह लेख आपके लिए उपयोगी होगा ।
By-kailashsingh

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