लोकसभा संग्राम 59– क्या राहुल का सॉफ़्ट हिन्दुत्व जीतेगा या नागपुरिया आईडियोलोजी का ज़हर ? लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी

राज्य मुख्यालय लखनऊ।मिशन 2019 को फ़तह करने के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष एंडी चोटी के ज़ोर लगा रहा है दोनों ही चाहते है कि हमें 2019 के लोकसभा चुनाव में कामयाबी मिल जाए उसके लिए सियासी दल अपनी-अपनी चालों से जनता को अपनी और खींचने का प्रयास कर रहे है यह बात अलग है कि मिशन 2019 को फ़तह करने में किसे कामयाबी हाथ लगे यह तो देश की जनता तय करेगी कि वह किसे 2019 का विजेता घोषित करती है।
मोदी के लटके झटकों से सत्ता से दूर हुई देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस सबसे ज़्यादा गंभीर लग रही है लेकिन कम मोदी की भाजपा भी नही है वह भी चाहती है किसी तरह एक बार फिर देश की सत्ता उसके ही पास रहे उसकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा जो उसको 2014 में जिताकर लाया था वही बनता दिख रहा है झूटे वायदों से उत्साहित जनता ने EVM में कमल के सामने वाला जो बटन दबाया था अब वह उन वायदों का हिसाब माँग रही है कि कहाँ है अच्छे दिन, भ्रष्टाचार नही करने दूँगा मैं प्रधानमंत्री नही चौकीदार बनना चाहता हूँ लेकिन राफ़ेल हवाईजहाज़ में चौकीदार की चौकीदारी पर शक किया जा रहा है कि चौकीदार ने तीस हज़ार करोड़ की चोरी कराई अपने मित्र को अब सवाल यह है कि चोरी हुई या नही हुई राफ़ेल पर जाँच से क्यों भाग रहे है प्रधानमंत्री (चौकीदार) और अगर भाग रहे है तो फिर एक नारा ज़ोर पकड़ रहा है कि चौकीदार ही चोर है यही सब सवाल है जिसका जवाब मोदी के पास नही है और नरेन्द्र मोदी की सियासी धार भी कमज़ोर पड़ रही है इसी का फ़ायदा कांग्रेस उठाने की रणनीति बना रही है।
अभी तक कांग्रेस के पत्ते सही-सही पड़ रहे है गुजरात से शुरू हुआ मुक़ाबला कर्नाटका होता हुआ मध्य प्रदेश राजस्थान से छत्तीसगढ़ तक मोदी की भाजपा को सर्दी में भी पसीना ला रहा है जिसे मोदी और शाह पप्पू कहकर नकारते थे वही पप्पू अब गप मारकर सत्ता तक पहुँचे मोदी गप्पू के नाक में दम किए हुए है हर रोज़ नई चुनौती बनकर सामने आ रहे है राहुल गांधी यह बात नरेन्द्र मोदी सहित विजन विहीन नागपुरिया आईडियोलोजी की समझ में आ रही है विजन विहीन से मेरी मुराद यह है कि नागपुरिया आईडियोलोजी को ज़बानी बयान बाज़ी के अलावा कुछ नही आता जहाँ तक कांग्रेस का छिपा हुआ।
हिन्दुत्व है जिसके ज़रिए उसने ऐसे काम किए जो भाजपा की सरकारें सौ साल में भी नही कर सकती है मुसलमान को उसने अंदर ही अंदर इतना नुक़सान दिया उसका अगर आकलन कर लिया जाए तो समझ में आ जाएगा सही मायने में कौन हिन्दुत्व के एजेंडे को चला रहा था मुसलमान को कांग्रेस ने क्या दिया यह सभी जानते है कि आज कहाँ पहुँच गया मुसलमान कितने दंगे हुए लेकिन इतना शोर नही हुआ और कमाल की बात देखिए कि फिर भी मुसलमान कांग्रेस की बात करता है तो है न कमाल कि हिन्दुत्व का एजेंडा भी चले और पता भी न चले मोदी क्या सौ मोदी भी मुसलमान का इतना नुक़सान नही कर सकते क्योंकि मोदी की भाजपा ज़बानी बयानबाज़ी करती है अगर वह नुक़सान देने की सोचती है तो मुसलमान शोर मचाने लगता है कि मार लिया मार लिया दुनिया का ध्यान अपनी और खींच लेता है जब मामला गर्म होता है तो बड़ों-बडो को ख़ामोशी अख़्तियार करनी पड़ती है लेकिन कांग्रेस ऐसा नही होने देती थी और काम पूरा करती थी जिसकी इतिहास गवाही दे रहा है जस्टिस राजेन्द्र सच्चर कमेटी बनाकर या रंगनाथ मिश्र आयोग बनाकर वह कुछ नही करना चाहती थी न किया न करेगी ये भी तय है वह तो बहुसंख्यको को यह संदेश देना चाहती थी कि देखो हमने मुसलमान को कहाँ से कहाँ पहुँचा दिया है और मुसलमानों को तसल्ली देना चाहती थी कि देखो मैं आपके प्रति गंभीर हूँ बस इतना परन्तु नागपुरिया आईडियोलोजी विजन विहीन ने बहुसंख्यको में यह संदेश दिया कि कांग्रेस मुसलमानों की पार्टी है केन्द्र की यूपीए सरकार मुस्लिम तुष्टिकरण पर काम कर रही है जोकि तर्कहीन बात थी लेकिन वह उनके बहकावे में आ गए उन्होने सही से आकलन नही किया अगर करते तो शायद उनके मकड़जाल में न फँसते।
ख़ैर यह है दोनों दलो की हक़ीक़त कि कौन सही में हिन्दुत्व के एजेंडे को लेकर चल रहा है कांग्रेस या मोदी की भाजपा।कांग्रेस के ऐसे सैकड़ों केस मिल जाएँगे जिससे यह साबित हो सकता है कि उसने हिन्दुत्व के एजेंडे को हिन्दुस्तान में बड़ी ख़ूबसूरती से लागू किया है और मोदी की भाजपा या नागपुरिया आईडियोलोजी का ऐसा एक भी काम नही आता जिसे कहा जा सकता हो कि यह काम मोदी की भाजपा ने हिन्दुत्व के लिए किया है जो भी किया उसका भरपूर विरोध हुआ और वह ठण्डे बस्ते में चला गया तलाक के मामले को लेकर मोदी की भाजपा कुछ नही कर पायी बीफ के मामले को लेकर या अन्य मामलों में हिन्दुत्व के ठेकेदार संगठनों ने मात्र 47 बेक़सूर मुसलमानों को मार दिया और दुनिया भर में यह संदेश गया कि मुसलमान हिन्दुस्तान में सुरक्षित नही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को गौरक्षको को गुण्डे कहना पड़ा उसी  आईडियोलोजी के मानने वालों को गुण्डे कहना पड़ा जिस आईडियोलोजी से नरेन्द्र मोदी भी आते हो यह कोई कम बात नही मुझे यहाँ यह कहने में क़तई हिचक नही कि हिन्दुस्तान में मुसलमान सुरक्षित है हमारा सियासी नज़रिया अलग हो सकता है परन्तु जब बात देश की होगी तो सब वही खड़े मिलेंगे यह भी सच है।
अब देखना यह है कि क्या कांग्रेस का सॉफ़्ट हिन्दुत्व और न दिखने वाली सोच लोकसभा संग्राम 2019 में प्रचम लहराती है या विजन विहीन नागपुरिया आईडियोलोजी मिशन 2019 में विजय का परचम लहराती है जिसकी संभावना ज़्यादा नज़र आ रही है वो यह है कि 2014 में कांग्रेस के खिलाफ ऐसा माहोल बन गया था कि कांग्रेस के राज में भ्रष्टाचार बढ़ गया है उसे बदलकर किसी दूसरे पर भरोसा किया जाए उस फ़्रेम में नरेन्द्र मोदी का फ़ोटो सही फ़िट हो गया विकास का नारा दिया गया स्वयंभू गुजरात मॉडल पेश किया गया जिसे लोगों ने पसंद किया शायद कुछ हो सके लेकिन कुछ हुआ नही जिसकी वजह से वह फेल लग रहे है।
असल में बहुसंख्यक हो या हो मुसलमान सिख हो या ईसाई सभी मुल्क को सेकुलर रखना चाहते है ऐसे बहुत कम है जो नफ़रतों पर आधारित चलने को पसंद करते है जिसकी वजह से नागपुरिया आईडियोलोजी फेल हो जाती है और सेकुलर सियासत करने वाले बाज़ी मार ले जाते है 2014 में मोदी की भाजपा की जीत का कारण सबका साथ सबका विकास का नारा भी बना जो खोखला साबित हुआ।नफ़रतों की सियासत को जो बहुसंख्यक पसंद नही करते वह भी उनके खोखले नारों को सच मानकर उनके साथ चले गए थे उनके बैक होने से मोदी की भाजपा के सत्ता के महल में दरारें आनी शुरू हो गई है लगता है यह हवा हवाई महल भरभरा कर ढह रहा है।

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