मैं मायावती को प्रधानमंत्री बनाने के लिए मेहनत कर रहा, वह मुझे यूपी का सीएम बनाने में साथ देंगी

लखनऊ पांचवें चरण के बाद ज्यादातर राजनीतिक पार्टियां अब राहत की सांस ले रही हैं और परिणामों को लेकर कयासबाजी लगने लगी है। ऐसे में क्षेत्रीय पार्टियों के महागठबंधन और खासतौर पर उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी के गठबंधन की चुनाव परिणामों के बाद क्या रणनीति होगी इस पर सबकी नजर है। इन्हीं कुछ मुद्दों को लेकर हमारे सहयोगी मुंबई मिरर ने एसपी अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से बात की, जिसमें अखिलेश ने मायावती को प्रधानमंत्री बनाने की इच्छा जाहिर कर खुद को इस रेस से बाहर कर लिया। पेश हैं इस बातचीत के अंश-

उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी गठबंधन कैसा चल रहा है?
यह एक खूबसूरत गठबंधन है। यह मजबूरी का नहीं, बल्कि एक संकल्प को लेकर बना गठबंधन है। संकल्प यही है कि नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद से हटाना है। सिर्फ हमारा महागठबंधन ही भारत को बीजेपी से बचा सकता है। यह सिर्फ एसपी-बीएसपी तक नहीं है, हमारे गठबंधन में आरएलडी भी है।

आप बीजेपी की ताकत से इनकार नहीं कर सकते, क्या इसके साथ 23 मई के बाद गठबंधन करेंगे?

कभी नहीं। मैं मानता हूं कि भारत जैसे देश के लिए बीजेपी जैसी पार्टी खतरा है। मैं ऐसी समाज को बांटने वाली, वैचारिक रूप से अनैतिक और तानाशाही भरी पार्टी को समर्थन नहीं दे सकता हूं।

आपने कांग्रेस से गठबंधन ना होने पर उसके घमंड को जिम्मेदार ठहराया है, आपने किससे बात की थी?
हमने कांग्रेस से 2017 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन किया था। मैं उनके साथ इस चुनाव में भी गठबंधन करना चाहता था, लेकिन कांग्रेस क्या सोचती है इसका अनुमान लगाना मुश्किल हैं। जो पार्टी हमसे खुद गठबंधन करना चाहती थी, वह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतने के बाद हमें भूल गई। शायद उनका जश्न अब भी चल रहा है। मैं नाम नहीं ले सकता कि मैंने किससे बात की, क्योंकि वहां किसी के पास हमसे बात करने के लिए समय ही नहीं था। बीजेपी की तरह कांग्रेस पर भी घमंड सवार है।

लेकिन ऐसी चर्चा है कि आपकी प्रियंका गांधी वाड्रा से अच्छी बनती है?
अच्छा? सच में? मेरी प्रियंका से अच्छी पहचान है। वह यूपीए सरकार के दौरान भी मेरे संपर्क में रहती थीं। सोनियाजी के ज्यादातर संदेश उन्हीं के माध्यम से मुझ तक पहुंचते हैं। वह अच्छी महिला हैं। राहुल गांधी की जहां तक बात है, तो मैं उनसे मिला था। हमारी दोस्ती बस सामाजिक स्तर की ही है।

कांग्रेस ने भले ही हमारा कुछ सीटों पर समर्थन किया हो, लेकिन यह भी सच है कि वह बिना कुछ जीते सिर्फ ऐंटी-मोदी वोट खा रही है।

हमने आपको 2018 में बेंगलुरु में मायावती के साथ भी देखा और अब भी देख रहे हैं। पहले और अब के व्यवहार में काफी बदलाव दिखता है। अपने और मायावती के बीच संबंधों और तालमेल के बारे में बताइए।
मई 2018 में हम बेंगलुरु में थे। हम खुश थे कि बीजेपी नहीं जीत सकी। हालांकि उस वक्त हम दोनों के बीच ज्यादा बातचीत नहीं हो पाई। मैंने उनसे कई बार बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने रुचि नहीं दिखाई। शायद मैं ही ज्यादा उतावला हो रहा था। हमारे रिश्तों में कभी दरार नहीं थी, लेकिन सहजता भी नहीं थी। मैंने इस पर काम किया और आज हम साथ हैं। वह मुझ पर पूरा भरोसा करती हैं और मैं उन पर।

गठबंधन के बाद मैंने जाना कि उनके अंदर कई अच्छाइयां हैं, जैसे कि वह बेहद अनुशासित हैं। उन्होंने मुझसे ज्यादा जिंदगी देखी है और उन्हें काफी अनुभव भी है। मैं उन्हें प्रधानमंत्री बनते देखता चाहता हूं। हमारी महत्वाकांक्षाएं नहीं टकराती हैं। मैं उन्हें प्रधानमंत्री बनाने के लिए पूरी मेहनत करने को तैयार हूं और वह मुझे उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने के लिए पूरी मेहनत करने को तैयार हैं।

हालांकि हमारे बीच एक जनरेशन गैप है। वह कभी कोई धारणा नहीं बनाती हैं और ना ही सोशल मीडिया पर क्या चल रहा है, इस पर ध्यान देती हैं। उनकी ताकत उनके कैडर का अनुशासन और जमीनी संगठन कौशल हैं। हमारा बूथ मैनेजमेंट प्लान अच्छे से चल रहा है। कांग्रेस के खिलाफ जो हमारे विचार हैं, वह हमे और करीब लाते हैं। कांग्रेस ने ही सबसे पहले मेरे पिता और मायावती के पीछे सीबीआई को लगाया था।

तो आप बीएसपी पर पूरा भरोसा करते हैं? एसपी और बीएसपी ने सीटों का बंटवारा किया है। किसी सीट पर बीएसपी का उम्मीदवार होने पर आखिर एसपी का वोटर बीजेपी को वोट क्यों नहीं कर सकता?

आप मजाक कर रहे हैं क्या? हमारा गठबंधन कोई हवा-हवाई नहीं है, बल्कि मजबूत और जमीनी गठबंधन है। लखनऊ से लेकर रॉबर्ट्सगंज तक हमारे कार्यकर्ता एक हैं। यह गठबंधन यूपी की राजनीति की सबसे बड़ी घटना है।

क्या यह गठबंधन अगला विधानसभा चुनाव भी साथ देखेगा? 23 मई 2019 को अगर बिखरा हुआ जनादेश आया तो इस गठबंधन का क्या भविष्य होगा?
क्यों नहीं लड़ेंगे विधानसभा चुनाव साथ में? मैं उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनना चाहता हूं। मैं मायावती को प्रधानमंत्री बनाने में सहयोग करूंगा और वह मुझे उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने में। यह एक पारदर्शी आपसी समझ और वादा है।

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