भाजपा ने भोपाल से दिग्विजय के खिलाफ साध्वी प्रज्ञा को टिकट दिया, इंदौर सीट पर अभी भी फैसला नहीं

भोपाल. मध्यप्रदेश की भोपाल लोकसभा सीट से भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर मुहर लगा दी। वे पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ेंगी। इस सीट से पहले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को टिकट दिए जाने की चर्चा थी। लेकिन माना जाता है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने साध्वी प्रज्ञा का नाम आगे बढ़ाया जो मालेगांव ब्लास्ट केस में एनआईए की जांच से गुजर चुकी हैं। पार्टी ने विदिशा से रमाकांत भार्गव को टिकट दिया है। पिछली बार इस सीट से सुषमा स्वराज जीती थीं। सागर से राजबहादुर सिंह और गुना से केपी यादव भाजपा उम्मीदवार होंगे। उधर, दिग्विजय सिंह ने ट्वीट कर कहा कि आशा है कि साध्वी प्रज्ञा को भोपाल का शांत, शिक्षित और सभ्य वातावरण पसंद आएगा।

भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा समेत चार उम्मीदवारों की सूची बुधवार को जारी की। इंदौर लोकसभा सीट पर अब तक भाजपा का प्रत्याशी तय नहीं हो सका है, जहां से 8 बार से सुमित्रा महाजन सांसद हैं। वे इस बार चुनाव लड़ने से इनकार कर चुकी हैं।

यह मेरे लिए धर्मयुद्ध है- साध्वी प्रज्ञा

टिकट की घोषणा से पहले साध्वी प्रज्ञा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और भाजपा के संगठन महामंत्री रामलाल समेत कई नेताओं से मुलाकात की। भाजपा प्रदेश कार्यालय से निकलने के बाद साध्वी ने कहा कि मेरे लिए कोई चुनौती नहीं है। ये धर्मयुद्ध है और हम इसे जीतेंगे। मैंने पार्टी के कई नेताओं से मुलाकात की। सबने तय किया है कि हम राष्ट्र के विरुद्ध षड्यंत्र करने वालों के खिलाफ लड़ेंगे, क्योंकि राष्ट्र सुरक्षा पहले है और बाकी चीजें बाद में।

प्रज्ञा ने मंगलवार को भाजपा की सदस्यता ली

प्रज्ञा ने बताया कि वह मंगलवार (16 अप्रैल) को पार्टी की सदस्यता ले चुकी हैं। कई नामों पर चर्चा और असमंजस के स्थिति के बाद भाजपा से आखिर में प्रज्ञा का नाम तय माना जा रहा है। प्रज्ञा मालेगांव धमाके के बाद सुर्खियों में आई थीं।

संघ ने प्रज्ञा का नाम आगे बढ़ाया था: बताया जा रहा है कि प्रज्ञा के नाम पर सहमति बनाने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने अहम भूमिका निभाई। यह उनका पहला चुनाव है। भोपाल सीट से उम्मीदवारी को लेकर नरेंद्र सिंह तोमर, शिवराज सिंह चौहान, महापौर आलोक शर्मा और वीडी शर्मा के नाम पर पार्टी स्तर पर खासी मशक्कत हुई, लेकिन संघ ने प्रज्ञा का नाम बढ़ा दिया।

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