विपक्ष ने की EVM और VVPAT के मिलान की मांग, चुनाव आयोग की बैठक आज, जानें 10 बड़ी बातें

नई दिल्ली: ईवीएम विपक्षी दलों के लिए हार का बहाना है या सत्ता पक्ष के लिए जीत का ज़रिया, ये बात पुख्ता तौर पर आज भी कोई नहीं कह सकता. 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले भी विपक्षी दल इस वोटिंग मशीन पर संदेह जताते रहे हैं, लेकिन इसके ज़रिए जीत और हार का स्वाद भी चखते रहे हैं. बावजूद इसके देश की तमाम विपक्षी पार्टियां लंबे समय से इस मशीन पर अलग अलग तरह के आरोप लगाती आई हैं. इस बार लोकसभा चुनाव में भी ईवीएम चर्चा में है. मतदान मुकम्मल होने के बाद से इसको लेकर विरोध के सुर अब और भी ऊंचे हो गए हैं.

19 मई रविवार को आखिरी चरण की मतगणना हुई थी, जिसके बाद से देशभर के कई हिस्सों से ईवीएम से जुड़ी कई खबरें आईं. कुछ वीडियो भी सामने आए. स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े किए गए. इन सब के आधार पर विपक्षी दलों ने ईवीएम से छेड़छाड़ की आशंका ज़ाहिर की. हालांकि मंगलवार को भी चुनाव आयोग ने इन तमाम आरोपों को नकार दिया. इस बीच नतीजे आने से पहले ईवीएम और वीवीपीएटी के मुद्दे पर कांग्रेस, एसपी, बीएसपी, तृणमूल कांग्रेस सहित सभी प्रमुख विपक्षी दलों के नेताओं ने चुनाव आयोग का रुख किया.

विपक्षी नेताओं ने चुनाव आयोग के सामने ये मांग रखी कि काउंटिंग से पहले वीवीपीएटी के पर्चियों की गिनती हो, पर्ची और ईवीएम में समानता ना होने पर पूरी विधानसभा के वीवीपीएटी के पर्चियों की गिनती की जाए. बैठक के बाद विपक्ष के नेताओं ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने कहा है कि मांगों के संबंध में बुधवार (यानि आज) सुबह बैठक करेंगे. अब देखना होगा कि चुनाव आयोग विपक्षी दलों के नेताओं की इस मांग पर क्या फैसला करता है.

10 प्वाइंट में जानिए अब तक क्या क्या हुआ:-

  1. लोकसभा चुनाव के दौरान 21 विपक्षी पार्टियों ने हर सीट से 50 फीसदी EVM मशीनों के VVPAT से मिलान की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. कोर्ट ने इस याचिका को अव्यवहारिक माना. हालांकि आठ अप्रैल को अदालत ने इस याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा, “याचिका में जो मांग की गई है, उससे मौजूदा मिलान प्रक्रिया 125 गुणा बढ़ जाएगी. ये पूरी तरह अव्यवहारिक होगा. लेकिन फिर भी हम इस दलील से सहमत हैं कि चुनाव प्रक्रिया को ज्यादा विश्वसनीय बनाने की कोशिश करनी चाहिए. इसलिए ये आदेश देते हैं कि हर विधानसभा क्षेत्र से 5 EVM मशीनों का VVPAT की पर्चियों से मिलान करवाया जाए.”
  2. सुप्रीम कोर्ट के आठ अप्रैल के आदेश पर आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में 21 विपक्षी नेताओं ने 24 अप्रैल को एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और फैसले पर पुनर्विचार की मांग की. नायडू ने पूर्व में 50 फीसदी ईवीएम का औचक रूप से वीवीपैट के साथ मिलान की मांग की थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश की समीक्षा की मांग करते हुए कहा कि एक से संख्या बढ़ाकर पांच किया जाना तर्कसंगत संख्या नहीं है और यह इस अदालत द्वारा जाहिर अपेक्षा की पूर्ति नहीं करती.
  3. सात मई को सुप्रीम कोर्ट ने विपक्ष दलों की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया और कहा, “हम नहीं समझते कि आदेश में किसी संशोधन की ज़रूरत है. इसलिए पुनर्विचार याचिका खारिज की जाती है.”
  4. 19 मई को आए एग्ज़िट पोल के नतीजों के बाद एक बार फिर ईवीएम चर्चा में आया. इस बार विपक्षी दलों ने एग्ज़िट पोल को नकारते हुए कार्यकर्ताओं से अपील की कि वो स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी करें. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी एक ऑडियो जारी कर कार्यकर्ताओं से कहा, ”आपलोग, अफ़वाहों और एग्जिट पोल से हिम्मत मत हारिये. यह अफवाहें आपका हौसला तोड़ने के लिये फैलाई जा रही है. इस बीच आपकी सावधानी और भी महत्वपूर्ण बन जाती है. स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्रों पर डटे रहिए और चौकन्ने रहिए.”
  5. बिहार के पूर्व उप-मुख्यमंत्री और आरजेडी नेता ने भी एग्जिट पोल पर सवाल उठाते हुए कार्यकर्ताओं से अपील की है. उन्होंने ट्वीट कर कहा, ”एग्ज़िट से पहले बाज़ार की अपनी मजबूरियां एग्जिट पोल के नाम से बेची जाती हैं. संघ समर्थित संस्थानों और संसाधनों की मदद से वंचितो के मनोविज्ञान से खेलना इनका पुराना हथियार है. इसे ख़ारिज करें. हम जीत रहे है. स्ट्रॉन्ग रूम पर कड़ी निगरानी रखे. गंदे खेल के माहिर लोगों की चाल कामयाब ना हो.”
  6. गाज़ीपुर, कन्नौज, चंदौली और हाजिपुर जैसे जगहों पर ईवीएम में कथिक गड़बड़ी होने की आशंका को लेकर विपक्षी पार्टियों को नेताओं और कार्यकर्ताओं ने स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर जमकर हंगामा किया. महागठबंधन के प्रत्याशी अफजाल अंसारी ईवीएम की सुरक्षा पर सवाल उठाते हुए आधी रात को स्ट्रॉन्ग रूम परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए.
  7. उसी दिन चुनाव आयोग ने विपक्षी दलों के दावों को खारिज कर दिया. चुनाव आयोग ने कहा, ”गाजीपुर, चंदौली, डुमरियागंज और झांसी में ईवीएम को लेकर जो आरोप लगाए गए वो सही नहीं हैं. जिन ईवीएम का मतदान में इस्तेमाल हुआ है वो पूरी तरह सुरक्षित हैं.”
  8. 21 मई को सुप्रीम कोर्ट ने चेन्नई के एक गैर सरकारी संगठन ‘टेक फार ऑल’ की ओर से ईवीएम में पड़े वोटों से वीवीपीएटी की 100 प्रतीशत पर्चियों के मिलान को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया. कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से इंकार करते हुए जस्टिस अरूण मिश्र ने कहा, ‘‘हम चीफ जस्टिस के आदेश की अवहेलना नहीं कर सकते हैं. यह बकवास है. यह याचिका खारिज की जाती है.’’
  9. 21 मई को 22 विपक्षी दलों ने ईवीएम में गड़बड़ी के मुद्दे पर चुनाव आयोग से मुलाकात की. मुलाकात में विपक्षी पार्टियों ने वीवीपीएटी की पर्चियों की पहले मिलान की मांग की. इसके साथ ही सभी दलों ने आयोग के सामने देश के तमाम हिस्सों से ईवीएम को लेकर आ रही खबरों को लेकर भी अपनी बात रखी. विपक्षी पार्टियों ने आयोग के सामने मांग रखी कि एक विधानसभा में जिन पांच वीवीपीएटी की पर्चियों का मिलान होना है, उन्हें काउंटिंग से पहले गिना जाए.
  10. बीती रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनडीए के नेताओं के साथ डिनर किया. इस दौरान हुई बैठक में पीएम मोदी ने ईवीएम को लेकर विपक्ष के हंगामे को गैरजरूरी विवाद बताया. पीएम मोदी से पहले बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी ईवीएम पर उठ रहे सवालों को बोगस करार दे चुके हैं.

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