NDA का साथ छोड़ना इन नेताओं को पड़ा भारी, अब विपक्ष में बैठने की बारी

लोकसभा चुनाव 2019 से पहले पीएम मोदी के खिलाफ सभी विपक्षी दलों ने एकजुट होने की कोशिश की और एनडीए की संभावित हार को देखते हुए साल 2014 में बीजेपी के साथ रहे कई नेताओं और दलों ने चुनाव से पहले किसी न किसी बहाने पाला बदल लिया.

अब लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद आज तक-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए हैं उसको देखकर लगता है कि एनडीए से अलग हुए दलों को इसका भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2014 के मुकाबले से भी बड़ी जीत दर्ज कर दोबारा सत्ता में वापसी कर सकते हैं.

आज तक-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक इस लोकसभा चुनाव में एनडीए को 542 सीटों में से 339 से 365 सीटें मिलने का अनुमान है और बीजेपी को अपने दम पर भी बहुमत मिलने के आसार दिख रहे हैं. आज तक के इस सबसे बड़े सर्वे में 742,187 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था जिनकी राय पर यह आंकड़ा सामने आया है.

एनडीए से अलग होने का चंद्रबाबू नायडू को भुगतना होगा खामियाजा

एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए हैं अगर वो परिणाम में बदल जाते हैं तो उन पार्टियों को निश्चित तौर पर इसका घाटा उठाना पड़ेगा जो चुनाव से ठीक पहले एनडीए का साथ छोड़ कर दूसरे दलों के साथ गठबंधन कर लिया या फिर विपक्ष का चेहरा बन गए. एनडीए का साथ छोड़ने वाले नेता और दलों की बात करें तो इसमें सबसे आगे तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के अध्यक्ष और आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू का नाम आता है.

आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने पर टीडीपी ने एनडीए से नाता तोड़ लिया था और चंद्रबाबू नायडू मोदी विरोध का प्रमुख चेहरा बन गए. उन्होंने कई राज्यों में घूम कर क्षेत्रीय दलों को बीजेपी और नरेंद्र मोदी के खिलाफ एकजुट करने की कोशिश की और एनडीए सरकार पर पक्षपात करने तक के आरोप लगाए.

बीते लोकसभा चुनाव में जब टीडीपी एनडीए गठबंधन का हिस्सा थी तो उस वक्त चंद्र बाबू नायडू की पार्टी को 16 सीटें मिली थी लेकिन इस बार के लोकसभा चुनाव के बाद एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक टीडीपी को सिर्फ 4 से 6 सीटें मिलने का ही अनुमान है.

इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के जो आंकड़े एग्जिट पोल में आए हैं उससे ऐसा लग रहा है कि राज्य की सत्ता से भी चंद्रबाबू की विदाई हो सकती है.

आजतक- एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के मुताबिक आंध्र प्रदेश की 175 विधानसभा सीटों में से वाईएसआर कांग्रेस को 119-135 सीटें मिलती दिख रही है. जबकि चंद्रबाबू नायडू की पार्टी टीडीपी को 39-51 सीटें मिल रही हैं. इसके अलावा पवन कल्याण की पार्टी जेएसपी को 1-3 सीटें और अन्य को 2 सीटें मिलने की संभावना है.

कुशवाहा और मांझी को भी एनडीए से अलग होना पड़ सकता है महंगा

लोकसभा चुनाव 2019 में इस बार बिहार के समीकरण ही बदल गए. बीते चुनाव में जो दुश्मन थे वो दोस्त हो गए और जो दोस्त थे वो पाला बदलकर दुश्मन के खेमें में शामिल हो गए. हम बात कर रहे हैं बिहार की सत्ताधारी पार्टी जेडीयू, उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी और पूर्व सीएम जीतन राम मांझी के ‘हम’ की.

2014 के लोकसभा चुनाव में जहां जेडीयू बीजेपी के खिलाफ चुनाव लड़ी थी और महज दो सीटों पर जीत दर्ज कर पाई थी वहीं इस बार आज तक-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए हैं उसमें जेडीयू 17 में से 12 सीटों पर जीत दर्ज करती हुई नजर आ रही है. वहीं चुनाव से ठीक पहले कुशवाहा ने मनमुताबिक सीटें नहीं मिलने पर एनडीए छोड़कर तेजस्वी यादव के नेतृत्व वाले महागठबंधन का दामन थाम लिया था.

अब एग्जिट पोल के जो आंकड़े सामने आए हैं उसके मुताबिक उपेंद्र कुशवाहा का खाता खुलना भी मुश्किल हो सकता है. ऐसे ही हालत जीतन राम मांझी की पार्टी की भी है और सर्वे के मुताबिक उनके लिए भी किसी सीट पर जीत दर्ज करना मुश्किल हैं. एग्जिट पोल के मुताबिक बिहार में एनडीए 38-40 सीटें जीत सकती है जबकि महागठबंधन 0-2 सीटें मिलने का अनुमान है.

राजभर का गया मंत्री पद, चुनाव जीतना भी मुश्किल

यूपी में बीजेपी की सहयोगी दल रही सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के मुखिया ओम प्रकाश राजभर अपनी पार्टी को एनडीए की तरफ से यूपी में सीट नहीं मिलने पर बागी हो गए और लोकसभा चुनाव से पहले खुद को एनडीए से अलग कर लिया है. हालांकि इसके लिए उन्होंने कारण सामाजिक न्याय समिति के रिपोर्ट को बताया था. एनडीए से अलग होने के बाद मंत्री पद छोड़ने का भी ऐलान कर दिया.

हालांकि एग्जिट पोल के आंकड़े आने के तुरंत बाद सीएम योगी ने मंत्री पद से उनकी छुट्टी कर दी. आजतक-एक्सिस माई इंडिया एग्जिट पोल के आंकड़ों के मुताबिक यूपी में राजभर की पार्टी को एक भी सीट मिलती नहीं दिख रही है.

पूरे यूपी में मुख्य मुकाबला बीजेपी और महागठबंधन के बीच होता दिख रहा है. सर्वे के मुताबिक दो सीटों पर एनडीए की सहयोगी अपना दल के उम्मीदवार आगे चल रहे हैं. बता दें कि राजभर की पार्टी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी 2017 के विधानसभा चुनाव से पहले BJP से जुड़ी थी लेकिन राजभर बीजेपी पर हमले का कोई भी मौका नहीं छोड़ते थे.

2019 के लोकसभा चुनाव से करीब एक साल पहले ही शिवसेना ने भी ऐलान कर दिया था कि वो अगला चुनाव (2019) अकेले लड़ेंगे लेकिन बाद में फिर बीजेपी से गठबंधन कर लिया और महाराष्ट्र में एनडीए के बैनर तले ही चुनाव लड़े.

ऐसे ही केंद्र में मंत्री राम विलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी के नेता और उनके बेटे चिराग पासवान ने संकेत दिए थे कि अगर उन्हें मनमुताबिक सीटें नहीं मिली तो उनके लिए महागठबंधन में जाने का रास्ता खुला हुआ है लेकिन बाद में बीजेपी से बात बन गई और उनकी पार्टी ने एनडीए के तले ही चुनाव लड़ा. एग्जिट पोल के आंकड़े बताते हैं कि इस चुनाव में इन दोनों पार्टियों को भी इसका फायदा मिल सकता है.

WhatsApp chat