IPL में सोमवार को महाजन v/s मालिनी चला

इंदौर . इंदौर से प्रत्याशी को लेकर सोमवार को भाजपा में गहमागहमी रही। चर्चाएं चली कि लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन का टिकट कट रहा है और मेयर मालिनी गौड़ प्रत्याशी होंगी।

सुमित्रा महाजन – राजनीतिक उपलब्धि : 1989 में पहला चुनाव पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री प्रकाशचंद सेठी को हराया।  कांग्रेस की परंपरागत सीट बनी इंदौर लोकसभा सीट को छीना। आठ में से पांच बार 1 लाख से अधिक मतों से जीतीं। 2014 में रिकॉर्ड 4 लाख 66 हजार से अधिक मतों से जीतीं।

प्लस पॉइंट : सरल, सादगी के साथ मिलनसार व्यक्तित्व। संगठन और संघ दोनों की पसंद। पार्टी आलाकमान यानी शीर्ष नेतृत्व से सीधा संवाद।

माइनस पॉइंट : 75 वर्ष से अधिक उम्र का होना सबसे बड़ी दिक्कत। कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद और संपर्क नहीं।

टिकट का दावा इसलिए भी : आठ जीत। कांग्रेस के दिग्गजों को हराया। आज तक भ्रष्टाचार का कोई आरोप नहीं लगा। राजनीति में परिवारवाद को बढ़ावा नहीं दिया।

इनका वरदहस्त : अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, स्थानीय स्तर पर राजेंद्र धारकर जैसे नेताओं ने राजनीति में आगे बढ़ाया, चुनाव लड़ाए। पार्टी में शीर्ष नेतृत्व की पसंद रहीं।

ये विरोधी  : राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय और उनके गुट से जुड़े नेता। वरिष्ठ नेता सत्यनारायण सत्तन भी विरोध में आए। पार्टी कार्यकर्ताओं का एक धड़ा भी नाराज।

टिकट मिला तो : महाजन को टिकट मिला तो कांग्रेस को उनके कद का मजबूत प्रत्याशी खोजने में दिक्कत होगी। वैसे भी पिछली बार के बड़े अंतर को कम कर पाना कांग्रेस के लिए आसान नहीं।

मालिनी गौड़ – राजनीतिक उपलब्धि  : गौड़ लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव जीतीं। महापौर का चुनाव बड़े अंतर से जीता। सफाई में इंदौर को लगातार तीन बार नंबर वन बनाने में अहम योगदान। हैट्रिक के कारण शहर को दुनिया में बड़ी पहचान मिली।

प्लस पॉइंट : कोई चुनाव नहीं हारीं। सरल स्वभाव और सादगी पसंद। कार्यकर्ताओं में मजबूत पकड़। प्रदेश के बड़े नेताओं की पसंद।

माइनस पॉइंट : अपने क्षेत्र तक सीमित। कई नेता विकास के नाम पर हुई तोड़फोड़ से नाराज। दो नंबर का पूरा खेमा विरोध में।

टिकट का दावा इसलिए भी : 1989 के बाद पहली बार मिलेगा नया चेहरा। महिला होने का फायदा। स्वच्छता की हैट्रिक और शहर में किए काम का फायदा मिलेगा।

इनका वरदहस्त : सीधे पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से संपर्क। सफाई में दूसरी बार नंबर वन बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इंदौर आकर अवॉर्ड दिया और प्रशंसा की।

ये विरोधी : दो नंबर के विधायक और पार्षदों का खुला विरोध। चार नंबर को छोड़ बाकी क्षेत्र में नेताओं का खुलकर समर्थन नहीं। ग्रामीण नेताओं के साथ भी सीधा संवाद नहीं।

टिकट मिला तो : गौड़ को टिकट मिलता है तो शहरी क्षेत्र के कार्यकर्ताओं में उत्साह दिखाई देगा। वजह यह है कि ताई का सीधा संवाद नहीं, जबकि गौड़ का सीधा संपर्क है।

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