लोकसभा चुनाव 2019: आठ बार कांग्रेस, भाजपा तीन व सपा दो बार रही काबिज, हर बार हारे आलू किसान

 

अपरा काशी कहे जाने वाली फर्रुखाबाद की सरजमीं ने सभी को मौका दिया, लेकिन आलू की खेती करने वाले किसानों की हालत जस की तस ही है। यहां सर्वाधिक आठ बार कांग्रेस का संसदीय सीट पर कब्जा रहा। खुला खेल फर्रुखाबादी की कहावत भी यहां के लोगों ने खूब चरितार्थ की। मंडल कमीशन के समय जनता दल का सिक्का भी यहां चला। समाजवादी डॉ. राम मनोहर लोहिया को भी सिर आंखों पर बैठाया। देश के तीसरे राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन भी यहां के गांव पितौरा के थे। यहीं के उनके दामाद खुर्शीद आलम केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बनने के बाद राज्यपाल रहे। खुर्शीद आलम के बेटे सलमान खुर्शीद दो बार सांसद चुने गए। खुर्शीद इस समय कांग्रेस से और मुकेश राजपूत भाजपा से चुनाव मैदान में हैं। गठबंधन ने मनोज अग्रवाल को मैदान में उतारा है।

चुनाव के शोर में दफन हो जाते हैं मुद्दे
फर्रुखाबाद का सबसे अहम मुद्दा आलू की खेती है। वस्त्र छपाई उद्योग ने भी अपनी धाक खूब जमाई। अब वस्त्र छपाई की इकाइयां कम होती जा रही हैं। यह काम करने वाले साध समाज के लोग पलायन कर रहे हैं। फर्रुखाबाद की दालमोठ की चर्चा दिल्ली तक होती है। यहां की दालमोठ को उचित मुकाम नहीं मिल सका। गंगा में बाढ़ से होने वाली तबाही को रोकने के लिए कोई इंतजाम नहीं हुआ।

किसी को सिर्फ मोदी से मतलब, किसी को गठबंधन मजबूत दिखा
कायमगंज स्टेशन के पास ट्रांसपोर्टर पप्पू दुबे मिले। वह बताते हैं कि योगी व मोदी की सरकार ने आम जनता के लिए काम तो कुछ खास नहीं कराए। पर वोट तो मोदी को ही देंगे। प्रत्याशी से उन्हें कोई लेना देना नहीं है। कुछ आगे बढ़ने पर पुराने प्रइवेट बस अड्डे पर शिराज खां बैठे मिल गए। उनसे चुनाव के हाल पूछा तो बोले, गठबंधन मजबूत दिख रहा है। उनके समाज का रुझान उसी की तरफ हो रहा है। गांव इजौरा निवासी बादाम सिंह ने कहा कि विकास की कोई बात नहीं कर रहा है।

पान में कत्थे के साथ लगाते चुनावी गणित

आवास विकास तिराहे के पास खोखे में दुकान रखे बबलू भी चुनाव की चर्चा में व्यस्त रहते हैं। रात को उनकी दुकान पर दो-चार लोग इसके लिए पहुंच जाते हैं। बबलू पान लगाते समय चुनाव का माहौल पूछना नहीं भूलते हैं। बस उनका एक ही सवाल होता है कि कौन जीत रहा है। वहां खड़े युवक ने उनके मन की बात नहीं की तो कत्था लगाने के बाद पान बनाना वहीं रोक दिया और बहस शुरू हो गई। किसी ने मोदी की तारीफ की तो कोई कांग्रेस के न्याय का गुणगान करता दिखा। वहीं, राजू गठबंधन के मजबूत होने का दावा कर जातीय गणित समझाने लगे।

आलू और विकास की नहीं हो रही बात
अमृतपुर तहसील पहुंचने पर वहां अधिवक्ता प्रभाकर त्रिवेदी पूछने पर बोले, भाई चुनाव का शोर इस बार कुछ कम है। पर जितना है उसमें मुद्दे गायब हैं। आलू पर इस बार सब चुप्पी साधे बैठे हैं। गंगा के किनारे के गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए कोई योजना किसी के पास नहीं है। अमृतपुर निवासी आदित्य ने कहा कि पिछली बार से इस बार मोदी लहर थोड़ी कम है।

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