मेरा बूथ सबसे मजबूत,अब कलई खुलेगी सबकी? 20 मई 2019

नरसिंहपुरिया डोज,संजय जैन पत्रकार नरसिंहपुर,

नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले में लोकसभा मतदान के बाद उन लोगों को नींद नहीं आ रही है जिन लोगों ने अपने अपने मतदान केंद्रों को जिताने की जबावदारी ली है भाजपा ओर कांग्रेस ने सेक्टर ओर बूथों के हिसाब से नेताओं/कार्यकत्र्ताओं को क्षेत्र बार बूथ मेनेंजमेंट की व्यवस्था प्रणाली लागू की है। इन बूथों के प्रदर्शन पर ही आगे नेताओं/कार्यकत्र्ताओं की पूंछ परख बढ़ेगी। इससे यह पता चलेगा कि किस नेता/कार्यकत्र्ता की जमीनी/धरातलीय पकड़ कितनी है। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस में मुख्यमंत्री कमलनाथ ने साफ कहा कि बूथों के परिणाम हिसाब से नेताओं/कार्यकत्र्ताओं का कद नापा जायेगा। वहीं भाजपा में राष्ट्रीय स्तर पर मेरा बूथ सबसे मजबूत का ध्येय रखा गया है। बीते विधान सभा चुनाव में कांग्रेस ने जिले में बेहतर प्रदर्शन कर चार में से तीन सीटे अपनी झोली में डाली। विधानसभा चुनाव में कांगे्रस के जिलाध्यक्ष मैथिलीशरण तिवारी अपने गृह ग्राम कोसमखेड़ा के बूथ जहां जिताने में सफल रहे। वहीं भाजपा के जिलाध्यक्ष अभिलाष मिश्रा अपने गृह ग्राम बिलहरा के तीनों बूथों से भाजपा को जिताने में असफल रहे। इतना ही नहीं सांसद के गृह ग्राम लोलरी से एक बूथ कांग्रेस व एक बूथ भाजपा सफल रही। इसी वजह से इस बार लोकसभा चुनाव में भाजपा के जिलाध्यक्ष बिलहरा ओर लोलरी के बूथों पर अपनी पूरी ताकत लगाये रहे। उनकी ताकत सफल हुयी कि नहीं ये तो मतगणना के बाद पता चलेगा। इस बार भी भाजपा का प्रदर्शन निराशा जनक उनके बूथों पर रहा तो उनकी जिलाध्यक्ष पद पर भी ग्रहण लग सकता। कांग्रेस ने जिले भर में सेक्टर के हिसाब से बूथों की रणनीति बनायी थी। इस हिसाब से नेताओं ओर कार्यकत्र्ताओं को चुनाव जिताने का मंत्र दिया। इसमें कांग्रेस कितनी कामयाब रही यह तो मतगणना के बाद ही पता चलेगा। इसमें वे लोग भी चिंतित है जिन लोगों ने मुंह चलाके बूथों को जिताने की जबाबदारी उम्मीदवारों से ली थी। जिसके लिये बाकायद उन्होंने नगदनारायण/लिफाफे स्वीकार किये थे। इस प्रकार के लोग हर चुनाव में अपना दांव/चकरा चला लेते हैं अगर हवा में तीर निशाने पर लग गया तो ठीक है नहीं तो कौन सी रिकवरी होनी है। बूथों के हिसाब से ही भाजपा ओर कांग्रेस ने जो रणनीति बनायी थी उस हिसाब से जीत/हार का मूल्यांकन कार्यो के लिये किया गया तो जमीनी कार्यकत्र्ताओं की राजनीति में पकड़ के साथ राजनैतिक तवज्जों बढ़ जायेगी। राजनीति में बर्षो से काम करने/फटटा उठाने नेताओं/कार्यकत्र्ताओं के दिन फिर जायेगें। राजनीति पैराशूट ना होकर ग्रासरूट हो जायेगी। इस लोकसभा चुनाव में बूथों ओर जमीनी कार्यकत्र्ताओं/नेताओं को लेकर राजनैतिक दलों ने जो रूचि दिखाई वह आने वाले राजनैतिक घटनक्रमों में अहम भूमिका निभायेगा। अब देेखना है कि राजनैतिक दल परिणाम के बाद अपनी सोच पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं कि नहीं?

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