एक बार फिर दिखा सिद्धू का पाकिस्तान प्रेम

‘अगर पाकिस्तान वास्तव में भारतीय सिखों के लिए गलियारे खोलता है, तो ‘झप्पी छोड़ो, मैं उसे एक पप्पी दूंगा.’-सिद्धू

पंजाब के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू ने पाकिस्तान के प्रति अपने प्यार को फिर से खुले तौर पर जाहिर किया है. सिद्धू ने कहा कि ‘भाषा और खानपान की समस्याओं’ के कारण दक्षिण भारत जाने से बेहतर है पाकिस्तान जाना. इसके साथ उन्होंने यह भी दोहराया कि पाकिस्तान सेना प्रमुख कमर जावेद बाजवा के गले मिलने का उन्हें कोई पछतावा नहीं है.

कसौली साहित्य समारोह के पहले संस्करण में बोलते हुए, क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू ने कहा, ‘जब मैं दक्षिण भारत जाता हूं, तो वड़क्कम जैसे एक दो शब्दों को छोड़कर शायद ही कोई और शब्द मैं समझ पाता हूं. वहां का खाना भी मुझे ठीक ही लगता है. इडली जैसे व्यंजन मैं खा सकता हूं लेकिन दक्षिण भारतीय व्यंजन को मैं लंबे समय तक नहीं खा सकता. पर अगर वहीं मैं पाकिस्तान जाता हूं, तो वे पंजाबी और अंग्रेजी बोलते हैं और मैं खुद को उनसे अधिक जोड़ पाता हूं.’

पाकिस्तानी सेना प्रमुख को गले लगाकर पहले ही विवाद खड़ा कर चुके:

ये बयान देकर सिद्धू फिर से विवाद में फंस सकते हैं. इसके पहले ही उन्होंने पाकिस्तान में इमरान खान के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान पाकिस्तानी सेना प्रमुख को गले लगाकर देश में उन्होंने राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया था. बाजवा को गले लगाने की बात को बढ़ते देख सिद्धू ने बाद में सफाई दी थी कि बाजवा द्वारा पाकिस्तान के करतारपुर साहिब गुरुद्वारा जाने के लिए भारत के पंजाब के सिखों के लिए करतारपुर सीमा को पाकिस्तान को खोल दिए जाने की बात कहने पर उन्हें गले लगाया था.

बाजवा को गले लगाने की घटना पर बात बिगड़ते देख सिद्धू ने कहा कि अगर पाकिस्तान वास्तव में भारतीय सिखों के लिए गलियारे खोलता है, तो ‘झप्पी (गले लगाना) छोड़ो, मैं उसे एक पप्पी (किस) दूंगा.’ ‘पंजाब अब वो राज्य नहीं रहा जो हुआ करता था. यह पांच नदियों से बना था, लेकिन विभाजन के बाद दो नदियां पाकिस्तान के हिस्से में चली गईं.’

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