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‘विपक्षी सांसदों ने संसद में हंगामे की सारी हदें पार की थीं’, सरकार के सूत्रों ने निलंबन की वजहें गिनाईं

सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार,सारे संसदीय बुलेटिन में उन सांसदों के नाम लिखे गए हैं, जिन्होंने सदन की कार्यवाही में बाधा डाली हो. पहले से ही तय किया था कि यह सत्र चलने नहीं देना है.

नई दिल्ली: Parliament Winter Session : संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन कृषि कानूनों (farm laws repeal) की वापसी से जुड़ा विधेयक को संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया, लेकिन मानसून सत्र में हंगामा करने वाले राज्यसभा के 12 सांसदों के निलंबन (Opposition MPs suspension Rajya Sabha) की शीतकालीन सत्र में कार्रवाई के फैसले के बाद माहौल गर्मा गया. विपक्ष ने इस मुद्दे पर एकजुटता दिखाते हुए कल बैठक बुलाई है तो आला सरकारी सूत्रों ने भी इस फैसले के पीछे की वजहें गिनाई हैं. सूत्रों ने कहा, संसद के मॉनसून सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) को मंत्रियों का परिचय नहीं कराने दिया गया था. नियम है कि अगर मंत्रियों का परिचय नहीं होता तो वे प्रश्नों के जवाब भी नहीं दे सकते.

सरकार के शीर्ष सूत्रों के अनुसार,सारे संसदीय बुलेटिन में उन सांसदों के नाम लिखे गए हैं, जिन्होंने सदन की कार्यवाही में बाधा डाली हो. पहले से ही तय किया था कि यह सत्र चलने नहीं देना है. 22 जुलाई को अश्विनी वैष्णव के हाथों से पेपर छीने गए थे. उस दिन 24 सांसदों के नाम लिए गए थे. सदन में सीटियां बजाई गईं. वीडियो रिकॉर्डिंग करके यूट्यूब में डाला गया. चेयर पर किताब फेंकी गईं. टेबल पर खडे होकर डांस तक किया गया, ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. जो सांसद बोलना चाह रहे थे, उनके चेहरे के सामने प्लेकार्ड लगाया गया ताकि कैमरे पर प्लेकार्ड आएं. सरकार ने हर बार बातचीत की पेशकश की.

विपक्षी नेता बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की बैठक में आश्वासन देते थे, लेकिन फिर हंगामा करने लगते थे. 30 जुलाई, चार अगस्त, 10 और 11 अगस्त को हंगामा किया. नौ अगस्त को साबित हुआ कि विपक्ष के पास संख्या नहीं है. हर बार सरकार चेयर के पास जाती थी कि कार्रवाई हो लेकिन विपक्ष आश्वासन देता था कि अब सदन चलेगा. 11 अगस्त को चेयरमैन वेंकैया नायडू क्षुब्ध हो गए और उनके आंसू बहे. उन्होंने कहा कि वो पूरी रात सो नहीं सके. झूठा आरोप लगाया कि बाहर से
मार्शल लाए.