राधा मोहन सिंह को केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने पर पूर्वी चम्पारण की जनता में मायूसी

छठी बार सांसद बने राधा मोहन सिंह जो पिछली सरकार में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री थे ,को इस बार मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किए जाने से पूर्वी चंपारण की जनता में घोर मायूसी छाई है। यद्यपि ऐसा अटकल लगाया जा रहा है कि संगठन की दक्षता प्राप्त राधा मोहन सिंह जो भाजपा अनुशासन समिति के केंद्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं और उनके संगठन की क्षमता को भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने देखा है यही कारण है कि जब वह पिछले लोकसभा चुनाव में यानि दो हजार चौदह के चुनाव में पूर्वी चंपारण लोक सभा सीट से भारी मतों से विजयी हुए थे तो उन्हें केंद्र में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री के रूप में जिम्मेवारी मिली और उन्होंने उस जीम्मेदारी का बखूबी निर्वाह भी किया।

ऐसा अमूमन नहीं होता है कि कोई भी केंद्रीय मंत्री प्रत्येक शुक्रवार या शनिवार को अपने संसदीय क्षेत्र में आता हो और क्षेत्र में विकास कार्यों की समीक्षा तथा आम जनता से मिलता हो, लेकिन राधा मोहन सिंह 68-69 की उम्र में भी पांच वर्षों तक लगातार हरेक  शुक्रवार या शनिवार को क्षेत्र में आते रहे और विकास कार्यों की समीक्षा भी की और निर्देश भी दिया। इससे उनके कार्य निष्ठा और क्षेत्र की जनता के प्रति जो समर्पण और जो सेवा भाव था, उसको लोगों ने देखा। विकास का भी उन्होंने जो मॉडल चंपारण में पेश किया, खासकर के मोतिहारी रेलवे स्टेशन का जो काया कल्प हुआ, वह स्टेशन अब देश के बड़े बड़े स्टेशनों की श्रेणी में आ चुका है। केंद्रीय कृषि विश्व विद्यालय, मिल्क फार्म एवं अन्य कई नई नई योजनाओं को उन्होंने पूर्वी चंपारण की भूमि पर लाकर के यहां के युवाओं को रोजगार भी दिया। कई कृषि मेला, रोजगार मेला का भी आयोजन उन्होंने किया और लोगों ने इसका लाभ भी उठाया। सांगठनिक रूप मे अनुशासित रहने वाले राधा मोहन सिंह ने संगठन में भी अनुशासन के मामले में कभी भी कोई समझौता नहीं किया। पूर्वी चंपारण में उन्होंने संगठन को बिलकुल बांध कर रखा है लेकिन इसका एक तरह से कुछ उन्हें खामियाजा भी भुगतना पड़ा संगठन के अंदर ही अंदर बहुत लोग उनके व्यवहार से उनके विरोधी भी थे ,यद्दपि वोट पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और संगठन के सारे लोगों ने मिल जुल कर के राधा मोहन सिंह को वोट किया। यही कारण रहा कि राधा मोहन भारी मतों से इस बार भी विजयी हुए।

भाजपा संगठन के अलावा जिले के लोगों मे राधा मोहन सिंह के प्रति अभी भी बहुत स्नेह और प्यार है इस कारण न सिर्फ एनडीए के लोगों में बल्कि आम जनता में भी राधा मोहन से के मंत्री नहीं बनने से मायूसी छाई हुई है। राधा मोहन सीनियर जो विकास कार्य किया उसको जनता देख रही है और इस बार का चुनाव विकास का मुद्दा मुख्य रूप से छाया रहा यह ठीक है कि नरेन्द्र मोदी की तूफानी हवा पुरे देश में थी, बावजूद राधा मोहन सिंह ने जो पूर्वी चंपारण के लिए किया था उसकी ऋणी पूर्वी चंपारण की जनता उनके मंत्री नहीं बनाए जाने से दुखी है ,जो स्वाभाविक भी है। वैसे सारण, दोनो चंपारण, दरभंगा से एक भी मंत्री नहीं बनाए गए हैं। चूकि बिहार में मजबूत जनाधार वाली पार्टी जेडीयू ने मंत्रिमंडल में शामिल होने से इनकार कर दिया जबकि उनके काफी संख्या में एमपी भी हुए हैं। संभव है कि दोनों चंपारण, दरभंगा से एनडीए के विजयी प्रत्याशी को मंत्रिमंडल में शामिल करने की योजना रही होगी, लेकिन चूंकि नीतीश कुमार ने मंत्रीमंडल मे जदयू के शामिल होने से इनकार कर दिया इसलिए इस बड़े क्षेत्र से मंत्रिमंडल में कोई नहीं आ सका ।

मोतिहारी, अशोक वर्मा ।

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