गांधी की कर्मभूमि चंपारण एवं शिवहर के चारो लोकसभा सीट पर एनडीए की भारी जीत।

विहार के 40 लोक सभा सीट मे  39 पर एनडीए ने भारी मतो से विजय हासिल कर इतिहास रचा। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कभी भी एक विचारधारा के साथ अपने को नहीं बांध पाए। लालू के राज को जंगल राज कहकर विहार की कुर्सी पर भाजपा के साझे मे सत्ता पर बैठने वाले नीतीश कमार  बहुत जल्द हीं मुस्लीम वोट के लिए भाजपा का साथ छोड कर राजद के गोद मे आये थे  ,लेकिन बहुत जल्द राजद के तानाशाही रवैये से क्षुब्ध होकर नीतीश कुमार पून: सभी गिला शिकवा भूलकर भाजपा को अपना साझेदार बनाया और लंबित विकास कार्यक्रमों  को पूर्ण करने मे आगे बढे।जब भाजपा और जदयू अलग अलग थे उसी दरम्यान 2017 का महात्मा गांधी चंपारण सत्याग्रह वर्ष आ गया। विहार मे नीतीश सरकार और केंद्र सरकार अलग अलग सत्याग्रह समारोह आरभ किए।विहार के तत्कालिन राज्यपाल महामहिम रामनाथ कोबिंद ने 10 अप्रैल 1917 को एक वर्ष तक चलने वाले महात्मागांधी चंपारण सत्याग्रह शताब्दी  वर्ष समारोह  का उद्घाटन किया।उस समारोह मे स्वतंत्रता सेनानी एवं उनके उत्तराधिकारियों को सम्मानित किया गया। समापन समारोह 2018  मे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी मोतिहारी आये थे और देश भर आये गांधीवादियों को संबोधित किया था।

दरअसल महात्मा गांधी चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह के माध्यम से नरेंद्र मोदी ने भाजपा पर गांधी विरोधी होने के ठप्पा को धोने का प्रयास किया।दो साल पहले आयोजित इस महत्वपूर्ण राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम में गांधी के विचारों पर जमकर चर्चा हुई तथा हिसक हो रहे  विश्व के लिए एक मात्र गांधी के आदर्श सिद्धांत एवं दर्शन को ही समाधान स्वरुप उचित माना गया । स्वतंत्रता संग्राम में चंपारण के सेनानियों का योगदान स्वर्णाक्षरों में अंकित है । बापू ने उन्निस सौ सत्रह में सफल चंपारण सत्याग्रह चलाकर जो सफलता पाई थी उसका प्रभाव राष्ट्रीय आंदोलन पर पडा था। सफल चम्पारण सत्याग्रह के कारण चंपारण का नाम राष्ट्रीय हीं नहींअंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित हुआ था और जब देश आजाद हुआ उसके बाद चम्पारण में कांग्रेस पार्टी का लंबा समय तक अपना बहुमत रहा। चम्पारण कांग्रेसियों का गढ़ माना जाता था । सभी लोकसभा एवं विधानसभा सीट पर कांग्रेस पार्टी के ही प्रत्याशी लंबे समय तक विजयी होते रहे । पहली बार 1966 में चंद्रिका यादव ने जनसंघ के टिकट पर मोतिहारी से विधानसभा का सीट जीता था। चंपारण सत्याग्रह भूमि और कांग्रेसियों का लंबे समय तक गढ़ रहा चंपारण विकास के मार्ग में हमेशा पीछे ही रहा गांधी के बुनियादी विद्यालय ध्वस्त हुए और चंपारण में चिकित्सा व्यवस्था बिलकुल हीं चरमरा गई । चंपारण जिला जिसे देश का एक मॉडल जिला होना चाहिए था, क्योंकि गांधी के सत्य और अहिंसा का सफल प्रयोग भूमि ही है, लेकिन कांग्रेसी हुकूमत एवं जिले के तमाम सांसदों विधायकों ने चंपारण की उपेक्षा हीं की । पूर्वी चंपारण लोक सभा के पांच बार सांसद रहे केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री  राधा मोहन सिंह ने महात्मा गांधी चंपारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष को विशेष रूप से बनाने का प्रस्ताव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष रखा और समारोह को विकास के कार्यों से जोड़कर उन्होंने दो हजार उन्नीस के चुनाव फतह का एक तरह से प्रारूप तैयार किया ।प्रधानमंत्री जी ने उनके प्रस्ताव को स्वीकार कियाऔर इसके लिए विशेष फंड की व्यवस्था भी की।जब चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह का शुभारंभ हुआ उस समय नीतीश कुमार और भाजपा में छत्तीस का संबंध था लेकिन समय ने करवट ली और दोनों एक हो कर समापन समारोह का आयोजन किया। समापन समारोह में भी स्वतंत्रता सेनानी व उनके सैकडो उत्तराधिकारियों को बडे ही आदर के साथ सम्मानित किया गया। सम्मानित करने में शिवहर की सांसद रमा देवी, स्वयं राधामोहन सिंह , पर्यटन मंत्री प्रमोद कुमार, सहकारिता मंत्री इंजीनियर राणा रंधीर एवं जिले के तमाम भाजपा विधायक एवं विधान पार्षद थे।

उक्त महत्वपूर्ण कार्यक्रम का प्रभाव जिले ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में पड़ा और जो गांधी विरोधी छवि भाजपा की बनी हुई थी, भाजपा ने अपनी छवि को निखारने में बहुत हद तक सफलता पाई। भाजपा ने बड़ी ही चालाकी के साथ सूक्ष्म में और प्रभावशाली कदम उठायाा । दो बरस पहले भाजपा ने जो सोच कर के कदम उठाया था उन्नीस के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उसका रिटर्न मिला और अप्रत्याशित भाजपा की जीत पूरे बिहार में हुई ।लंबे समय तक सत्ता में रही कांग्रेस पार्टी से जो बड़ी चूक हुई थी भाजपा ने उस चूक का भरपूर लाभ उठाया दोनों चंपारण में तीन लोकसभा सीट है और तीनों पर एनडीए के प्रत्याशी ने तीन लाख के करीब वोट से जीत प्राप्त की ।चंपारण से सटे शिवहर जिला जिसका दो विधानसभा क्षेत्र पूर्वी चंपारण में पड़ता है वहां भी भाजपा की प्रत्याशी रामा देवी ने तीन लाख से अधिक वोट से जीत प्राप्त की ।चारों लोकसभा सीट में एक  पूर्वी चंपारण की सीट जहां से केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन  चुनाव लड़ रहे थे, को सबसे सुरक्षित और जीत वाली सीट माना जा रहा था।बगहा के निवर्तमान भाजपा सांसद सतीश दुबे का टिकट काट कर के जदयू के बैजनाथ महतो को टिकट देना गंभीर मामला बनता जा रहा था क्योंकि सतीश दुबे ने बागी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी थी उन्होंने यह भी कहा था कि मैं जीत करके भाजपा में शामिल हो जाऊंगा ।

पश्चिम चंपारण का सीट भी बहुत कांटे का बन गया था क्योंकि वहां प्रत्याशी बनने की आस लगाए हुए राजद के राजन तिवारी पूर्व विधायक ने बागी उम्मीदवार के रूप में बेतिया से चुनाव लड़ने की घोषणा की थी । शिवहर लोकसभा सीट के प्रबल दावेदार प्रत्यासी लवली आनंद वहां से चुनाव लड़ने की घोषणा करके रामा देवी के लिए एक असमंजस की स्थिति पैदा कर दी थी ।भाजपा की मैनेज कमेटी ने तीनों सीटों को गंभीरता से लिया और सतीश दुबे को राज्यसभा में भेजने का आस्वासन देकर उनका समर्थन जदयू को दिलाने मे सफलता प्राप्त की।ठीक इसी प्रकार राजन तिवारी को भी भाजपा ने समझा बुझाकर  भाजपा प्रत्याशी संजय जायसवाल को समर्थन देने में कामयाबी हासिल की । शिवहर से लवली आनंद भी मान गई और महिला प्रत्याशी भाजपा की रामादेवी को उन्होंने मंच से समर्थन देकर उनकी जीत सुनिश्चित कर दी । चारों पर प्रत्याशी ने प्रचंड मत से जीत हासिल की ।पूरे बिहार में सीटो औय बागियों को समझाने बुझाने मे चम्पारन मॉडल का ही पेशकश किया गया ।  बागी प्रत्याशियों को मनाने में नीतीश कुमार और भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी होगी परिणाम सामने है । चंपारण सत्याग्रह शताब्दी समारोह जिसे केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर मनाया इसका भी प्रभाव पूरे बिहार पर पड़ा और जीत निश्चित हुई।विहार के 40 लोकसभा सीट मे 39 एनडीए को मिला।

मोतिहारी, अशोक वर्मा । 

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