1980 के दशक से संचालित पारंबा सेवा शक्ति पीठ के संस्थापक चंचल बाबा ने आश्रम मे विशेष भेट

मोतिहारी,4-4-19,अशोक वर्मा।
अंबिका नगर मे1980 के दशक से संचालित पारंबा सेवा शक्ति पीठ के संस्थापक चंचल बाबा ने आश्रम मे विशेष भेट मे रामनवमी पर्व और उसके  इतिहास पर बताया कि भारतीय संस्कृति मे रामनवमी का त्योहार अर्थात बसंत ऋतु का बसंतीय नवरात्र  सनातन धर्म अनुरागियों के लिए विशेषकर भारतीय हिंदू के लिए काफी महत्वपूर्ण होता है।यह पर्व अनादि काल से भारत मे मनाया जाता है।चैत शुक्ल पक्ष प्रथम प्रतिपदा से लेकर दशमी तिथि तक इसे मनाया जाता है।भगवान श्रीराम का पार्दूभाव भारत की भूमि पर महाराजा दशरथ के पूत्र के रुप मे पापो के नाश के लिए चार भाईयों  के साथ होता है।चारों धर्म ,अर्थ  काम और मोक्ष के रूप मे अवतरित होते हैं।रामनवमी का पर्व किसी खाश जाति वर्ग या ऋषि  मुनि के दायरा मे मनाने का पर्व नहीं है।श्री राम के प्रति आस्था एवं श्रद्दा ब्राह्मण से लेकर भंगी तक मे समान है।राजा से लेकर रंक तक,निषाध,कुलभील,बंदर,ऋक्ष,भालू,गिद्ध सबमें श्री राम वसे हुए हैं।  रामनवमी का पर्व समस्त मानव प्राणियों के लिए शांति सदभावना,भाई भाई का प्रेम,पिता का आज्ञा पालन,पारिवारिक  स्नेह और प्यार अनुशासन,सत्कर्मो का आचरण,शत्रु और मित्र की पहचान,समस्याओं के समाधान का मार्ग बतलाने वाला है। इतना हीं नहीं एक राजा का प्रजा पर निश्चय का मिसाल है।कैसे श्री राम प्रजा की बातों को अमल करते हुए पत्नी तक का तयाग करते हैं।
,ऐसा मिसाल अन्यत्र नहीं है।श्रीराम के  स्मरण से हर समस्याओं का हंसते हंसते समाधान होता है और भक्त अपने लक्षय को सहज प्राप्त कर लेते हैं।श्रीराम न सिर्फ भारत के लिए इष्टदेव हैं बल्कि पुरे विश्व के लिए समस्या समाधान सवरुप हैं।
चंचल बाबा ने बताया कि रामनवमी के अवसर पर प्रतिदिन इस मंत्र को एक हजार बार जपने से कष्ट निवारण होता है और तमाम पारिवारिक समस्या का समाधान होता है।मंत्र–“ओम श्री रामचंद्रा ध्यान नम:”
देवी भक्त अगर इस मंत्र को2100बार जपे तो मनचाहा फल की प्राप्ति होती है।मंत्र है—“ॐ ऐं हीं क्लिं चामुण्डलायें विच्चे”

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