भ्रष्टाचार की कब्र मे दफन कानून

 

मोतिहारी, 22-2-19,नागेंद्र जायसवाल।प्रस्तुती अशोक वर्मा।                        

सूबे मे बहुत से जनोपयोगी कानून बने हैं ,जो अगर जमीन पर उतर जाता तो विहार का कल्याण हो जाता,लेकिन भ्रष्ट व्यवस्था के कब्र मे वह सब दफन होकर रह गया है।नमूना के तौर पर जिला मुख्यालय के अंचल कार्यालय मे दाखिल खारिज कराने वालों का किसी स्वतंत्र एजेंसी से अगर सर्वे कराया जाय तो शायद एक भी  ऐसा मामला न मिलेगा जिसमें किसी का भी  दाखिल खारिज बिना चढ़ावा का हुआ हो।नियम प्रमाण जमीन के निबंधन मे प्रति दस्तावेज उसको चार तरह के चालान पर रूपया जमा करना पडता है।एक जमीन का मूल्याकंन शुल्क दुसरा भूस्वामि शुल्क तीसरा आदेशिका शुल्क एवं चौथा भूस्वामि सहआदेशिका शुल्क। प्रत्येक दस्तावेज के साथ शुल्क इसलिए लिया जाता है ताकि विहार टीनेंट होल्डिंग जो मेंनटेंनेंस आफ रेकर्ड कानून 73 के सेक्सन( 4)के तहत उक्त दासतेवेज की प्रतिलिपि संबंधित अंचल मे फार्म 13के साथ भेज दे।इसी कानून के सेक्सन(14)के अनुसार फार्म 13के साथ दस्तावेज की प्रति पाने पर अंचल अधिकारी को स्वयं दाखिल खारिज कर जमाबंदी कायम कर देनी है।राज्य के किसी भी अंचल मे इस कानून का अनुपालन शायद हीं होता होगा।इस कानून की अवहेलना के खिलाफ जानकारी के आभाव मे उपभोक्ता फोरम मे भी कोई नहीं जाता है।सूचना के अधिकार के तहत मिले जवाब मे है कि 2012 -13 मे पुरे राज्य मे भूस्वामि शुल्क मद मे 27करोड 44 लाख49हजार 237रुपया।2013-14 मे 31करोड 99 लाख 49 हजार667रुपया ,2014-15 मे31करोड24लाख83हजार 435रुपया लिया गया।केवल पूर्वी चंपारण मे2012-13 मे 1 करोड 54 लाख 67हजार132 रुपया,2013-14 मे1करोड 84लाख82हजार442 रुपये,2014-15 मे1करोड80लाख27हजार 24रुपये भूस्वामि शुल्क मद मे लिए गए्।आदेशिका शुल्क मे 2012-13 मे 24लाख 59हजार,2013-14 मे 26लाख 41हजार तथा 2014-15 मे24लाख 95हजार रुपये लिए गए।जिला लोक सूचना पदाधिकारी सह जिला अवर निबंधक मोतिहारी ने अपने पत्रांक दिनांक557,26-4-2018 के द्वारा सूचना दी है कि जिला के सभी  उप निबंधन कार्यालय द्वारा वित्तीये वर्ष 2014-15 मे निबंधित दस्तावेजों के साथ सभी  अंचलों मे फर्म 13भेजी गई है,लेकिन अंचल कर्मियों द्वारा एक भी  दाखिल खारिज स्वत:नहीं किया गया है।कई बार अंचल कार्यालय का निरिक्षण भी  हुआ फिर भी  इस दिशा मे किसी ने कोई भी कार्यवाही नहीं हुई।पटना उच्च न्यायालय द्वारा भी इस दिशा मे शख्त आदेश दिए गए लेकिन जिला प्रशासन द्वारा कोई भी कार्यवाही नही की गई।सभी दाखिल खारिज चढावा संस्कृति के माध्यम से हीं हो रहा है।

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