चंचल बाबा बनाते है एलर्जी निवारण चमत्कारी भस्म।

 

मोतिहारी। विज्ञान के विकसित युग मे पारंबा सेवा शक्तिपीठ मे सत्याशरण महाराज उर्फ चंचल बाबा द्वारा मंत्र शोधन विधि से निमिॅत एलजीॅ निवारण भस्म के चमत्कारी परिणाम से आम लोग आज अाश्यचयॅ चकितहैं। भस्म को प्रतिदिन वे मुफ्त बांटते हैं। 1980 के दशक मे नगर के रेलवे स्टेशन के पश्चिमी भाग जो बिलकुल विरान था, तथा वहाँ मृत मवेशी एवं लावारिस लाश फेंके जते थे, उस विरान जंगल झाडी को साफ सफाई कर ईश्वरीय प्रेरणा से बाबा ने वहाँ आश्रम बनाया और रामायाण गीता एवं अन्य धामिॅक पुस्तक आधारित जीवन जीने का संदेश देने लगे। शाकाहारी भोजन का संदेश एवं योग का अभ्यास भी कराते थे। कठिन से कठिन योग वे स्वंय करते थे। भस्म के बारे मे चंचल बाबा ने बताया कि योग एवं साधना से मिली दिव्य शक्ति एवं पहचान से हिमालय के कंद्राओं से एकत्र जडी बूटियों को प्रतिदिन यज्ञशाला के हवनकुंड के पास बैठ विधि विधान से पूजा संपन्न कर मै मंत्र उच्चारण के साथ हवनकुंड मे भस्म तैयार करता हूं। इस विधि को मंत्र शोधन विधि कहते हैं।

उन्होंने बताया कि बदलते भागदौड़ के दौर,धनलोलुपता की चाहत अधिक महत्वाकांक्षी होना,एवं उपभोक्तावादी संस्कृति के दिनोदिन बढते प्रभाव ने आम मानव के अंदर बढते तनाव का मुख्य कारण है। आज धन बढे हैं,सुख सुविधा के साधन बढे है लेकिन धर्म औरआध्यात्म से लोग कटते जा रहे है, जिससे कारण तनाव एव अन्य मानसिक रोगों से ग्रसित होते जा रहे हैं। इस गंभीर समस्या के समाधान हेतु यह भस्म भगवान के निर्देश मे बन रहा है। मै सिर्फ माध्यम हुं सारा कार्य प्रभू का है। जब भस्म पहली बार बना और शिष्य गण सेवनआरंभ किए तब मै खुद इसके चमत्कारी प्रभावसे आश्चर्यचकित रह गया। आज इस भस्म की ख्याति विदेशो मे भी शिष्यों को मिले लाभ के कारण हुई है। चर्म रोग,दम्मा एवं स्वांस संबंधित किसी भी प्रकार का रोग, निंद्रा की समस्या ,एवं अन्य किसी भी प्रकार के एलजीॅ मे चूटकी भर भस्म के सेवन से लाभ होता है। प्रति दिन भस्म तैयार होने के बाद व्यास गद्दी पर बैठने के बाद चंचल बाबा खुदअपने हाथो से जरूरतमंदो के बीच मुफ्त में बांटते हैं।

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