रालोसपा का यूपीए मे जाने से चंपारण मे एनडीए को झटका।

उपेंद्र कुशवाहा चंपारण मे तीन दिनो के मंथन के बाद अंतत:एनडीए को टाटा कर यूपीए गठबंधन मे शामिल हो हीं गए।वैसे यूपीए ने उपेंद्र कुशवाहा की सीटो की मांग पर हुई नाराजगी का कोई महत्व हीं नहीं दिया शत्रुघ्न सिन्हा के समान उपेंद्र कुशवाहा के मामले मे मोदी ने चुप्पी साध लिया ,और आसानी से उनका त्यागपत्र स्वीकार कर लिया। दोनो चंपारण मे कुशवाहा समाज की अच्छी संख्या होने से राजनीति़क समीकरण अब बिगडता नजर आ रहा है।राजनीति़क पंडितों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा की राजनीति़ बिलकुल उलझी हुई है। एक समय था जब नीतीश कुमार ने उनको उस समय राज्यसभा मे भेजा  जब वे एक तरह से राजनीति़क रूप से बेरोजगार थे।दुसरी ओर पूर्ण बहुमत मे होते हुए एन डी ए ने केंद्रीय मंत्रीमंडल मे उनको रखकर उनका मान बढाया और जब वे नीतीश कुमार और एन डीए मेसे किसी का नही हुए तो क्या यूपीए का होंगे?
                                     चंद माह पहले कुशवाहा समाज के बडे जनाधार वाले चंपारण के नेता सुभाष कुशवाहा ने  जब भाजपा को छोड़ रालोसपा का दामन थामा था तभी से यह अनुमान लगाया जा रहा था कि एनडीए मे सब ठीक नहीं है।आखिर मे वही हुआ जिसकी प्रवल संभावना थी। सुभाष कुशवाहा भाजपा छोड़ने के साथ हीं लगातार जिले भर मे भ्रमण और संपकॅ अभियान चला रहे हैं।उपेंद्र कुशवाहा की तीन दिनो तक चंपारण मे चले राजनीति़क सलाह और मंथन का समापन मोतिहारी मे हुआ था और ऐसी संभावना थी कि समापन सभा मे भाजपा गठबंधन से अलग होने का एलान उपेंद्र कुशवाहा यहां करेंगे ,लेकिन ऐसा न हो सका। उपेंद्र कुशवाहा के यूपीए मे आने से यूपीए निश्चित मजबूत हुआ है,लेकिन जिस सीट की संख्या मे हुए मतभेद के कारण वे एनडीए से अलग हुए वह बात यूपीए मे सीट बंटवारा के समय निश्चत होगा ऐसा लोग मान रहे हैं साथ यह भी  मान रहे हैं कि उपेंद्र कुशवाहा नई केंद्र सरकार मे बडे कबिना मंत्री  का  ख्वाब देख रहे हैं।विहार सरकार मे भी  मुख्यमंत्री से कम पर वे मानने वाले नहीं है,ऐसी स्थिति मे टकराहट निश्चित होगी ।दुसरी ओर लोजपा के द्दारा सीटो के मामलें मे उठा मतभेद क्या रंग लायेगा इसपर भी निगाहें लगी हुई है।राष्ट्रीय मुद्दा पर मोदी की लोकप्रियता मे कहीं कमी नहीं है।पहले देश तब और कुछ।  इस सिद्धांत पर देश की जनता पुरी तरह से मोदी के साथ है लेकिन मंहगाई , बेरोजगारी ,भ्रष्टाचार और जीएसटी के बोझ के कारण जनता का गुस्सा मोदी सरकार से काफी है।इसी का परिणाम तीन राज्यों का पराजय है।मोदी सरकार को भगवा रंग से हटकर देखना होगा और जल्द से जल्द उसका समाधान करना होगा।किसी भी गठबंधन मे बदलाव का जवाब जनता की समस्याओं का समाधान करना हीं है।सत्ता किसी भी दल के लिए स्थाई नहीं होती।वही सफल राजनीति़ज्ञ होता है जो जनता का नब्ज पहचाने।दुसरी ओर यूपीए फिलहाल उत्साह मे इसलिए है कि उसके आला नेता इस बात पर अासवसत है कि भाजपा विरोधी तमाम दल “मरता क्या नहीं करता” के कारण मजबूरन गठबंधन मे आ हीं जायेंगे ।देश मे बढते आतंकवाद और बन रहे हिंसक माहौल का सामना तुष्टिकरण के द्दारा असंभव है , आतंकवाद और अलगाववाद का आरंभिक छोटा नासूर जो अब देश मे कैंसर समान विकराल रूप ले लिया है।इस मामले मे यूपीए के पास सिर्फ चुप्पी है इसके अलांवा कुछ भी नहीं है।यूपीए को देश की संसकृति और दुनिया मे बढ़ रहे आतंकवाद को समझना होगा।भारत लंबे समय तक गुलाम रहा है।बंगला देश मे जबरदस्त हार का बदला पाकिस्तान भारत से हर हाल मे लेना चाहता है। कशमीर को मुददा बनकर पाकिस्तान भारत को तबाह करने का कार्य अपने देश के मुख्य एजेंडा मे रखा है। ऐसी स्थिति मे यूपीए को भी  अपने कार्यक्रम मे देश को सवोॅपरी मानना और राष्ट्रविरोधी शक्तियों का विरोध खुलकर करना होगा तब एनडीए को जवाब दे सकेगी।विकास रोजगार और भ्रष्टाचार के मामले मे भी इमानदार होना होगा।
मोतिहारी,अशोक वर्मा

WhatsApp chat