पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब को मूर्ति मे ढालकर, कलाकार एक बार फिर जी उठा।

 

मोतिहारी। ऐसी मान्यता है कि गीतकार,कलाकार,संगीतकार और सुलझा मूर्तिकार धर्म और देश के दायरा से बहुत उपर होता है। वह हवा और पानी के समान बिल्कुल स्वछंद होता है। उसकी रचना मे दिल और समाज को जोडने की ईश्वरीय वरदानी अलौकिक शाक्ति होती है। ऐसा हीं एक मूर्ति कलाकार है कनौजिया,जो अपनी विशेष सोच को मूर्ति के रूप मे ढालकर हमेंशा हीं वाहवाही लूटते रहे हैं। चालीस वर्ष से मूर्ति निर्माण के सधना मे वे लगे हुए हैं।

नगर के जानपुल रोड मे प्रति वर्ष की भांती इस वर्ष भी अपने नए सोच को मूतॅ रूप दिया है। इस्लाम धर्म के पूर्व राष्ट्रपति कलाम साहब को उनहोंने सरस्वति के संयुक्त प्रतिछाया के रूप मे दशाॅया है। मूर्ति को अंतिम रूप और भाव देने के दरम्यान उन्होंने बताया कि श्री कलाम बहुत हीं उंचाई को पाये थे। सरस्वति की उनपर विशेष वरदानी हाथ थी।वे शिक्षाविद थे और महान थे इसलिए मैने सरस्वति माँ की मूर्ति के साथ उनको संयुक्त रूप मे दशाॅने का प्रयास किया है।

-अशोक वर्मा

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