स्वच्छता में पिछड़ रहा दिल्ली का काॅर्पोरेशन, इंदौर खास उपाय अपनाकर बन रहा सिरमौर

 देशभर में स्वच्छता के आधार पर निकायों को दी जाने वाली स्वच्छता सर्वेक्षण की रैंकिंग में पिछड़ने वालों में राजधानी की एमसीडी भी है। हालांकि यहीं का कैंटोनमेंट बोर्ड हमेशा नंबर 1 और नई दिल्ली पालिका परिषद (एनडीएमसी) टॉप 10 में रहा है। एमसीडी के पिछड़ने का बड़ा कारण मौके पर कूड़ा अलग-अलग करके नहीं देना बताया जा रहा है। वहीं रैंक 1 वाले इंदौर में मौके पर ही कूड़ा 100 फीसदी अलग-अलग होता है। इंदौर आखिर क्यों दिल्ली की एमसीडी से बेहतर है और उसके कौन से ऐसे प्रयास हैं जिनकी वजह से बेहतर बना हुआ है। यह जानने के लिए भास्कर ने दिल्ली के तीनों म्यूनिसिपल कार्पोरेशन और इंदौर के म्यूनिसिपल कार्पोरेशन की तुलना की।

3-3  वार्ड को मॉडल बनाने का लक्ष्य

स्वच्छता सर्वेक्षण में रैंकिंग सुधारने के लिए दिल्ली की तीनों एमसीडी ने अपने-अपने इलाके में 3-3 मॉडल बनाने का टारगेट रखा है। इनके नामों की घोषणा कर दी है। इनमें सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट 2016 के तमाम प्रावधान लागू किए जाएंगे। इसके तहत इन इलाकों में यूजर चार्ज लगाने के साथ गंदगी फैलाने पर जुर्माना लगेगा है।

नॉर्थ एमसीडी

पीतमपुरा 64
राजेंद्र नगर 102
रोहिणी 58

साउथ एमसीडी

आरके पुरम 65एस
एंड्रूज गंज 59एस
जनकपुरी स. 16एस

ईस्ट एमसीडी

यमुना विहार 45ई
मयूर विहार फेस-1 1ई
आनंद विहार 18ई

दिल्ली-इंदौर में स्वच्छता को लेकर ये है अंतर

मौके पर अलग-अलग कूड़ा गीले कचरे का इस्तेमाल
इंदौर: मौके पर कचरा अलग-अलग कर देना इससे निगम को 5 स्टार रेटिंग मिलती है। इंदौर में लोग घर से गीला-सूखा कचरा अलग करके देते हैं। ऐसा 100% होता है। इंदौर: गीले कूड़े का इस्तेमाल कर घरों में खाद बनाने के लिए किया जाता है, जिससे कूड़ा डंपिंग ग्राउंड पर न जाए। 29 हजार घरों में कंपोस्ट तैयार किया जाता है।
दिल्ली एमसीडी: एमसीडी में 100% कचरा अलग-अलग कर देना दूर की बात है। साउथ एमसीडी के वेस्ट जोन स्थित विकासपुरी की 18 सोसायटियों का 100% कूड़ा अलग-अलग किया जा रहा है। दिल्ली एमसीडी: साउथ एमसीडी ने पंजाबी बाग इलाके में खाद बनाने के लिए पॉन्ड बनाया है। कुछ सामाजिक संस्थाएं खाद बना रही हैं। नॉर्थ एमसीडी का रमेश नगर और पश्चिम विहार इलाका है।

डंपिंग ग्राउंड की हालत

इंदौर: इंदौर में 2 साल पहले डंपिंग ग्राउंड के सामने निकलना कठिन था। ग्राउंड के 12 लाख टन कचरे को खत्म कराकर 50 हजार से ज्यादा पौधे लगाए। दिल्ली एमसीडी: 3 डंपिंग ग्राउंड गाजीपुर, भलस्वा और ओखला में है। कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की जिंदगी नर्क बनी हुई है। ओखला साइट की ऊं थोड़ी कम की गई है।

आयोजनों का कचरा 

इंदौर: इंदौर में प्रकाश पर्व पर होने वाला कीर्तन हो या मोहर्रम। इनमें सड़क या आयोजन स्थल के आसपास कचरा नहीं मिलेगा। भंडारे के दौरान लोग खुद सफाई का ख्याल रखते हैं। दिल्ली एमसीडी: सामाजिक आयोजनों में निकलने वाला कचरा कई दिन तक नहीं उठाया जाता। नवरात्र में निकली पूजा सामग्री को लोगों ने यमुना किनारे सड़क पर फेंक दिया था।

^मैं खुद और तमाम पार्षद स्वच्छता अभियान में भागीदार होकर लोगों को साफ-सफाई के लिए प्रेरित कर रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर प्रयास हो रहे हैं। लोगों से अपील है कि वह भी सहयोग करें।’ -आदेश गुप्ता, मेयर, नॉर्थ दिल्ली

^कूड़े को लैंडफिल साइट पर पहुंचने से रोकने के प्रयास शुरू किए गए हैं। कुछ कॉलोनियों में 100% कूड़ा अलग-अलग होने लगा है। उम्मीद है इस साल  रैंकिंग में सुधार होगा।’ -नरेंद्र चावला, मेयर, साउथ दिल्ली

^साल 2018 में सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने को कई प्रयास किए थे। इससे रैंकिंग में इस साल सुधार हुआ है। यह प्रयास इस साल और बढ़ाएंगे, ताकि रैंकिंग और अच्छी हो पाए।’ -विपिन बिहारी सिंह, मेयर, ईस्ट दिल्ली

WhatsApp chat