स्कुल के होते हुए भी बच्चे , शिक्षा के लिए वनचीत ..

प्रतापपुर- मामला यह ग्राम पहिया से है यहां पर स्कुल का निर्माण किया गया है लेकिन यहां के पंडोपारा एवं कोडाकू पारा के बच्चों को शिक्षा दि जाती ही नहीं इस गांव में दो  माध्यमिक विद्यालय तो बनाया गया है पर एक हीं शाला में सारे शिक्षक रहते हैं पूर्व मध्यमिक शाला कोडाकू पारा के प्रधान पाठक है वे कभी इस स्कुल में नहीं आऐ लेकिन वे दुसरे स्कुल में ही रुक जाया करते हैं जिस स्कुल मे शिक्षको कि कोई कमी नहीं है
इस दौरान ग्राम पंचायत पहिया (कोडाकू पारा)में एक ही स्कुल खोला जाता है और दुसरा स्कुल को नहीं खोला जाता है जिसके कारण पास में स्कुल होते हुऐ ,बच्चों को चलते बहुत जाना पडता हैं ,सच बात तो यह है की यहां के लोग किसी भी बात पर आवाज़ नहीं उठाया करते।
यहां लगभग एक स्कुल में पांच – छः शिक्षक हैं लेकिन उस स्कुल को खोला तक नहीं जाता ,यहां पर 1-5वीं तक के बच्चों को और 6वीं के आगे तक कि स्कुल को बंद रखा जा रहा है, स्कुल निर्माण से कुछ दिनों तक चलता रहा फिर नये प्रधान पाठक आ जाने के कारण अभी भी बंद पडा़ है यहां लगभग सभी स्कुलों में अच्छी शिक्षा एवं शिक्षक ध्यान दिया जाता है

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