लोकेश जाटव इंदौर कलेक्टर बने

 

इंदौर . 2004 बैच के आईएएस और वर्तमान में अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के पद पर भोपाल में पदस्थ लोकेश जाटव इंदौर के नए कलेक्टर होंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने गुरुवार शाम को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए।
जाटव की नौकरी मात्र 14 साल की हुई है, लेकिन इस दौरान वह डिंडोरी (मात्र सात दिन), राजगढ़, नीमच, मंडला और रायसेन में कलेक्टरी कर चुके हैं, इंदौर उनका छठा जिला होगा।

सूत्रों के अनुसार उनका नाम 24 दिसंबर को तय हो गया था, पर बात आई कि वह अभी चुनाव आयोग के अधीन काम कर रहे हैं, इसलिए लिखित मंजूरी लेना होगी। 26 को आयोग से पत्राचार किया गया और मंजूरी आते ही आदेश जारी
कर दिए।

जाटव ने भास्कर से चर्चा में कहा कि वह जल्द ही इंदौर आकर पद संभालेंगे। इसके पहले 25 दिसंबर की आधी रात को जारी हुई ट्रांसफर सूची में पहले इंदौर कलेक्टर का नाम नहीं था, क्योंकि आयोग की मंजूरी के साथ आदेश जारी करनी की योजना थी, लेकिन बाद में तय हुआ कि अभी इंदौर कलेक्टर पद से निशांत वरवड़े को हटाकर भोपाल ले आते हैं और आयोग की मंजूरी आते ही जाटव का सिंगल ऑर्डर जारी कर देंगे और गुरुवार को यही किया गया।

राजनीति नहीं, मेरिट के आधार पर चुने गए : जाटव को जेंटलमैन और होशियार अधिकारी के रूप में जाना जाता है। सरकारी कामकाज में तकनीक का उपयोग करने में वह माहिर हैं। उन्हें ई गवर्नेंस अवॉर्ड भी मिल चुका है। उन्होंने कृषि क्षेत्र के साथ स्कूली शिक्षा में काफी काम किए हैं। उनकी नियुक्ति को राजनीति से परे जाकर मेरिट के आधार पर चुना जाना बताया जा रहा है। मंडला में ज्ञानापर्जन कार्यक्रम के तहत उन्होंने 10वीं व 12वीं कक्षा के बच्चों के लिए विशेष सॉफ्टवेयर बनवाया, जिसके बाद जिले से 17 बच्चे आईआईटी में चयनित हुए थे।

अब तक ग्रामीण परिवेश वाले जिले संभाले : जाटव हमेशा ग्रामीण परिवेश वाले जिले में कलेक्टर रहे। वह इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर निगम में भी पद पर नहीं रहे। ऐसे में इंदौर में मेट्रो प्रोजेक्ट, स्मार्ट सिटी के साथ काम करने के साथ ही यहां चल रहे अन्य बड़े प्रोजेक्ट को संभालना और काम को आगे बढ़ाना उनके लिए बड़ी चुनौती रहेगी।

 

 

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