राम को मिला वनगमन का आदेश, दर्शकों की आंखों में झलक आये आंसू

नरसिहपुर। इन दिनों  डोभी में मैहर धाम से आई श्रीरामलीला लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है सातवें  दिन कैकेयी संवाद व राम वनवास का मंचन हुआ कलाकारों द्वारा कैकेयी संवाद व श्रीराम वनवास की लीला का मंचन किया गया। कडकडाती ठंड में रामलीला देखने आए लोगों की आंख में उस समय आंसू छलक उठे जब माता कैकेयी ने भरत को राज गद्दी व श्रीराम को 14 वर्ष का वनवास भेजने का वचन श्री दशरथ जी से मांगा। करीब 20 मिनट तक चले इस संवाद में कलाकारों ने सजीव प्रस्तुति देते हुए रामलीला देखने आए सैकड़ों दर्शकों को मंच से जोड़े रखा। जब माता कैकेयी ने राजा दशरथ से कहा कि आपने मुझे तीन वचन दिए थे। आज मै उन्हें आपसे मांग रही हूं। क्या आप उन्हें पूरा कर पाएंगे। तो इस पर दशरथ जी ने कहा का रघुकुल रीति सदा चली आई प्राण जाएं पर वचन न जाई। मांगो रानी आपके दिए तीनों वचन मै पूरे करूंगा। इस पर माता कैकेयी ने भरत को राज गद्दी और श्रीराम को 14 साल का वनवास मांगा।
राजा दशरथ ने जैसे ही राम को 14 साल का वनवास की बात सुनी तो उन्हें अपने कानों पर विश्वास नहीं हुआ। उन्होंने माता कैकेयी से कहा क्या कहा राम को 14 वर्ष का वनवास। माता कैकेयी बोली मैने तो पहले ही कहा था कि आप वचन पूरे नहीं कर पाएंगे। इस पर राजा दशरथ बहुत दुखी हुए। इसके बाद श्रीराम, लक्ष्मण व माता सीता के वनवास जाने की लीला का मंचन हुआ। रात 10बजे तक चले मंचन में सैकड़ों लोग शुरू से आखिरी तक बैठे रहे। रामलीला के मंहत पंडित रामनाथ शास्त्री ने कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीराम ने पूरी मानव जाति को माता-पिता की सेवा करना व उनके हर आदेश का पालन करने की शिक्षा दी है।  संवाददाता आकाश कौरव

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