कलेक्टर के आदेश का नही कोई असर, अस्पताल में इलाज की सुविधाएं फिर भी मरीजों को किया जा रहा रैफर

छतरपुर//
कलेक्टर के आदेश का नही कोई असर, अस्पताल में इलाज की सुविधाएं फिर भी मरीजों को किया जा रहा रैफर, 250 बिस्तर वाले जिला अस्पताल से एक माह में 300 से अधिक मरीज हो रहे रैफर
छतरपुर जिला अस्पताल के ड्यूटी डॉक्टर मरीजाें काे अधिक संख्या में मेडीकल कॉलेज ग्वालियर-झांसी-जबलपुर रैफर कर रहे हैं। रैफरल केसाें की बढ़ती संख्या से मरीजाें काे परेशानी हाेती है। अस्पताल गंभीर बीमारियाें के इलाज की सुविधाएं हैं फिर भी मरीजों को रैफर किया जा रहा है।
अस्पताल से मिले आंकड़ों के मुताबिक हर माह 300 से अधिक मरीजाें काे गंभीर हालत के नाम पर यहां से रैफर किया जा रहा है। इसपर छतरपुर कलेक्टर ने पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग को आदेश जारी करते हुए रैफर मरीजों की संख्या कम करने काे कहा। इसके बाद भी यहां के डॉक्टर नहीं माने और लगातार यहां के मरीजों को रैफर कर रहे हैं। जिला मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल 250 बिस्तरों का है। पर यहां के मेल वार्ड, ट्रॉमा वार्ड, बच्चा वार्ड, महिला वार्ड सहित वर्न वार्ड से प्रत्येक महीने में 300 से अधिक मरीजों को गंभीर हालत बताते हुए मेडीकल कॉलेज के लिए रैफर किया जाता है। यहां से रैफर होने वाले मरीजों के पर्चे पर रैफर करने वाला डॉक्टर एक कोड लिखता है, जिससे उस मरीज का कमीशन उसे मिल जाता है।
15 दिन में 172 मरीज किए रैफर
कलेक्टर के आदेश के बाद 1 फरवरी से 15 तक जिला अस्पताल के मेल वार्ड से 58 मरीज, ट्रॉमा व महिला मेडीकल वार्ड से 64 मरीज, इसके साथ ही महिला वार्ड, बच्चा वार्ड, वर्न वार्ड व एसएनसीयू को मिलाकर करीब 55 मरीजों को अन्य अस्पतालों में रैफर किया गया है। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अस्पताल के डॉक्टरों को कलेक्टर के आदेश की कितनी अहमियत है। जिला अस्पताल में कुछ नामचीन डॉक्टरों के निजी कर्मचारी हमेशा यहां के वार्डों में घूमते रहते हैं। यदि मरीज के परिजनों की इन लोगों से बात होने के बाद सेटिंग हो जाती है तो वह डॉक्टर मरीज को रैफर करने के स्थान पर निजी अस्पताल में ले जाते हैं और वहां पर ऑपरेशन करने के बाद फिर से जिला अस्पताल में भर्ती कर देते हैं। यदि वार्ड प्रभारी इस बात का विरोध करती हैं तो डॉक्टर उसे कार्रवाई करने की धमकी देते हैं।
रिपोर्टर-देवेंद्र यादव

WhatsApp chat