चमचा पुराण का वाचन

नरसिंहपुर जिले में विधानसभा/लोकसभा के चुनाव के बाद,राजनैतिक वातावरण में चमचागिरी प्रभाव अपने चरम पर पहुंच जाने के कारण अब कुछ इसमें लग गये हैं दूसरों की भांति हम भी राजनैतिक क्षेत्र में सफल होने के लिये उसके स्वाभाविक नियमों/आचरणों को अंगीकार अपना राजनैतिक कैरियर को उज्ज्वल बनायें। इस संबंध में लच्छू ने लोगों को चमचा पुराण वाचन करने की सलाह दी है उसने लोगों को बताया कि हर महीने अपनी सुविधा/हितों के हिसाब से किसी नेता की प्रशंसा सामूहिक रूप से घर/सार्वजनिक स्थानों पर जरूर करें। बकायदा इसकी वीडियोग्राफी करके सोशल मीडिया में अपलेाड करें। नेताओं के खासमखास लोगों को इसमें शामिल करें। ताकि चमचा पुराण का वाचन किया गया है इसकी पुष्ठि नेता को सरलता ओर सहजता से हो सके। अब राजनीति में आने के लिए विचाराधारा की आवश्यकता नहीं है इसके लिये जरूरी ओर अनिवार्य तथ्य यह है कि चमचागिरी आती है कि नहीं,जिन लोगों ने नेताओं की चमचागिरी नहीं की है उन कार्यकत्र्ताओं का राजनीति में क्या हाल हुआ है यह सब जानते हैं चमचागिरी का आउटपुट जानने के लिये भीतरघाती/अविश्वासी /दलबदलु/ फूलछाप कांग्रेसी/पंजाछाप भाजपायी बीच के,नेताओं की चौखट को देखकर आ सकते हैं जिन्होंने चमचापुरण की सहायता से आज तक अपने राजनैतिक सफर को आबाद कर रखा है ओर प्रभाव ऐसा बनाया कि अब लोग इन्हें ही राजनीति में आइडियल मान रहे हैं। चमचागिरी अब कोई गाली नहीं है ये तो राजनीति में सफलता का महामंत्र है इसके जितने भी अध्याय का लोग तेजी से अनुसरण करते हैं वे राजनीति में तरक्की के उतने सौपान तय करते। इसमें शरम ओर बेशरम का कोई झंझट ही नहीं है। जिन लोगों ने चमचापुराण को समझा ओर इसका वाचन/अनुसरण किया है उन लोगों के जिले में जलवे है चमचापुराण में एहसानफरामोश/कृघ्नता जैसे शब्द/भाव इसके शब्द कोश में नहीं है इस मलाल का शक्ति से निषेध है यही सही कसर चमचागिरी के पालन में निकल आती/जाती है

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