गेंहू खरीदी में कमाल का झोल

नरसिंहपुर जिले में सहकारी समितियों द्वारा गेंहू खरीदी का कार्य चल रहा है पर चींन्ह-चींन्ह कर समिति प्रबंधक अपने हितों के हिसाब से उपार्जन कर रहे। जिन किसानों ने लालफीताशाही के खिलाफ आवाज उठायी तो उसका गेंहू तो तौलना ही नहीं है हर क्विंटल पर समिति अवैधानिक तरीके से गेंहू ज्यादा तौल कर किसानों को तुर्रा दिखा रही वही ग्रडिंग का हवाला देकर किसानों का शोषण सरेआम कर रही है पर इतना सब कुछ सरेआम होने पर भी किसानों को न्याय नहीं मिल रहा। इस पर भुगतान का तो भगवान ही मालिक हैं बीत वर्ष नरङ्क्षसहपुर की विपणन समिति ने किसानों का साढे चार करोड़ का भुगतान अबतक नहीं किया है ऐसे में इन समितियों की खरीदी ओर भुगतान पर प्रश्न चिंह है समिति द्वारा खरीदा गया गेंहू खुले आसमान में रखा है वहीं परिवहन का गोरखधंधा सब जानते हैं गाडरवारा में की गई खरीदी का परिवहन नरसिंहपुर में नरसिंहपुर से खरीदा गया माल का परिवहन गाडरवारा में किया जाता है इस पर आज तक अंकुश नहीं लग सका है। परिवहन की दूरी के हिसाब से समिति माल का संग्रहण कराती है जबकि पास के गोदाम में परिवहन करने से माल संग्रहण में सुविधा/सुरक्षा होगी। पर ऐसा नहीं कमीशन के चक्कर में शासन को लाखों का चूना लगाया जा रहा है। सरकारें किसानों को सुविधा दे रही?  या शासकीय अधिकारियों/कर्मचारियों के हाथों किसानों का शोषण करने का लायसेंस दे रखा है ये कारनामें वर्षो से चले आ रहे है पर इसका निदान नहीं हो सका।

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