मुरादाबाद में 26 को जश्ने-हिन्दुस्तान प्रोग्राम में गरजेंगे इमरान प्रतापगढ़ी

 

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी
राज्य मुख्यालय लखनऊ। वा-री क़िस्मत एक वो टाइम था कि हम देश को आजादी दिलाने के लिए लडाई लड़ रहे थे और जो आईडियोलोजी उस हत्यारी सरकार के लिए मुखबिरी कर आजादी के मतवालों के खिलाफ शपथ पत्र देकर उनको सज़ा दिलाने का काम कर रही थी आज वह हमको देशभक्ति का पाठ पढ़ा रहे है उस समय भी इंक़लाबी शायर अपनी देशभक्ति के चलते अंग्रेज़ों को चुनौती दे रहे थे और ज़ालिम अंग्रेज़ों की सरकार उनकी आवाज को दबाने के लिए उन्हें जेलों में भर रही थी लेकिन शायरों ने अपनी इंक़लाबी शायरी का साथ नही छोड़ा और देश को आजादी दिलाने में अपना योगदान दिया जिसे भूलाया नही जा सकता है। शायरी एक ऐसा ख़ज़ाना है जिसके ज़रिये से दूसरों के हक़ों की लडाई, देश के लिए आजादी की लडाई, लोकतंत्र बचाने की लडाई अपनी खुद की लडाई अगर किसी को इस पर उरूब हासिल हो तो वह बड़े ही सलीक़े से अपनी बात वहाँ तक पहुँचा देता है लेकिन उसमें वो दर्द मौजूद होना चाहिए तब ही सही रहता है यह तो अपनी जगह है।मुरादाबाद की दीवारों पर और आसपास के इलाक़ों की दीवारों पर एक पोस्टर चस्पाँ हो रहे है जिसपर जश्ने-हिन्दुस्तान बड़ा-बड़ा लिखा दिखाई देता है और एक तस्वीर छपी है इंक़लाबी शायर युवाओं के दिलो पर राज करने वाले इमरान प्रतापगढी की और लिखा है 26 जनवरी 2019 को शाम सात बजे बाड़ा शाह सफ़ा मैदान मुरादाबाद में जश्ने-हिन्दुस्तान में लोकतन्त्र की हिमायत में एक शाम सजेगी जिसमें इंक़लाबी शायर इमरान प्रतापगढ़ी को बुलाया जा रहा है क्योंकि इमरान की शायरी से नौजवान तबक़ा झूमने लगता है इमरान का जादू नौजवानों के सर चढ़कर बोलता है यह सच है यही वजह है कि इमरान प्रतापगढी ने बहुत ही कम टाइम में जनता के दिलों पर राज करना शुरू कर दिया है इस जश्ने-आजादी के प्रोग्राम के आयोजक नदीम अंसारी व अहमद भाई को बताया जा रहा है ख़ैर प्रोग्राम कैसा होगा इसपर प्रश्न चिन्ह लगाना तो बेकार की बात होगी क्योंकि जिस प्रोग्राम में इंक़लाबी शायर के आने की बात कही जा रही हो तो यह अपने आप में इसकी ज़मानत है कि प्रोग्राम सफल होगा क्योंकि उसमें इंक़लाबी शायर इमरान प्रतापगढी आ रहे है इस बात से तो आयोजन समिति बेफ़िक्र है सवाल यह उठता है क्या है 26 जनवरी और हम क्यों मनाते है यह हमें गणतंत्र दिवस की याद दिलाता है आज के दिन हमें हमारा कानून मिला था जिसे डाक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा बनाया गया था उसी संविधान को बचाने के लिए हम 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव में जा रहे है विपक्ष का आरोप है कि मौजूदा नरेन्द्र मोदी सरकार देश के लोकतंत्र को खतम करने पर तुली है न्याय प्रणाली भी सड़क पर आती है तो सीबीआई जैसी संस्था अपना अस्तित्व बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाती है संसद में सरकार का मुखिया राफ़ेल पर हो रही बहस से भागता है यह सवाल मेरे ज़हन में पहले से ही थे इसके बाद मेने यह पोस्टर देखा तो मेरे अंदर के क़लम ने हिचकोले लेने शुरू कर दिए कि इस पोस्टर पर जो लिखा है अगर यह सही है तो आयोजन समिति और इंक़लाबी शायर इमरान प्रतापगढी को मुबारकबाद देनी चाहिए जिसका उन्वान जश्ने-हिन्दुस्तान और लोकतंत्र की हिमायत में शायरी के लिए प्रोग्राम रखने की सोच से हमें मालूम होना चाहिए कि यह देश संविधान से चलता है न कि किसी नागपुरिया आईडियोलोजी से।जो कहती तो यह है कि हमारा सरकार से कोई लेना देना नही है परन्तु काम वही करती है ऐसे संगठनों को बेनक़ाब करने के लिए इस तरह के आयोजन होते रहने चाहिए ताकि जनता को हक़ीक़त से रू-ब-रू कराया जा सके और इस तरह की शायरी या अन्य कोई भी सच्चाई पर चलने वाले मार्ग पर चलना आसान नही होता उसके लिए इमरान प्रतापगढी जैसे होना ज़रूरी है।इमारान प्रतापगढी मुरादाबाद में 26 जनवरी को गरजेंगे जश्ने-हिन्दुस्तान के प्रोग्राम में।लोगों कि नज़रें इस प्रोग्राम पर लगी है कि इंक़लाबी शायर क्या कहते है संविधान को कैसे बचाया जा सकता है और हम देश के लिए क्या कर सकते है।

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