नरेन्द्र मोदी को घेरने के लिए वाराणसी से चुनाव लड़ेगी प्रियंका गांधी ?

लखनऊ से तौसीफ़ क़ुरैशी
राज्य मुख्यालय लखनऊ।सियासत में शह और मात का खेल चलता ही रहता है कुछ इसी तरह का खेल मोदी की भाजपा और कांग्रेस के बीच चल रहा है वाराणसी लोकसभा सीट को लेकर क्योंकि यहाँ से नरेन्द्र मोदी खुद चुनाव लड़ेंगे पिछली बार भी यही से चुनाव लड़े थे वही कांग्रेस के रणनीतिकार भी वाराणसी से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर प्रियंका गांधी को चुनाव लड़ाने पर विचार कर रही है या यूँ कहे कि फ़ैसला कर लिया है लड़ाना है या नही कांग्रेस के इस सस्पेंस से मोदी की भाजपा की सांसे फुली हुई है अब यह तो वाराणसी से कांग्रेस का प्रत्याशी का नाम घोषित होने के बाद ही तय होगा कि कांग्रेस किसका नाम फ़ाइनल करती है अगर कांग्रेस ने क़यासों के मुताबिक प्रियंका गांधी का नाम फ़ाइनल किया तो ये नाम मोदी सहित पूरी बड़बोला टीम के लिए परेशानी पैदा करने वाली होगा। यूपी की सियासी फ़िज़ा बसपा-सपा और रालोद के गठबंधन ने अपने इर्द-गिर्द घूमा रखी है इसमें तो किसी को कोई शक नही है लेकिन अगर प्रियंका गांधी ने अपनी चुनावी पारी वाराणसी से शुरू करने की ठान ली तो यूपी ही नही पूरे देश की निगाह वाराणसी के चुनावी परिणाम पर टिक जाएगी इससे इंकार नही किया जा सकता है।सियासी फ़िज़ाओं में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी के सामने कांग्रेस आयर्न लेडी स्वं इंदिरा गांधी की छवि के रूप में देखी जाने वाली कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी को चुनाव लड़ा सकती है ऐसी अटकलें लगाई जा रही है वैसे कुछ का ये भी कहना है कि कांग्रेस ऐसा नही करेगी उनका तर्क है कि प्रियंका गांधी के वाराणसी से चुनाव लड़ने पर राहुल गांधी तैयार नही है इस पर राहुल गांधी की सोच है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू , लाल बहादुर शास्त्री , और इंदिरा गांधी की सोच ये थी कि बड़े नेताओं को ज़बरन हराने की कोशिश नही होनी चाहिए बल्कि ऐसी कोशिश हो कि वो जीतकर संसद पहुँचे इससे लोकतंत्र मजबूत होता है अगर सही में राहुल गांधी ने यही तर्क दिया है तो ये नरेन्द्र मोदी सहित उन तमाम नेताओं को आइना दिखाना है जो ये कहते है हमें कांग्रेस मुक्त भारत बनाना है गांधी परिवार मुक्त भारत चाहिए उन्हें तो सही मायने में सियासत को खुद ही अलविदा कह देना चाहिए लेकिन उनको पास शर्म नाम की चीज़ नही है सही मायने में इन्हीं गलत लोगों की वजह से आज देश में सियासत दूषित हो गई है इसी दूषित संकीर्ण मानसिकता वाली सियासत के खिलाफ राहुल गांधी सहित पूरा विपक्ष लडाई लड़ रहा है वैसे संघ मानसिकता के मानने वाले भी यही चाहते है कि प्रियंका गांधी को वाराणसी से चुनाव न लड़ाया जाए।पूर्व प्रधानमंत्री स्वं राजीव गांधी ने इलाहाबाद से हेमवती नंदन बहुगुणा के सामने फ़िल्मी स्टार अमिताभ बच्चन को चुनाव लड़ाया था और अमिताभ ने हेमवती को हरा भी दिया था यहाँ भी मुमकिन है कि प्रियंका गांधी वाराणसी से नरेन्द्र मोदी को हरा दे।सियासी पंडितों का कहना है कि राहुल गांधी सिद्धान्तिक नेता है वो कोई भी ऐसा काम नही करना चाहते है जिससे देश के लोकतंत्र के ढाँचे में कोई बुराई या कमी महसूस की जाए।अगर राहुल गांधी का यही रूख है तो फिर प्रियंका गांधी का वाराणसी से चुनाव लड़ने की संभावनाओं पर विराम लग सकता है हालाँकि खुद प्रियंका गांधी अभी भी मोदी को सियासी चुनौती देने के लिए बेक़रार दिखाई दे रही है अब फ़ैसला यूपीए चेयरमैन सोनिया गांधी को लेना है कि क्या प्रियंका गांधी मोदी के सामने चुनाव लड़ेगी या नही।संघी मीडिया का हरदम ये प्रयास चल रहा है कि प्रियंका गांधी वाराणसी से चुनाव न लड़े अब देखना ये है कि क्या संघ व गोदी मीडिया के द्वारा प्रायोजित ख़बरें सच होती है कि राहुल गांधी प्रियंका को चुनाव नही लड़ाएँगे या वो ख़बरें सच होती है कि प्रियंका वाराणसी से चुनाव लड़ मोदी को पसीने-पसीने करने के लिए तैयारी कर चुकी है।खबर ये भी है कि प्रियंका गांधी 29 अप्रैल को वाराणसी से अपना नामांकन करने जा रही है।वाराणसी लोकसभा सीट का जातिगत समीकरण पर नज़र दौड़ाई जाए तो बनिया मतदाता 3.25 लाख है, मुसलमान 3 लाख है,ब्राह्मण 2.50 लाख के क़रीब है, यादव की संख्या 1.50 लाख है, भूमिहार 1.25 लाख है, राजपूत 1 लाख है,पटेल 2 लाख है, चौरसिया 80 हज़ार है,दलित भी 80 हज़ार है, अन्य पिछड़ी जातियाँ 70 हज़ार है इन जातियों थोड़ा भी वोट मोदी से खिसक गया तो मोदी की जीत का रास्ता रूक सकता है ख़ासकर ब्राह्मण वोटो में सेंध लग गई तो मोदी को जीत के लाले पड़ जाएँगे।लोकसभा संग्राम 2019 के चुनाव में तीन चरण का चुनाव हो चुका लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी सरकार के सबसे बड़े दो फ़ैसलों पर वोट नही माँगा नोटबंदी और जीएसटी ये ऐसे मुद्दे रहे जिनको कहा जा सकता है कि नरेन्द्र मोदी सरकार के ये दोनों फ़ैसले बहुत बड़े थे लेकिन नरेन्द्र मोदी ने अपने इन दोनों फ़ैसलों पर जनता से कोई संवाद नही किया हालाँकि विपक्ष इन दोनों मुद्दों पर मोदी सरकार को घेरता रहा वैसे देखा जाए तो मोदी सरकार के ये दोनों फ़ैसले गलत और जनता को दुख देने वाले रहे नोटबंदी ने आम आदमी की कमर तोड़ दी और जीएसटी ने छोटों व्यापारी की जान निकाल दी नोटबंदी से जहाँ करोड़ों लोग बेरोज़गार हो गए वही जीएसटी ने व्यापारी को काम करना ही मुश्किल कर दिया।यही मुद्दे मोदी को सरकार से दूर करते नज़र आ रहे है हालाँकि गोदी मीडिया मोदी के विजय रथ को अभी भी रूका हुआ नही दिखा रहा है इस लिए मोदी की भाजपा चुनाव में बनी हुई दिख रही है जबकि सच्चाई कुछ और ही है यूपी में अब तक 26 सीटों पर वोटिंग हो चुकी है नरेन्द्र मोदी ने मात्र दो रैलियाँ ही की है एक मेरठ में तो दूसरी सहारनपुर में इसकी क्या वजह है कि यूपी में नरेन्द्र मोदी चुनावी रैलियाँ करने से बच रहे है और न ही मोदी की भाजपा के स्वयंभू चाणक्य अमित शाह भी ध्यान दे रहे है नही तो पिछले चुनाव में शाह ने यूपी को अपना बिस्तर बना लिया था क्या यूपी में होने वाली करारी हार को भाप गए है कि क्या फ़ायदा टाइम ख़र्च करने से क्योंकि जितना नुक़सान यूपी में हो रहा उसकी भरपाई पूरे देश से नही हो रही है।यही सब बातें अगर वाराणसी से प्रियंका गांधी चुनाव लड़ती है तो प्रियंका के लिए फ़ायदेवंद रह सकती है।

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