बंगाल की खाड़ी में उठ रहा चक्रवात ‘फ़ेथाई’, बन सकता है भीषण तूफान

 

 

बंगाल की खाड़ी में बना डिप्रेशन लगातार प्रभावी हो रहा है। शुक्रवार की शाम या रात में इसके चक्रवाती तूफान बनने की पूरी संभावना है। स्काइमेट के मौसम विशेषज्ञों के अनुसार यह उत्तर-उत्तर-पश्चिमी दिशा में आगे बढ़ रहा है। शुक्रवार की दोपहर के समय डिप्रेशन चेन्नई से लगभग 900 किलोमीटर पूर्व दक्षिण-पूर्व में था। जबकि आंध्र प्रदेश के मछिलीपट्टनम से इसकी दूरी 1100 किलोमीटर थी।

इसके आगे बढ़ने की रफ्तार कम हो रही है जिससे अगले 12 घंटों में ही यह चक्रवाती तूफान का रूप ले लेगा। मौसम विशेषज्ञों की मानें तो 16 दिसम्बर को इसके भीषण चक्रवात बनने के आसार हैं। इसकी बढ़ती क्षमता और रफ्तार को देखते हुए अनुमान है कि यह 16 या 17 दिसम्बर को आंध्र प्रदेश के तटों पर ओंगोल के पास से लैंडफॉल करेगा।

आंध्र प्रदेश के रास्ते भारत के मुख्य भू-भाग पर पहुँचने के बाद तूफान फ़ेथाई की दिशा बदलेगी और यह उत्तर-पश्चिम की बजाए मुड़कर उत्तर-पूर्वी दिशा में जाएगा। हालांकि इस दौरान वह कमजोर होता रहेगा लेकिन इसके प्रभाव से आंध्र प्रदेश के अलावा तेलंगाना, महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र और छत्तीसगढ़ में भी 18 और 19 दिसम्बर को अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

इसके प्रभाव से तमिलनाडु के उत्तरी तटीय भागों और दक्षिणी तटीय आंध्र प्रदेश में 15 दिसम्बर की रात से बादल बढ़ जाएंगे, हवाएँ भी तेज़ होंगी और हल्की बारिश शुरू हो जाएगी। लेकिन तेज़ बारिश 16 से 18 दिसम्बर के बीच देखने को मिलेगी। आंध्र प्रदेश में लैंडफॉल के समय तटीय भागों में 120 किलोमीटर प्रतिघण्टे की रफ्तार से हवाएँ चलने की संभावना है। चक्रवाती तूफान को फ़ेथाई नाम दिया जाएगा। यह इस सीज़न का 7 वां साइक्लोन होगा।

दक्षिण भारत के राज्यों में उत्तर-पूर्वी मॉनसून अब तक कमजोर रहा है। इसके चलते दक्षिणी प्रायद्वीपीय क्षेत्रों में बारिश काफी कम हुई है। लेकिन चक्रवाती तूफान फ़ेथाई के कारण इस कमी की कुछ भरपाई हो सकती है। दक्षिण-पश्चिम मॉनसून के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में बेहद कम बारिश हुई है।

आंकड़ों में देखें तो 1 अक्तूबर से 13 दिसम्बर के बीच आंध्र प्रदेश में सामान्य से 66 फीसदी कम और तेलंगाना में सामान्य से 82 प्रतिशत कम वर्षा हुई। इन दोनों राज्यों में बारिश में कमी की भरपाई चक्रवाती तूफान फ़ेथाई के चलते हो सकती है। यही दो राज्य ऐसे हैं जहां बारिश में कमी सबसे ज़्यादा है। दूसरी ओर तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में चक्रवात कुछ ज़्यादा नहीं देगा।

स्रोत-स्काइमेट

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