सीमा चौकसी के लिए बनेंगी 2,100 किमी. लंबी सड़कें, चीन के मुकाबले बढ़त हासिल करने में मिलेगी मदद

 

नई दिल्ली। भारत ने सीमा की निगरानी के मद्देनजर सुदूर क्षेत्रों में सड़कों के जाल बिछाने की योजना बनाई है। चीन और पाकिस्तान की सीमा पर चौकसी को मजबूत करने और रणनीतिक लिहाज से बढ़त हासिल करने के लिए सरकार 44 सड़कें बनाने की तैयारी में है। इन सड़कों की लंबाई 2,100 किलोमीटर के करीब होगी। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग के दस्तावेजों के मुताबिक सरकार रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्रों में 44 सड़कें बनाने जा रही है। इनका निर्माण चीन से सटे इलाकों और पाकिस्तान से सटे राजस्थान एवं पंजाब के क्षेत्र में होगा। इस महीने जारी हुई सीपीडब्ल्यूडी की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने भारत-चीन सीमा पर रणनीतिक लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण 44 सड़कों के निर्माण का आदेश दिया है। इन सड़कों के निर्माण का मकसद यह है कि किसी भी आपातस्थिति में सेना तत्काल सीमा तक पहुंच सके। ऐसे में इन सड़कों का निर्माण रणनीतिक लिहाज से चीन के मुकाबले बढ़त हासिल करने में महत्वपूर्ण साबित होगा।

चीन के साथ भारत की जम्मू-कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है। भारत सरकार ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है, जब चीन भी भारत से सटे अपने इलाकों में इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में जुटा है। ज्ञात हो कि 2017 में भारत और चीन की सेनाएं सिक्किम से सटे डोकलाम इलाके में दो महीने से ज्यादा समय तक आमने-सामने थीं। डोकलाम में चीन के सड़क निर्माण को लेकर ही यह गतिरोध पैदा हुआ था, यह इलाका भूटान का हिस्सा है, जबकि चीन भी इस पर अपना दावा जताता रहा है। 28 अगस्त को एक एग्रीमेंट के बाद चीन और भारत की सेनाओं के बीच यह गतिरोध समाप्त हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक इस परियोजना में 21,000 करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। चीन से सटे जिन इलाकों में सड़कों के निर्माण की योजना है, वे जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश में हैं। प्रोजेक्ट की डीपीआर के मुताबिक इस प्रोजेक्ट पर 21,040 करोड़ रुपये की लागत आएगी। डीपीआर को अभी पीएम मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी मिलना बाकी है।

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