Business Update: बिजनस यूनिट्स की टीसीएस फिर कर रही है रिस्ट्रक्चरिंग

बेंगलुरु। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने अपनी इंडस्ट्री सॉल्यूशंस यूनिट्स (आईएसयू) की रिस्ट्रक्चरिंग की है। इसके बाद इनका कंट्रोल कंपनी के 200 कर्मचारियों के हाथों में आ गया है और उनके तिमाही लक्ष्य तय किए गए हैं। इससे कंपनी के सीनियर अधिकारी को लॉग टर्म स्ट्रैटेजी पर काम करने की आजादी मिली है। टीसीएस ने अपने बिजनस को पहली बार साल 2008 में छोटी यूनिट्स में बांटा था, जिससे कंपनी को ग्रोथ बढ़ाने में मदद मिली। वित्तवर्ष 2009 में कंपनी की आमदनी 6 अरब डॉलर थी, जो 2018 तक 19 अरब डॉलर हो गई थी। 11 अक्टूबर 2018 को कंपनी के सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद टीसीएस के सीईओ राजेश गोपीनाथन ने बताया था कि कंपनी दो साल से दोहरे अंकों में ग्रोथ हासिल करने की योजना पर काम कर रह थी और मैनेजमेंट अब मीडियम और लॉग टर्म स्ट्रैटेजी बनाने पर ध्यान देगा। टीसीएस में दूसरे राउंड की रिस्ट्रक्चरिंग से कंपनी के सीनियर एग्जिक्युटिव्स (इसमें सीईओ से लेकर एग्जिक्युटिव वाइस प्रेजिडेंट तक शामिल हैं) को भविष्य की योजना पर काम करने की आजादी मिलेगी। गोपीनाथन ने बताया, हमने आईएसयू की अपनी पिछली रणनीति पर भरोसा किया है और हमने सब-आईएसयू बनाए हैं। हम एक लेवल और नीचे गए हैं। अब हमारे पास 150 सब-प्रॉफिट एंड लॉस हेड्स हैं। इन्हें उसी तरह से बनाया गया है, जैस आईएसयू को बनाया गया था। उन्होंने बताया कि इससे सीनियर लेवल टैलेंट मीडियम से लॉन्ग टर्म की योजना पर काम करने के लिए मुक्त हो गया है।

टीसीएस के सीईओ, प्रेसिडेंट और ईवीपी तीन और पांच साल के प्लान पर काम करेंगे। इसमें नए मार्केट्स में एंट्री करना और नए सर्विस एरिया पर फोकस करने जैसी बातें शामिल हो सकती हैं। आईटी कंसल्टेंसी एवरेस्ट रिसर्च के सीईओ पीटर बेंडर सैमुएल ने बताया, टीसीएस एंटरप्राइज आईटी फंक्शन से आगे बढ़ने की कोशिश कर रही है। वह सीएफओ, इंजीनियरिंग और मार्केटिंग जैसे अन्य स्टेकहोल्डर ग्रुप को सर्विस देने पर फोकस कर रही है। इस रणनीति के सफल होने में वक्त लगेगा, लेकिन इससे भविष्य में टिकाऊ ग्रोथ की जमीन भी तैयार होगी।’ पिछली रिस्ट्रक्चरिंग में टीसीएस ने 23 मिनी-सीईओ बनाए थे, जिनमें से प्रत्येक के पास 25 करोड़ डॉलर की यूनिट की जिम्मेदारी थी। उन लोगों को अपनी यूनिट की आमदनी चार गुना बढ़ाकर बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य दिया गया था। हालिया रिस्ट्रक्चरिंग में यूनिट का साइज अलग-अलग है। इसमें फाइनेंशियल सर्विसेज और रिटेल जैसे बड़े वर्टिकल को कई यूनिट्स में बांटा गया है। यह बंटवारा कस्टमर के आधार पर किया गया है। कुछ मामलों में यूनिट्स को क्षेत्र के आधार पर भी अलग किया गया है।

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