धान खरीदी केंद्रों में लापरवाही

नरसिंहपुर  । जिले का अन्नदाता लगातार कई वर्षो से अनेक परेशानियों से जूझ रहा है। जहां उसे उपज के कम दाम मिल रहे हैँ वहीं समर्थन मूल्य में अनाज बेंचने में कई समस्याओं का सामना करना पडता है और फिर महीनों उपज का भुगतान नही मिलता और वह बैंकों, सहकारी समिति और कृषि उपज मंडियों का चक्कर लगाता रहता है।
अब जिले में धान खरीदने के लिए बनाए गए केंद्र अव्यवस्था और लापरवाही का शिकार हो गए हैं।  खरीदी शुरू होने के २० दिन बाद भी केंद्रों पर  किसानों के लिए न सुविधाएं हैं न जरूरी  व्यवस्थाएं।  इतना ही नहीं कई समितियों ने अभी तक फसल की गुणवत्ता परीक्षण के लिए सर्वेयर तक नियुक्त नहीं किए गए जबकि अभी तक एक भी समिति ने नागरिक आपूर्ति निगम से अनुबंध नहीं किया है। कुछ समितियों ने तो धान खरीदी की शुरुआत तक नहीं की है। जानकारी के अनुसार जिले में सहकारी समितियों के माध्यम से धान की खरीदी की जा रही है । जिले में कुल 32 केंद्र बनाए गए हैं इनमें से अधिकांश में न तो किसानों के बैठने के लिए कोई व्यवस्था है न  पीने का पानी है और न  ही ग्रेडिंग के लिए छन्ना की व्यवस्था की गई गई है। कई केंद्रों पर  तौल कांटे, त्रिपाल किसानों के लिए सुविधाघर भी नहीं हंै । कई केंद्रों पर खरीदी के बैनर तक नहीं लगाए गए हैं जिससे किसानों को जानकारी नहीं मिल पाती।
कुछ केंद्रों में गुणवत्ता मापी यंत्र नहीं हैं बोरियों में स्टैंसिल लगाने की व्यवस्था नहीं है, धागे नहीं हंै और सिलाई मशीन की व्यवस्था नहीं है । बताया गया है कि जिले की कई समितियों ने अपने केंद्रों में किसान की फसल की गुणवत्ता के परीक्षण के लिए सर्वेयरों की नियुक्ति नहीं की है । नियमानुसार धान खरीदने वाली समिति को नागरिक आपूर्ति निगम से अनुबंध करना है लेकिन अभी तक एक भी समिति ने अनुबंध नहीं किया है।
कई समितियों ने शुरू नहीं की खरीदी
एक ओर जहां समितियों की लापरवाही और अव्यवस्थाओं की वजह से किसान अपनी फसल नहीं बेच पा रहे हैं तो दूसरी ओर कई समितियों द्वारा प्रशासन को यह जानकारी भेजी जा रही है कि किसान समय पर केंद्रों पर नहीं आ रहे हैं जबकि पिछले साल अभी तक डेढ़  लाख क्विंटल से अधिक धान की खरीदी हो चुकी थी।  गौरतलब है कि किसानों की धान खरीदने के लिए समितियों के कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया था । जिन समितियों द्वारा खरीदी की जा रही है उन समितियों द्वारा भी समय पर खरीदी की क्लोजर रिपोर्ट, रेडी टू ट्रांसपोर्ट आदि की जानकारी पोर्टल पर सही नहीं दी जा रही है।  किसानों को गलत जानकारी देकर गुमराह करने की बातें भी सामने आ रही हंै खरीदी गई उपज के विरुद्ध जहां समय पर समितियों द्वारा किसानों को भुगतान नहीं किया जा रहा है वहीं नागरिक आपूर्ति निगम द्वारा समय पर परिवहन नहीं करने से भी समस्या निर्मित हो रही है। खाता नंबर गलत लिखे जाने की वजह से कई किसानों के बिल जनरेट नहीं हो पा रहे हैं। सेवा सहकारी समिति ने अभी तक धान खरीदी शुरू नहीं की है जिससे उस क्षेत्र के किसान अपनी धान बेचने के लिए भटक रहे हैं।
फैक्ट फाइल
शासन द्वारा धान का समर्थन मूल्य 1750 रु. प्रति मि्ंटल ,कृषि विभाग द्वारा निर्धारित धान की उत्पादकता 38.5 क्विं. प्रति हेक्टेयर जिले में 32 उपार्जन केन्द्रों पर धान की खरीदी,धान की खरीदी 15 नवम्बर से 15 जनवरी तक  की जायेगी।
इनका कहना है,
इस संबंध में जिला प्रबंधक नान सोनू गर्ग का कहना है कि धान खरीदी करने वाली समितियों को एग्रीमेंट के फार्मेट दे दिए गए थे पर अभी तक हमारे कार्यालय में किसी भी समिति ने एग्रीमेंट की प्रक्रिया पूरी कर उसे जमा नहीं किया है।

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