2018,देश-दुनिया पर प्रभाव डालने वाली वो घटनाएं जो अलग मुकाम छोड़ गईं

साल 2018 अब चंद दिनों का मेहमान है। हम आपके लिए लाए हैं, इस साल हुईं वह घटनाएं जिन्होंने देश-दुनिया पर खासा प्रभाव डाला। भारत में इसरो की उपलब्धियों से लेकर डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात तक… पढ़िए साल 2018 की कुछ खास खबरें..

12 जनवरी, 2018 को नई दिल्ली में तुगलक रोड पर बंगला नंबर चार में सुप्रीम कोर्ट के चार जज जे. चेलेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी. लोकुर और कुरियन जोसफ जनता के बीच आए और मीडिया के सामने सात पेज का पत्र मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के नाम जारी किया। यह अभूतपूर्व घटना थी। सर्वोच्च न्यायालय के चार वरिष्ठ न्यायाधीश जनता के बीच खुद मीडिया से मिलने आए।

जजों ने यह प्रेस कांफ्रेंस खासतौर पर विशेष सीबीआई अदालत के जज बीएच लोया की मौत के मामले की सुनवाई में मुख्य न्यायाधीश के रोस्टर चयन पर सवाल खड़े करने के लिए की थी। साथ ही जजों ने यह चिंता भी जाहिर की, कि देश में अगर न्यायपालिका निष्पक्ष नहीं रहेगी तो लोकतंत्र जीवित नहीं रहेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जजों ने सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए।

जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा कि वे मजबूर होकर मीडिया के सामने आए हैं। हालांकि सर्वोच्च न्यायालय जैसी गरिमामयी संस्था का इस तरह के मसलों को जनता के बीच लाना हैरान करता है। यकीनन यह सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों का साहस कदम था।  जस्टिस चेलेश्वर ने इस मौके पर कहा था, ‘मजबूर होकर मीडिया के सामने आए हैं।’

पिछले वर्ष हॉलीवुड अभिनेत्री एलिसा मिलानो द्वारा कार्यस्थल पर महिलाओं के शोषण और दमन के खिलाफ जो आवाज उठाई उसका नाम मीटू कैंपेन दिया गया। भारत में मीटू की चर्चा अभिनेत्री तनुश्री दत्ता द्वारा अभिनेता नाना पाटेकर पर लगाए आरोपों से शुरू हुई। बॉलीवुड के बाद मीटू का असर राजनीति और खेल सहित समाज के तमाम हिस्सों तक पहुंचा। केंद्र सरकार में राज्यमंत्री रहे एमजे अकबर को पत्रकार प्रिया रमानी सहित कई महिलाओं द्वारा आरोप लगाने के बाद इस्तीफा देना पड़ा। भारत में इस अभियान की यह सबसे बड़ी कामयाबी मानी गई।

नर्मदा नदी के साधु बेट टापू पर बना देश के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल का स्मारक ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ देश के लिए गौरव की बात है। यह सरदार पटेल के अद्वितीय साहस का प्रतीक है, जिसकी बदौलत बिना खून-खराबे टुकड़ों में बंटा देश एकजुट हुआ।

2013 में इस प्रतिमा का निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ था। 182 मीटर ऊंची सरदार पटेल की यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है। आधार सहित इसकी कुल ऊंचाई 240 मीटर (790 फीट) है। यह प्रतिमा अमेरिका के स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ऊंची है।

स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के निर्माण में 2979 करोड़ रुपये खर्च हुए, जिसमें से अधिकांश पैसा गुजरात सरकार ने दिया है। इसे लार्सन एंड टर्बो व सरदार सरोवर नर्मदा निगम लिमिटेड ने मिलकर तैयार किया है। प्रतिमा के निर्माण में करीब 24000 टन स्टील का इस्तेमाल किया गया है। 18 हजार 500 टन स्टील नींव में और 6 हजार 500 टन स्टील मूर्ति के ढांचे में इस्तेमाल किया गया है।

जिज्ञासा और साहस का नतीजा है कि 13 अगस्त, 2018 को नासा द्वारा लांच किया गया अंतरिक्ष यान पार्कर सोलर प्रोब सात साल तक सूरज का चक्कर लगाते हुए उसका अध्ययन करेगा। यह यान सूर्य की बाह्य परत कोरोना के पास रहेगा। कोरोना का तापमान करीब 10 लाख डिग्री सेल्सियस होता है। नासा के इस अभियान का उद्देश्य कोरोना के पृथ्वी की सतह पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन करना है।

इस मिशन का नाम युजीन पार्कर के नाम पर रखा गया है। 60 वर्ष पहले पार्कर के इस शोध को ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में छापने से मना कर दिया गया। बाद में जर्नल के सीनियर एडिटर सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर के दखल पर यह शोध पत्र छपा। इस मिशन से संचार, मौसम व तमाम दूसरे शोधों में मदद मिलेगी।

2012 में भारतीय मूल की महिला सविता हलप्पनवार की मौत के बाद से लगातार यह विवाद का मामला बना रहा और इस वर्ष यह बड़े आंदोलन में बदल गया। इस विषय पर हुए जनमत संग्रह में 66 फीसदी लोगों ने 8वें संशोधन के तहत संविधान में शामिल किए गए गर्भपात निषेध कानून को निरस्त करने की राय जाहिर की।

6 दिसंबर, 2018 को आयरलैंड की संसद में गर्भपात की इजाजत देने वाले कानून को मंजूरी दी गई। नए कानून के अनुसार, गर्भपात स्वास्थ्य सेवाओं के एक हिस्से के तौर पर होगा। हालांकि नए कानून के तहत 12 हफ्ते तक ही गर्भपात की इजाजत दी गई है। सविता हलप्पनवार ने साहस के साथ इस कानून के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। मौत के बाद वह इस आंदोलन का चेहरा बनीं और आखिरकार कामयाबी मिली।

23 जून, 2018 को फंसी टीम को 10 जुलाई को सही सलामत वापस निकाल लिया गया। इस बचाव अभियान के लिए गुफा विशेषज्ञ वर्न अन्सवर्थ और इलॉन मस्क को काफी सराहा गया। हालांकि दोनों एक-दूसरे के काम को व्यर्थ बताते हैं।

थाईलैंड के चिआंग राइ में लुआंग नांग नॉन गुफा में फंसी जूनियर फुटबॉल टीम के 13 सदस्यों के बचाव अभियान में दुनिया भर के 10 हजार लोगों ने योगदान दिया। थाई नेवी सील्स ने बचाव अभियान की शुरुआत की, लेकिन बारिश के गंदे पानी की वजह से कामयाब नहीं हो सके, तो थाई सरकार ने ब्रिटिश केव रेस्क्यू काउंसिल से मदद ली। आखिर में बचाव अभियान सफल रहा।

उफनते समुद्र के बीच लहरों की जिद और भारतीय सेना की तीन महिला अधिकारियों के साहस, आत्मविश्वास, सूझबूझ और धैर्य के बीच चले 254 दिन के मुकाबले में तीन महासागर, चार महाद्वीप और पांच देशों की साहसिक यात्रा पूरी हुई। इस सफर में एक वक्त ऐसा भी आया जब तीनों अधिकारियों को पीने के पानी के लिए बूंद-बूंद को तरसना पड़ता था और समुद्र के बीच प्यास लगने पर बारिश का इंतजार करना पड़ता था। लेफ्टिनेंट कमांडर वर्तिका जोशी के नेतृत्व में इस दल में लेफ्टिनेंट कमांडर प्रतिभा जामवाल, पी स्वाति और लेफ्टिनेंट ए विजया देवी, बी ऐश्वर्य तथा पायल गुप्ता भी शामिल थीं।

कभी जापान के सिर के ऊपर से मिसाइल परीक्षण करना, तो कभी अमेरिका को परमाणु हमले की धमकी देना। उत्तर कोरिया लंबे समय से अमेरिका के खिलाफ आक्रोशित रहा है। लेकिन पिछले एक-दो वर्षों में हालात काफी ज्यादा तनावभरे हो गए थे। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन ने साहस दिखाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप और उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग-उन की मुलाकात को मुकम्मल बनाया।

50 मिनट की इस बैठक का नतीजा यह निकला कि अमेरिका ने उत्तर कोरिया को सुरक्षा गारंटी देने का वादा किया है। वहीं किम ने परमाणु निरस्त्रीकरण और मिसाइल लांचपैड नष्ट करने का वादा किया। इस मुलाकात से दुनिया में शांति और समृद्धि में योगदान मिलेगा।

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