इन तीन बड़े बैंकों का भी हो सकता है जल्द विलय, बनेगा दूसरा सबसे बड़ा बैंक

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एसबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा में अन्य बैंकों का विलय करने के बाद सरकार जल्द ही तीन और बैंकों का विलय करने जा रही है। इसका एलान केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के अमेरिका से लौटने के बाद किया जा सकता है। इन बैंकों का विलय होने के बाद यह देश का दूसरा सबसे बड़ा बैंक बन जाएगा।

इन तीन बैंकों का हो सकता है विलय

फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक केंद्र सरकार पंजाब नेशनल बैंक, ओरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और पंजाब एंड सिंध बैंक का विलय करने जा रही है। इस बारे में फैसला सरकार चुनावों से पहले या फिर उसके बाद भी ले सकती है।

जहां पीएनबी और पंजाब एंड सिंध बैंक का मुख्यालय दिल्ली में है, वहीं ओबीसी का गुरुग्राम में स्थित है। अगर सरकार इन बैंकों के विलय प्रस्ताव पर मुहर लगाती है तो फिर यह एसबीआई के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा सरकारी बैंक बन जाएगा और बैंक ऑफ बड़ौदा को भी मात कर देगा।

16.5 लाख करोड़ होगी जमा पूंजी

इन तीन बैंकों के विलय होने के बाद नये बैंक की कुल जमा पूंजी 16.5 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी। इसमें डिपॉजिट 9.6 लाख करोड़ रुपये और कर्ज 7 लाख करोड़ रुपये शामिल होगा।

8.22 फीसदी है पीएनबी का नेट एनपीए

पीएनबी का नेट एनपीए 8.22 फीसदी है, जबकि ओबीसी का एनपीए 7.15 फीसदी है। हाल ही में पीएनबी ने अपने तीसरे तिमाही के नतीजों का एलान किया था। बैंक का शुद्ध लाभ 7.12 फीसदी बढ़कर 246.51 करोड़ रुपये हो गया।

कुल आय में गिरावट

शेयर बाजार को दी जानकारी में बैंक ने बताया कि समीक्षाधीन अवधि में उसकी कुल आय 2.46 फीसदी घटकर 14,854.24 करोड़ रुपये रही जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 15,257.5 करोड़ रुपये रही थी।

नीरव, मेहुल ने किया था घोटाला

उल्लेखनीय है कि पीएनबी 14,356 करोड़ रुपये के नीरव मोदी, मेहुल चोकसी धोखाधड़ी मामले का शिकार हुआ है। बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुनील मेहता ने कहा कि कंपनी के वित्तीय आंकड़े फिर से सकारात्मक दिशा में दिखने लगे हैं।

बनेगा देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक

देना बैंक और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय होगा। इस विलय के बाद जो बैंक अस्तित्व में आएगा, वह एसबीआई और आईसीआईसीआई बैंक के बाद देश का तीसरा सबसे बड़ा बैंक होगा। देश में जो पांच बड़े बैंक हैं, उनमें एसबीआई, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, पंजाब नेशनल बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा शामिल हैं।

हालांकि इन बैंकों के ग्राहकों का पेपरवर्क काफी बढ़ जाएगा। देना और विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय नहीं होगा, ब्लकि तीनों बैंकों का विलय करके एक नया बैंक बनाया जाएगा।

फिर से खोलना पड़ सकता है खाता

इन तीन बैंकों के ग्राहकों को नए बैंक में अपना फिर से खाता खोलना होगा। इससे उनका पेपर वर्क काफी बढ़ जाएगा। ग्राहकों को खाता खोलने के लिए एक बार फिर से केवाईसी की प्रक्रिया को दोहराना होगा। केवाईसी हो जाने के बाद ग्राहकों को नई चेकबुक, एटीएम कार्ड और पासबुक मिलेगी।

जमा राशि रहेगी सुरक्षित

इन तीनों बैंकों के ग्राहकों की जमा राशि पूरी तरह से सुरक्षित रहेगी। हालांकि विलय होने के बाद जब नया बैंक आस्तित्व में आएगा, तो फिर ग्राहकों को कुछ समय के लिए खाते का परिचालन करना बंद करना पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सभी कुछ नए सिरे से होगा और बैंक उतने समय के लिए आपके खाते में से पैसा निकालने या फिर जमा कराने पर रोक लगा सकता है।

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