शिर्डी के साईं बाबा मंदिर का ट्रस्ट भी विवादों में

शिर्डी। शिर्डी के साईं बाबा मंदिर को लेकर भी अब विवाद सामने आने लगे हैं। 150 वर्ष पहले साईं बाबा ने “सबका मालिक एक” का संदेश दिया था। वर्तमान ट्रस्ट ने इस को बदल कर ओम श्री साईनाथय नमः कर दिया है। इसके साथ ही द्वारकामाई मस्जिद का नाम बदलकर 2017 में द्वारका माई मंदिर कर दिया है। 2018 में साईं मंदिर में जो स्तंभ तैयार किया है। उसमें सिर्फ ओम का चिन्ह बनाया गया है। इसको लेकर भी भक्तों के बीच में चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सरकार ने जो ट्रस्ट बनाया है। उसमें 17 सदस्य होने चाहिए थे। किंतु सरकार ने केवल 6 सदस्य मनोनीत किये हैं। यह सभी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए लोग हैं। भाजपा सरकार द्वारा नियुक्त ट्रस्टीयों ने साईं मंदिर का भगवाकरण शुरू कर दिया है। जिसके कारण अब यह मामला हाई कोर्ट तक पहुंच गया है। हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जांच करने के आदेश दिए हैं।

ट्रस्ट को लेकर विवाद
2004 में साईं बाबा मंदिर सरकारी नियंत्रण में आ गया था। महाराष्ट्र सरकार ने ट्रस्ट बोर्ड में नियुक्ति के और कामकाज को लेकर नियम बनाए थे। विधि और न्याय मंत्रालय के अधीन यह ट्रस्ट काम करता है। सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट के नियम में 17 ट्रस्टीयों की नियुक्तियों का प्रावधान है। महाराष्ट्र सरकार ने ट्रस्ट में केवल 6 लोगों की नियुक्ति की है। ट्रस्ट में भगवाकरण और नियुक्तियों को लेकर मुंबई हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। जिसमें मुंबई हाई कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को जांच करने के आदेश दिए थे। इस फैसले के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट गया। सुप्रीम कोर्ट ने, मुंबई हाई कोर्ट का फैसला यथावत रखा। महाराष्ट्र सरकार ने इस मामले की अब जांच कर रही है।

सबका मालिक एक
वर्तमान ट्रस्टीयों ने सबका मालिक एक को बदलकर, अब ओम श्री साईंनाथाय नमः कर दिया है। 2013 के बाद से जो भी प्रकाशन ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे हैं। उसमें अब ओम श्री साईंनाथाय नमः लिखा जा रहा है। श्रद्धालु इसका विरोध कर रहे हैं।

द्वारकामाई मस्जिद का नाम बदला
लगभग डेढ़ सौ वर्ष से साईं बाबा के निवास स्थल को द्वारकामाई मस्जिद के नाम से जाना जाता था। 2017 में इसका नाम बदलकर द्वारका माई मंदिर कर दिया गया है। इसके बोर्ड पर भी भगवा रंग से लिखा गया है। श्रद्धालुओं को भगवा रंग के स्थान पर, पहले जो बोर्ड काले रंग का होता था। वैसा ही लगाने की मांग की जा रही है।

साईं ध्वज स्तंभ
2018 में साईं बाबा समाधि के शताब्दी वर्ष में साईं मंदिर में ध्वज स्तंभ निर्मित किया गया है। इसमें केवल ओम का चिन्ह बनाया गया है। यहां के श्रद्धालुओं का कहना है, कि इसमें सभी धर्मों के चिन्ह होने चाहिए थे। क्योंकि साईं बाबा के भक्त, सभी धर्म के अनुयाई हैं। इसका भी विरोध शुरू हो गया है।
शिर्डी के साईं बाबा की कर्मभूमि और मंदिर मैं पिछले 4 वर्षों से बड़ी तेजी से वर्तमान ट्रस्टीयों द्वारा जो परिवर्तन किया जा रहा है। विशेष रूप से साईं बाबा समाधि के शताब्दी समारोह में जिस तरह से भगवाकरण किया गया है। उसको लेकर साईं बाबा के श्रद्धालु उद्वेलित हैं। साईं बाबा के भक्तों का कहना है, कि हिंदू मुस्लिम एकता और राम रहीम की संस्कृति के प्रतीक शिर्डी के साईं बाबा को, किसी एक धर्म विशेष से, या केवल हिंदू पद्धति से जोड़ना, साईं बाबा के भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ करने जैसा है। धीरे-धीरे यह मामला तूल पकड़ रहा है। महाराष्ट्र सरकार ने जो जांच कमेटी बनाई है। उसमें नियुक्तियों को लेकर जो जांच होना है, और ‎नियमों के अनुसार 11 ट्रस्टीयों की और नियुक्ति यदि जल्द नहीं होती है, तो यह मामला भी तूल पकड़ सकता है।

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