सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के सामने आतंकियों के हौसले पस्त, गुजरे 72 घंटों में 16 आतंकी मारे गए

श्रीनगर। कश्मीर घाटी में आतंकियों के लिए अब सुरक्षाबलों काल बन गए हैं। सुरक्षा बलों की मुस्तैदी के सामने आतंकियों के हौसले पस्त हो गए हैं। हर दूसरे दिन छुपकर वार करने वाले आतंकियों को सुरक्षा बलों के जवान अब घेरकर और चुन-चुनकर मौत के घाट उतार रहे हैं। इससे आतंकी बुरी तरह बौखलाए हुए हैं और स्थानीय लोगों पर हमले करने से भी बाज नहीं आ रहे। बीते 72 घंटों में ही सुरक्षा बलों ने अलग-अलग एनकाउंटर्स में कुल 16 आतंकियों को ढेर किया है। रविवार की सुबह सुरक्षाबलों ने आतंकियों को घेरकर ढेर किया। जब पहले कुलगाम और फिर शोपियां जिले में आतंकी ढेर किए गए। कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए। सेना के एक अधिकारी ने बताया कि चारों आतंकवादी दक्षिणी कश्मीर के कुलगाम जिले के हिपुरा बाटागुंड क्षेत्र में मुठभेड़ में मारे गए। उन्होंने बताया कि आतंकवादियों की पहचान और उनके संगठन के बारे में पता लगाया जा रहा है। एक खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षाबलों ने क्षेत्र में घेराबंदी करके तलाश अभियान शुरू किया था।

इसी समय शोपियां में जारी एनकाउंटर में भी सुरक्षा बलों को कामयाबी मिली। शोपियां जिले के कपरान बटागुंड क्षेत्र में सुरक्षा बलों को आतंकियों के छुपे होने की सूचना के बाद जवानों ने ऑपरेशन शुरू किया था। दोनों ओर से गोलीबारी के बाद शुरू हुई मुठभेड़ के बाद इलाके की घेराबंदी कर दी गई थी। कार्रवाई में सुरक्षा बलों ने छह आतंकियों को ढेर कर दिया है, वहीं एक जवान भी यहां शहीद हो गया। लगातार कार्रवाई में साथियों की मौत के बाद आतंकी बौखलाए हैं। इसी के चलते आतंकवादियों ने पिछले हफ्ते दक्षिण कश्मीर में भी सुरक्षा बलों का मुखबिर होने के शक में दो लोगों की हत्या कर दी थी। वहीं, राज्य के अनंतनाग में बीते शुक्रवार को सेना के ऑपरेशन ऑलआउट के तहत बिजबेहरा इलाके में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में छह आतंकी मारे गए थे। बिजबेहरा के सेकिपोरा इलाके में आतंकियों के छिपे होने के इनपुट्स मिलने के बाद सुरक्षाबलों के साथ यह मुठभेड़ शुरू हुई थी। मारे गए आतंकियों के लिंक लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल से जुड़े बताए जा रहे थे और इनमें से एक आतंकी आजाद मलिक पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या में वॉन्टेड था।

आतंकवादी ऐसी कार्रवाई के चलते खीझकर छुपकर गोलीबारी की घटनाओं को अंजाम देते हैं, लेकिन बदले में सेना की मुस्तैदी उनपर भारी पड़ रही है। घने जंगलों में और आसपास के इलाकों में आतंकवादियों की गतिविधियों का पता लगाने के लिए सेना, पुलिस और सीआरपीएफ ड्रोन, हेलीकॉप्टर और अन्य निगरानी गैजेट्स का इस्तेमाल कर रही है। साथ ही कहीं आतंकियों के छुपे होने के इनपुट्स मिलते ही इलाके की घेराबंदी पहला कदम होती है और आतंकी बचकर नहीं निकल पाते। सुरक्षा बलों का कहना है कि ठंड और धुंध बढ़ने से पहले कार्रवाई और तेज कर दी जाएगी, जिससे आतंकियों को संभलने का मौका न मिले।

(राष्ट्रीय संभव सन्देश के व्हाट्सएप ग्रुप में ऐड होने के लिए Click यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम, और यूट्यूब पर फ़ाॅलो भी कर सकते हैं.)

WhatsApp chat