समझदारी से करें म्यूचुअल फंड में निवेश, लंबी अवधि में बना सकते हैं अच्छा पैसा

 

पिछले कुछ वर्षों के दौरान बचत को वित्तीय योजनाओं में लगाना फाइनेंशियल प्लानर्स का मूल मंत्र रहा है। इसका मुख्य कारण लोगों की सोच में बदलाव आना है। इस अवधि के दौरान इक्विटी और डेट मार्केट के बेहतर प्रदर्शन ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई। साथ ही फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी का भी महत्वपूर्ण योगदान है। इन सब कारकों की वजह से बचत करने युवाओं की भागीदारी भी बड़ी तादाद में बढ़ी है। म्यूचुअल फंडों में पहली बार निवेश करने वालों में 25 से 35 साल के युवाओं की संख्या अधिक है। लेकिन शेयर बाजारों में तेजी लंबे समय तक बनी रहे यह जरूरी नहीं। इसमें बड़ी गिरावट आने का जोखिम भी रहता है।

जोखिम क्षमता और लक्ष्य को ध्यान में रखकर चुनें फंड

  1. शेयर बाजार से लंबी अवधि में पैसा कमाने के लिए काफी धैर्य की जरूरत होती है। शेयरों ने लंबे समय में अच्छा रिटर्न दिया है। बीएसई सेंसेक्स का आंकड़ा इसकी पुष्टि करता है। लेकिन बारीकी से गौर करें तो इस दौरान बाजार में उतार-चढ़ाव का दौर भी देखने को मिला है। ऐसे में अच्छा रिटर्न पाने लिए बाजार में किस समय निवेश किया जाए यह काफी महत्वपूर्ण हो जाता है। निवेश के दौरान अनुशासित बने रहने, विवेकपूर्ण बुद्धि के उपयोग की जरूरत होती है। शॉर्ट टर्म में आनेवाली नकारात्मक खबरों से दूरी बनाए रखने की भी जरूरत होती है।

  2. ऐसे निवेशक जिन्हें शेयर और डेट मार्केट की ज्यादा समझ नहीं है वे म्यूचुअल फंडों के जरिए निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड कंपनियां निवेशकों का पैसा पेशेवर विशेषज्ञों के जरिए शेयरों में निवेश करती हैं। म्यूचुअल फंड निवेश के लिए विभिन्न विकल्पों की पेशकश करते हैं। इनमें निवेशक अपनी जोखिम उठाने की क्षमता के मुताबिक फंड विकल्प चुन सकते हैं। मसलन हाइब्रिड फंड इक्विटी और डेट दोनों मार्केट में निवेश करते हैं।

  3. निश्चित दर से रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए डेट म्यूचुअल फंड पारंपरिक तौर पर ज्यादा लोकप्रिय नहीं रहे हैं। डेट फंड गवर्नमेंट सिक्युरिटीज, कॉरपोरेट बांड और मनी मार्केट सिक्युरिटीज में निवेश करते हैं। यदि लंबी अवधि में इनके प्रदर्शन को देखें तो बचत के पारंपरिक इन्स्ट्रूमेंट्स के मुकाबले इनका रिटर्न काफी प्रतिस्पर्धी रहा है। ये टैक्स के लिहाज से किफायती होते हैं। जिसका फायदा निवेशको को मिलता है।

  4. सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए म्यूचुअल फंडों में आने वाला निवेश बढ़ रहा है। उद्योग की शीर्ष संस्था एम्फी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक निवेशक हर महीने एसआईपी के जरिए 8,000 करोड़ रुपए से ज्यादा राशि म्यूचुअल फंडों में निवेश कर रहे हैं। यह आंकड़ा एक माह में 100 करोड़ डॉलर से भी अधिक है। एसआईपी के निवेश ने विदेशी निवेशकों द्वारा भारतीय बाजार से पैसे निकालने के विपरीत असर को एक हद तक कम कर दिया है जो एक अच्छा संकेत है।

  5. अब सवाल यह उठता है कि आपके लिए कौन-सा म्यूचुअल फंड अच्छा रहेगा। म्यूचुअल फंड निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता, निवेश के लक्ष्य के मुताबिक इक्विटी, डेट और हाइब्रिड फंडों के जरिए कई प्रोडक्ट्स की पेशकश करती हैं। पूंजी बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंडों की 36 कैटेगरी परिभाषित की है। एसेट क्लास, रिस्क प्रोफाइल और निवेश के लक्ष्य के आधार पर हर श्रेणी की फंड की पहचान की जा सकती है। इसके आधार पर आप निवेश के लिए उचित म्यूचुअल फंड का चयन कर सकते हैं।

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