News Update: एनटीपीसी ने कोयला परिवहन के लिए रेलवे से किया 10 हजार करोड़ का अनुबंध

नई दिल्ली। सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली कंपनी एनटीपीसी ने वित्त वर्ष 2020 के लिए खदानों से अपनी इकाइयों तक कोयले के परिवहन के लिए भारतीय रेलवे के साथ 10,000 करोड़ रुपए में करार किया गया है। इस माह की शुरुआत में हुए इस करार से कैश की कमी का सामना कर रही भारतीय रेलवे को काफी राहत मिलेगी, क्योंकि एनटीपीसी ने तीन किस्तों में पूरी रकम एडवांस में देने की पेशकश की है।
इसके बदले रेलवे ने एनटीपीसी के लिए इस वित्त वर्ष और अगले वित्त वर्ष के लिए एक तय कीमत और रेक का प्रेफरेशियंल अलाटमेंट ऑफर किया है। इसकी मदद से एनटीपीसी की कोल ट्रांसपोर्टेशन लागत में प्रभावी रूप से कमी आएगी। कंपनी के लिए प्लांट्स तक कोल के ट्रांसपोर्टेशन में लगने वाले समय में कमी आएगी और साथ ही रेल टैरिफ में किसी भी तरह के आगामी बदलाव का भी कंपनी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। एनटीपीसी देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी है।

रेलवे मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनटीपीसी वित्त वर्ष 2018-19 और वित्त वर्ष 2019-20 के लिए भारतीय रेलवे को कोल के ट्रांसपोर्टेशन के लिए जीएसटी सहित 10,000 करोड़ रुपए के अग्रिम फ्रेट का भुगतान करेगी। 2,000 करोड़ रुपए की पहली किस्त का भुगतान पहले ही चुका है और बाकी बची रकम का भी इसी वित्त वर्ष में दो किस्तों में भुगतान किया जाएगा। रेलवे अपने सभी बड़े ग्राहकों को इसी तरह का ऑफर देती है। अधिकारी ने बताया, ‘ये लॉन्ग टर्म के कॉन्ट्रैक्ट हमें अगले दो सालों के लिए कोर कमोडिटीज के ट्रैफिक का मिनिमम आउटलुक देंगे।

हम जरूरत के हिसाब से वेगन खरीद सकते हैं और अपने एसेट्स को ज्यादा प्रभावी तरीके से इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके बदले में बड़े ग्राहकों को वित्त वर्ष 2020 के लिए तय टैरिफ और वेगन मिलेगा। रेलवे फ्रेट ट्रांसपोर्टेशन के मार्केट शेयर को फिर से हासिल करना चाहती है, जो उसने रोड ट्रांसपोर्टेशन के हाथों खो दिया है। देश में किए जाने वाले कुल माल परिवहन का सिर्फ 33 फीसदी हिस्सा रेलवे के पास है, जो आजादी के बाद करीब 70 फीसदी था।

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