(नई दिल्ली) अगले साल ओपेक से बाहर हो जाएगा दुनिया में सबसे ज्यादा एलएनजी उत्पादक कतर

नई दिल्ली। दुनिया में सबसे ज्यादा एलएनजी का निर्यात करने वाला कतर अगले साल से तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक से बाहर हो जाएगा। कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा उनका देश अब गैस उत्पादन पर विशेष ध्यान देने जा रहा है। इसलिए उसने तेल उत्पादक देशों का संगठन छोड़ने का निर्णय लिया है।
उन्होंने कहा कि कतर ने जनवरी 2019 में ओपेक की सदस्यता वापस लेने का फैसला किया और ओपेक को इसकी जानकारी दे दी गई है। गौरतलब है कि कतर ने यह बड़ा फैसला आगामी 6 दिसंबर को होने वाली ओपेक देशों की बैठक से ठीक पहले लिया है। वह ओपेक के गठन के एक वर्ष बाद ही 1961 से इसका सदस्य बन गया था। वह ओपेक का पहला ऐसा सदस्य राष्ट्र बनने वाला है जिसने इस संगठन से बाहर निकलने का फैसला किया है।

बहरहाल, यह जानना जरूरी है कि सऊदी अरब, यूएई, बहरीन और मिस्र जैसे पड़ोसी देशों के साथ कतर के कूटनीतिक संबंध लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। दरअसल, इन देशों ने आतंकवाद का समर्थन करने के आरोप में कतर पर पिछले साल जून से ही व्यापारिक एवं आवाजाही जैसी गतिविधियों पर रोक लगा रखी है। हालांकि कतर का कहना है कि यह फैसला किसी तरह के राजनीतिक दबाव में नहीं लिया गया है। काबी ने कहा कतर आगे भी कच्चा तेल का उत्पादन जारी रखेगा, लेकिन वह गैस उत्पादन पर अधिक ध्यान देने वाला है। कतर विश्व में एलएनजी का सबसे बड़ा निर्यातक है। काबी ने कहा कच्चे तेल में हमारे लिए अधिक संभावनाएं नहीं हैं। हम वास्तविकता पर यकीन करते हैं। हमारी संभावनाएं गैस में हैं। काबी ने कहा ओपेक को घोषणा से पहले ही इस निर्णय के बारे में सूचित कर दिया गया है।

कतर के ऊर्जा मंत्री साद ने कहा हम इस संगठन में बहुत छोटे सदस्य हैं। हमें अपने विकास पर ध्यान देना है। यही वजह है कि हमने संगठन से अलग होने का निर्णय लिया है। हालांकि कतर बड़ा हिस्सेदार नहीं होते भी ओपेक के लिए महत्वपूर्ण है। कतर 6 लाख बैरल प्रति दिन (बीपीडी) का उत्पादन करता है। वहीं सऊदी अरब 1करोड़ 10 लाख बीपीडी का उत्पादन करता है और दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक और निर्यातक है। दोहा एलएनजी के मामले में अपना महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

अमेरिका और चीन के बीच 90 दिनों के लिए ट्रेड वॉर रोके जाने के समझौते के बाद तेल की कीमतों में 5 फीसदी का इजाफा हुआ था। हालांकि ब्रेंट क्रूड की कीमतें कम ही रहीं। ओपेक में कतर के प्रतिनिधि ने कहा यह फैसला राजनीति से प्रेरित नहीं है, बल्कि एक दीर्घावधि रणनीति के तहत लिया गया है। इससे 2024 तक एलएनजी के उत्पादन में बढ़ोतरी करने में मदद मिलेगी।

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