Order: माल्या की संपत्ति पर बैंकों का पहला हक, ईडी यथास्थिति बनाए रखे- ट्रिब्यूनल

भगोड़े शराब कारोबारी विजय माल्या की संपत्ति पर बैंकों का पहला हक है। प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट अपीलेट ट्रिब्यूनल ने बुधवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को इस संबंध में आदेश दिए। ट्रिब्यूनल ने ईडी से कहा कि वह माल्या की संपत्ति को लेकर अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखे।

ट्रिब्यूनल 26 नवंबर को आखिरी फैसला देगा
माल्या केस में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच कर रहे ईडी ने माल्या की 8,000 करोड़ रुपए (वैल्यू) की संपत्ति अटैच कर रखी है। बारह बैंकों ने इसके खिलाफ ट्रिब्यूनल में अपील की थी। अपीलेट ट्रिब्यूनल इस पर 26 नवंबर को आखिरी फैसला देगा।
ट्रिब्यूनल ने बुधवार को कहा कि धोखाधड़ी के शिकार 12 बैंक माल्या और उसकी कंपनियों के खिलाफ ऋण वूसली प्राधिकरण से पहले ही आदेश ले चुके हैं। साथ ही कहा कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट का मकसद यही है कि अपराधियों को सजा मिले, पीड़ितों को नहीं।
अपीलेट ट्रिब्यूनल का मानना है कि माल्या के खिलाफ ट्रायल पूरी होने में कई साल लग सकते हैं। लोन धोखाधड़ी के पीड़ित होने के नाते बैंकों को माल्या की संपत्तियां बेचकर कर्ज की वसूली करने का अधिकार है।
उधर ईडी ने कहा कि ट्रिब्यूनल के आदेश को कोई मतलब नहीं। माल्या की जो संपत्ति उसके कब्जे में है उसे ट्रायल पूरी होने तक नहीं बेचा जा सकता। इससे पहले भी ट्रिब्यूनल ने माल्या की अटैच संपत्ति का कुछ हिस्सा रिलीज करने का आदेश दिया था। हाईकोर्ट ने उस पर रोक लगा दी।

जिन 12 बैंकों ने ट्रिब्यूनल में अपील की उनके माल्या पर 6,203 करोड़ रुपए बकाया हैं। एसबीआई समेत 17 बैंकों के कंसोर्शियम ने माल्या को लोन दिया था। मार्च 2016 में माल्या लंदन भाग गया।
माल्या के भारत प्रत्यर्पण के लिए यूके की अदालत में मामला चल रहा है। 10 दिसंबर को इस पर फैसला आएगा। भारत में भगोड़ा आर्थिक अपराधी अदालत में माल्या के खिलाफ मामला चल रहा है।

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