किताबें पढ़ने का शौक, अपने बिजनेस की ख्वाहिश थी; सैकंड हैंड बुक्स की ऑनलाइन बिक्री शुरू की

 

  • ऋतिका श्रीवास्तव ने पुरानी किताबें बेचने के लिए 2017 में शुरू की थी वेबसाइट
  • ऋतिका दावा है कि उनके प्लेटफॉर्म बुक ठेला पर किताबें 20-30% तक सस्ती

नई दिल्ली. अगर आप किताब पढ़ने के शौकीन हैं और नियमित रूप से किताबें खरीदते हैं, तो सैकंड हैंड किताबें आपके लिए अच्छा विकल्प हो सकती हैं। किताबें ऑनलाइन और कम कीमत पर मिल जाएं तो क्या कहना। बुक ठेला ऐसा ही एक प्लेटफॉर्म है। 24 साल की ऋतिका श्रीवास्तव ने दो साल पहले इसकी शुरुआत की थी।

पिता से 2 लाख रुपए लेकर बिजनेस शुरू किया

  1. ऋतिका बताती हैं, ‘मुझे बचपन से किताबें पढ़ने का शौक था। मैं कॉलेज में बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद अपना कोई काम शुरू करना चाहती थी। तब पिताजी ने इन दोनों को मिलाकर किताबों का बिजनेस शुरू करने का आइडिया दिया। किताबें खरीदने के लिए दिल्ली के बाजारों में जाती थी तो देखती थी कि पुरानी किताबों की डिमांड तो बहुत है, लेकिन इसका बाजार बहुत असंगठित है। तब मैंने इस सेगमेंट में बिजनेस शुरू करने की सोची।’
  2. बिजनेस शुरू करने के लिए ऋतिका ने पिता से दो लाख रुपए लिए और किलो के भाव पर चुनिंदा किताबें खरीदने लगीं। पुरानी दिल्ली में सैकंड हैंड किताबें बेचने वालों से करीब 150 किलो किताबें खरीदीं। इसके बाद मार्च 2017 में बुक ठेला की शुरुआत की।
  3. ऋतिका ने बताया कि उनके प्लेटफॉर्म पर किताबों की 70-80% डिमांड बड़े शहरों से आती है। बिक्री में टियर-2 और टियर-3 शहरों का हिस्सा 20-30% है। इसलिए ऋतिका इस पर फोकस कर रही हैं। उन्होंने बताया कि उनका स्टार्टअप अभी फंडिंग के लिए कोशिश नहीं कर रहा है। फिलहाल कंपनी मुनाफे में है और मुनाफे के पैसे से ही आगे बिजनेस बढ़ाने की योजना है।
  4. लोग वैसी पुरानी किताबें खरीदना पसंद करते हैं, जिनकी हालत अच्छी हो। लेकिन ऋतिका को ऐसे दुकानदार कम ही मिल रहे थे जिनके पास ऐसी किताबें हों। तब उन्होंने कोलकाता और मुंबई के बाजारों का रुख किया। कोलकाता का सेकंड हैंड किताबों का बाजार काफी बड़ा और मशहूर है। पुरानी किताबों में पूरे पन्ने नहीं होना भी एक समस्या होती है। इसलिए पाठकों का भरोसा जीतने में भी थोड़ा वक्त लगा।
  5. ऋतिका के अनुसार हैरी पॉटर सीरीज के अलावा सिडनी शेल्डन और जेफरी आर्चर जैसे लेखकों की किताबों की डिमांड ज्यादा है। लेकिन वेबसाइट पर वह फिक्शन और नॉन-फिक्शन दोनों तरह की किताबें रखती थीं।
  6. अब उनकी रेंज बच्चों की किताबों, कॉमिक्स और स्कूल-कॉलेज की किताबों तक की हो गई है। विदेशी भाषाओं में फ्रेंच और जर्मन किताबें भी इस प्लेटफॉर्म पर हैं। ऋतिका की योजना देश-विदेश की और भाषाओं की किताबें भी अपनी वेबसाइट पर लाने की है।
  7. बुक ठेला सेकंड हैंड किताबें बेचने वाली भारत की अकेली कंपनी नहीं है। अमेजन के अलावा बुकचोर, बुकमंडी, सैकंड हैंड बुक्स जैसी घरेलू वेबसाइट भी इस बिजनेस में हैं। लेकिन ऋतिका का दावा है कि उनके प्लेटफॉर्म पर किताबें 20-30% सस्ती मिलती हैं।
  8. आगे ऋतिका का इरादा बुक ठेला को वन-स्टॉप बुक स्टोर बनाने का है, यानी किताबों की ऐसी दुकान जहां हर तरह की बुक्स मिलें। अभी उन्होंने गुड़गांव में वेयरहाउस बना रखा है। यहीं से देशभर में किताबों की सप्लाई की जाती है। बढ़ती डिमांड को देखते हुए वह वेयरहाउस भी बढ़ाने की सोच रही हैं।
  9. बुक ठेला पर 90000 खरीदार रजिस्टर्ड, अगले साल ऐप आएगा

    वेबसाइट पर 90,000 से ज्यादा लोग रजिस्टर्ड हैं। रोजाना 70-80 किताबें बिकती हैं। वेबसाइट पर करीब 5,000 किताबें लिस्ट हैं। स्टॉक में इससे लगभग दोगुनी किताबें हैं। ऋतिका की योजना अगले साल तक किताबों का स्टॉक 10 गुना करने की है। वह 2020-21 तक ऐप भी लॉन्च करने वाली हैं।

  10. अगले साल 75,000 करोड़ रु का होगा देश में किताबों का बाजार

    इंडस्ट्री के अनुमान के मुताबिक पुरानी किताबों का बाजार सालाना 20% की गति से बढ़ रहा है। घरेलू ईकॉमर्स में इलेक्ट्रॉनिक्स और कपड़ों के बाद सबसे ज्यादा बिक्री किताबों की ही होती है। रिसर्च फर्म नीलसन के अनुसार 2015 में भारत का किताबों का बाजार 28,000 करोड़ रुपए का था। 2020 में इसके 75,000 करोड़ रुपए का हो जाने का अनुमान है।

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