सेबी ने बदले कई नियम,स्टार्टअप्स की लिस्टिंग हुई आसान

 

 

भारत में स्टार्टअप्स (startups) को प्रोत्साहन देने के लिए मार्केट रेग्युलेटर सेबी (SEBI) ने बड़ा फैसला किया है। सेबी ने ई-कॉमर्स, डाटा एनालिटिक्स और बायोटेक्नोलॉजी जैसे सेक्टर्स के लिए फंड जुटाने और स्टॉक एक्सचेंज पर उनके शेयरों में ट्रेडिंग के नियम लचीले कर दिए हैं। रेग्युलेटर ने बोर्ड मीटिंग के बाद एक बयान जारी किया। इसके साथ ही एक ‘इंस्टीट्यूशनल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म’ का नाम बदलकर ‘इनोवेटर्स ग्रोथ प्लेटफॉर्म’ करने का ऐलान भी किया गया, जिसे सेबी ने स्टार्टअप्स की लिस्टिंग के लिए बनाया था।

 

मौजूदा प्लेटफॉर्म के प्रति ज्यादा दिलचस्पी नजर नहीं आने और कई स्टेकहोल्डर्स द्वारा नियमों को लचीला बनाने की मांग को देखते हुए सेबी ने ये फैसले लिए हैं। खबरों के मुताबिक, स्टार्टअप्स की लिस्टिंग के लिए लोगों में दिलचस्पी तो काफी दिखी लेकिन कंप्लायंस संबंधी दिक्कतों के चलते लोगों का उत्साह घटता गया।

 

जून में बनाया था एक विशेषज्ञ समूह

सेबी ने स्टार्टअप लिस्टिंग प्लेटफार्म की समीक्षा के लिए इस साल जून में एक विशेषज्ञ समूह का गठन किया था। इसमें क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को शामिल किया गया। समूह ने बाद में सेबी को अपनी रिपोर्ट सौंप दी, जिस पर नियामक ने सार्वजनिक रूप से सुझाव एवं टिप्पणियां मांगी थीं। सेबी बोर्ड ने जिस प्रस्ताव को मंजूर किया, उसके मुताबिक पूंजी निर्गम जारी करने से पहले कम से कम दो साल तक 25 फीसदी पूंजी पात्र संस्थागत निवेशकों के पास होनी चाहिए।

 

नेटवर्थ से जुड़े नियम बदले

स्टार्ट अप के पारिवारिक ट्रस्ट में कम से कम 500 करोड़ की नेटवर्थ हो और उसमें बेहतर नियमन दायरे में रहने वाला विदेशी निवेशक ‘मान्यता प्राप्त निवेशकों’ की नई श्रेणी शामिल होना चाहिए। इसमें ‘मान्यता प्राप्त निवेशक’ 50 लाख सालाना सकल आय रखने वाला कोई व्यक्ति हो सकता है, जिसकी न्यूनतम बिक्री करने योग्य पांच करोड़ रुपये की नेटवर्थ हो या फिर 25 करोड़ रुपए की नेटवर्थ वाली कॉरपोरेट एंटिटी हो सकती है। ये सभी लिस्टिंग से पहले स्टार्ट अप में 10 फीसदी हिस्सेदारी रख सकते हैं।

 

हिस्सेदारी की सीमा भी घटाई

किसी भी व्यक्ति के लिए स्टार्ट अप में 25 फीसदी हिस्सेदारी की सीमा को भी हटा दिया गया है। नए प्लेफार्म में अधिक से अधिक निवेशकों को आकर्षित करने के लिये न्यूनतम एप्लीकेशन साइज को दस लाख से दो लाख रुपए करने के प्रस्ताव को भी बोर्ड में मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही मौजूदा नियमनों के तहत न्यूनतम आवंटियों की संख्या को 200 से घटाकर 50 कर दिया गया है। न्यूनतम सौदे का लॉट भी 10 लाख से घटाकर दो लाख कर दिया गया है।

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