भैयाजी सुपरहिट / बोझिल डायरेक्शन, खराब अभिनय और बेसिर पैर की कहानी

भैयाजी सुपरहिट इस साल की सबसे खराब फिल्म हो सकती है। निहायत कमजोर कहानी के बाद 2 घंटा 30 मिनट के ड्यूरेशन ने इस फिल्म का बेड़ा गर्क कर दिया। इस फिल्म को मत देखिए अगर आप सनी देओल के फैन हैं तब भी। अगर आप वाकई उनके फैन हैं तो इस फिल्म की जगह उनकी कोई पुरानी फिल्म को दोबारा देख लें।

भैयाजी दुबे यानी सनी देओल वाराणसी के लोकल डॉन हैं। जिनके सामने कोई भी खड़ा होने की हिम्मत नहीं कर सकता क्योंकि गुस्सा आने पर अपने आस-पास की चीजों और आदमियों को तोड़ देता है। उनकी पत्नी सपना दुबे यानी प्रीति जिंटा एक संदिग्ध महिला हैं जो हर बहस में उनके हर बहस में जीत जाती हैं। यही बात भैयाजी को परेशान करती है। इस सिचुएशन का फायदा उठाते हुए लालची फिल्म डायरेक्टर गोल्डी कपूर (अरशद वारसी) पत्नी को वापस लाने के लिए भैया जी की जिंदगी पर फिल्म बनाने के लिए उन्हें मना लेता है।

गोल्डी इसके लिए एक औसत राइटर पोर्नो घोष (श्रेयस तलपड़े) को हायर करता है। फिल्म में मुख्य अभिनेत्री के लिए मल्लिका (अमिषा पटेल) को लिया जाता है जो कि भैयाजी को उनके पैसों के लिए फुसलाने की पूरी कोशिश करती है। भैयाजी को एक और उभरता हुआ डॉन  हेलीकॉप्टर मिश्रा (जयदीप अहलावत) चुनौती देता है। उसके गैंग में गुप्ता (पंकज मिश्रा) है। संजय मिश्रा भैयाजी मनोचित्सक बने हैं जो भैयाजी की मदद कर रहे हैं।

इसके बाद कहानी में एक दूसरे कैरेक्टर की एंट्री होती है जो है फनी देओल (डबल रोल में सनी देओल)। इसकी आवाज पतली और चलने का ढंग लड़कियों की तरह है। जो कि ‘माचो’ सनी देओल से अलग है। लेकिन ‘फनी’ कुछ समय बाद यह भूल जाता है और एक्चुअल सनी की तरह लगने लगता है। इसके अलावा फिल्म में कुछ भी नहीं है।

सनी देओल दोनों किरदारों को निभाने में तालमेल बिठाने की कोशिश करते दिखते हैं लेकिन वे असफल हुए हैं। वे ज्यादातर सीन में अजीब दिखते हैं, एक्शन सीन को छोड़ कर। लंबे समय बाद प्रीति जिंटा को स्क्रीन पर देखकर अच्छा लगता है लेकिन यह फिल्म किसी के लिए भी कमबैक फिल्म नहीं होनी चाहिए। अच्छे कलाकारों की फुल कास्ट अरशद वारसी, जयदीप अहलावत, संजय मिश्रा के साथ एक बेहतर फिल्म बनाई जा सकती थी।

 

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