डायलिसिस के लिए सेंटर जाने की जरूरत नहीं, घर में होगा इलाज

 

जिनकी किडनी खराब हो चुकी है। ऐसे मरीजों को अब हर दूसरे दिन हीमाे-डायलिसिस के लिए सेंटर पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। केंद्र सरकार ऐसे मरीजों के लिए घर पर डायलिसिस की व्यवस्था करने जा रही है। चुनाव खत्म होते ही राज्य इस योजना को लागू कर सकेंगे।

हर साल दो लाख से ज्यादा नए मरीज

  1. भारत में हर साल 2 लाख से ज्यादा किडनी के नए मरीज सामने आ रहे हैं और हर साल 3.4 करोड़ डायलिसिस की मांग होती है। योजना लागू होने से डायलिसिस के दिन परिजन और मरीज दोनों अपना नियमित काम भी कर सकेंगे। गरीबी रेखा से नीचे के मरीजों को दवा और किट मुफ्त में दी जाएगी।
  2. देखभाल करने वालों को दी जाएगी ट्र्रेनिंग

    स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक डायलिसिस के लिए पहले ही मरीज के पेट से एक रास्ता बना दिया जाएगा और ट्यूब निकाल कर छोड़ दिया जाएगा। इसके बाद मरीज को पेरिटोनियल किट और दवाइयां भी दे दी जाएगी, ताकि मरीज खुद या उनकी देखभाल करने वाले घर पर ही डायलिसिस कर लें। इसके लिए मरीज और उनकी देखभाल करने वालों को नेफ्रोलाॅजिस्ट या ट्रेंड हेल्थ स्टाफ की ओर से ट्रेनिंग दी जाएगी।

  3. सभी मरीज को पेरिटोनियल डायलिसिस की इजाजत नहीं होगी। डॉक्टर ही यह तय कर सकेंगे कि कौन से मरीज को डायलिसिस के लिए सेंटर पर आना होगा और कौन से मरीज घर पर ही डायलिसिस कर सकेंगे। घर पर ही डायलिसिस कराने की केंद्र सरकार की योजना चुनाव खत्म होने के बाद लागू होगी
  4. आसान है यह प्रक्रिया, 24 घंटे में 3 बार करनी होगी

    इस प्रक्रिया में मरीज के पेट में कैथेटर ट्यूब फिक्स कर बाहर निकाली जाती है। ट्यूब से पेरिटोनियम डायलिसिस फ्लूड डाला जाता है। इसकी मात्रा दो लीटर होती है। यह शरीर के अंदर 30 से 40 मिनट रहता है। पेट में लगे ट्यूब से एक और कैथेटर जोड़ा जाता है, इसी ट्यूब के सहारे खून के अपशिष्ट पदार्थ बाहर आ जाते हैं। यह 24 घंटे में 3 बार करना होता है।

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