7 टिप्‍स ताकि आप सुहागरात को न हों निराश

उम्‍मीदों और हकीकत के बीच है गहरी खाई

फिल्‍मों और कथा-कहानियों में सुहागरात के चर्चे इतने बढ़ा-चढ़ा कर दिखाए गए हैं कि उम्‍मीदों और हकीकत का यह गुब्‍बारा अक्‍सर फुस्‍स हो जाता है। खासकर सुहागरात को कपल्‍स के बीच होने वाले पहले सेक्‍स को लेकर इतनी बातें कही गई हैं जो वास्‍तविकता से कोसों दूर हैं। ऐसा गलत जानकारी, दोस्‍तों और समाज के दबाव और खुद प्रेमी जोड़े की धारणाओं की वजह से होता है जो उन्‍होंने इंटरनेट या फिल्‍मों से बनाई होती हैं। बहरहाल पहली रात के संबंधों के मानसिक और शारीरिक कई पहलू होते हैं। इन्‍हें ध्‍यान में रखकर हमने पहली रात के कुछ टिप्‍स सुझाए हैं:

रिलैक्‍स करिए

शादियां, खासकर भारतीय शादियां बहुत ही भागदौड़ वाली और तनाव भरी होती हैं। जब सारे कर्मकांड निबट जाएं तो नए कपल को कुछ समय एक साथ बिताकर रिलैक्‍स करना चाहिए। याद रखिए थके हुए दिमाग और शरीर से आप किसी भी चीज का मजा नहीं ले सकते।

​एक-दूजे को जानिए

खासकर अरेंज मैरेज में लड़के और लड़की को एक दूसरे को नजदीकी से जानने का मौका नहीं मिल पाता। इसलिए कोशिश करें कि सुहागरात से पहले एक-दूसरे को बेहतर तरीके से जान लें। अगर सुहागरात से पहले मौका नहीं मिला है तो सुहागरात को भी इसकी शुरूआत करना गलत नहीं होगा।

सेक्‍स की जानकारी

आपको सेक्‍स के बारे में क्‍या जानकारी है? आप अपने पार्टनर की सेक्‍स संबंधी पसंद या नपसंद के बारे में क्‍या जानते हैं? हो सकता है आपको उनकी कुछ बातें समझ न आएं या पसंद न आएं लेकिन याद रखिए समय के साथ बहुत कुछ बदलता है।

जबरन अपनी इच्‍छा न लादें

पहली बार इतनी नजदीकी से मिलने का मौका है। इस मौके पर अपनी मर्जी उन पर थोपिए मत। ऐसा करना शारीरिक और मानसिक रूप से सही नहीं होगा।

बहुत ज्‍यादा सोचिए मत

अरे आप तो गंभीर हो गए। हमने केवल जिम्‍मेदारी से बर्ताव करने को कहा है। बहुत सोचविचार करने की जरूरत नहीं है। जितना सोचेंगे मजा उतना कम होगा और घबराहट बढ़ेगी।

यह आखिरी बार नहीं है

माना यह आपका पहला अनुभव है, लेकिन याद रखिए यह आपका आखिरी अनुभव नहीं है। यह तो महज रिश्‍ते की शुरूआत है। इसलिए पहली रात को सेक्‍स की क्‍वॉलिटी या सेक्‍स हुआ कि नहीं इससे मत आंकिए। नाजुक रिश्‍ता है, खिलते, खिलते खिलेगा।

मदद लेने में हर्ज नहीं

शादी की पहली रात सेक्‍स को लेकर आपके अनुभव अगर आपकी उम्‍मीदों के मुताबिक नहीं रहे तो किसी विशेषज्ञ की मदद लेने में मत हिचकिए। ऐसा गलत जानकारी या मेडिकल मजबूरी की वजह से हो सकता है। इसलिए जरूरत के मुताबिक डॉक्‍टर या मनोचिकित्‍सक की सलाह लें।

 

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