दर्द और दौरों से जूझ रही 31 साल की महिला को खून चूसने वाले कीड़े से हुई थी बीमारी

 

  • लौरा मैकलिओड्स लाइम डिजीज की गंभीर अवस्था से जूझ रही हैं, 3 साल चला इलाज भी बेअसर रहा
  • अमेरिका के कई राज्यों में 2015-17 के बीच लाइम डिजीज के काफी मामले देखे गए हैं

हेल्थ डेस्क. 31 साल की लौरा मैकलिओड्स गंभीर लाइम डिजीज से जूझ रही हैं। इसका असर उनके पूरे शरीर पर दौरे, तेज दर्द और घटती याद्दश्त के रूप में दिख रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि यह बीमारी खून चूसने वाले कीड़े के कारण हुई है जिसका पता सेंटर कंट्रोल फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन भी पूरी तरह से नहीं लगा पाया है। एंटीबायोटिक समेत कई तरह के ट्रीटमेंट के बाद भी फायदा नहीं हुआ और हालत बिगड़ रही है। लौरा अब जर्मनी जाकर खतरनाक हीट थैरेपी कराना चाहती हैं जिसमें शरीर को 41 डिग्री तापमान पर रखा जाता है। इसमें करीब 28 लाख 64 हजार रुपए का  खर्च आता है।

सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट कर ढूंढ रहीं इलाज

    • अमेरिका की लौरा मैकलिओड्स को बीमारी की जानकारी 2016 में मिली जब एक प्रेजेंटेशन के दौरान दौरा पड़ा। उन्हें याद नहीं कि कब कीड़े ने काटा था लेकिन लक्षण दिखने पर जांच में बीमारी की बात सामने आई।
    • कुछ विवादित अमेरिकन विशेषज्ञ मरीजों को ओजोन इंजेक्शन, मधुमक्खी का डंक और ब्लड क्लीनिंग थैरेपी देकर इलाज का दावा करते हैं। लौरा इलाज के ये सारे तरीके भी आजमा चुकी हैं लेकिन राहत नहीं मिल पाई है।
    • बीमारी का इलाज ढूंढने के लिए वह सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट करती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि अगर इस बीमारी को शुरुआती अवस्था में ही पहचान लिया जाए तो एंटीबायोटिक की मदद से ठीक किया जा सकता है।

      पिछले तीन सालों से एंटीबायोटिक समेत दर्जनों दवाओं का डोज दिया जा रहा है, जिसकी तस्वीर लौरा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट की है

      क्या है लाइम डिजीज

      • यह बैक्टीरिया बोरेलिया बुर्गडोरफेरी से फैलने वाली बीमारी है। जो इंसानों में खून चूसने वाले संक्रमित परजीवी कीड़ों से फैलती है। इसके लक्षण 3-30 दिनों के अंदर दिखने शुरू हो जाते हैं। बीमारी कितनी गंभीर है यह संक्रमित कीड़े की प्रजाति निर्भर करता है। 48 घंटे के अंदर एंटीबायोटिक दी जाएं तो मरीज को संक्रमण से मुक्त किया जा सकता है।
      • वेबसाइट वेबएमडी के मुताबिक, अमेरिका के कई राज्यों में 2015-17 के बीच लाइम डिजीज के काफी मामले देखे गए हैं। सेंटर कंट्रोल फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन  के मुताबिक, 2004 में इसके मामले 19,804 थे जो 2016 तक बढ़कर 36,429 हो गए थे।

        बीमारी की शुरुआती अवस्था में दौरा पड़ने का कारण लौरा ऑफिस में कामकाज के स्ट्रेस को मानती थीं

        खून से निकलकर दिमाग या हृदय में छिप जाता है बैक्टीरिया

        • टुलेन यूनिविर्सटी की बैक्टीरियोलॉजी विभाग की प्रोफेसर मोनिका मोरिकी के मुताबिक, संक्रमण के बाद कुछ मरीजों के बर्ताव में बदलाव आता है तो कुछ के शरीर पर चकत्ते से दिखाई देते हैं। दौरे पड़ना और याद्दाश्त में गिरावट भी आम लक्षण हैं।
        • खून चूसने वाले कीड़े के काटने बैक्टीरिया इंसान के ब्लड में अधिक समय तक नहीं रहता। रक्त के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाता है और हृदय या मस्तिष्क के कोलेजन टिश्यू में छिप जाता है। इसलिए ब्लड टेस्ट के माध्यम से पता लगाना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि इससे संक्रमित अलग-अलग इंसानों में लक्षण भी अलग-अलग रूप में दिखते हैं।
        • लौरा के मस्तिष्क में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जैसे उसकी याद्दाश्त कम हो रही है। लौरा का कहना है कि साधारण सी चीजों को पढ़ने में मुझे दिक्कत होती है। मैं शब्दों को भूल जाती हूं। कई बार कार की चाबी मेरे हाथ में होती है लेकिन उसे ढूंढती रहती हूं।

 

 

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