आलोक वर्मा को बड़ी राहत, SC ने केंद्र के छुट्टी पर भेजने के आदेश को रद्द किया

कोर्ट ने छह दिसंबर को आलोक वर्मा की याचिका पर वर्मा, केंद्र, सीवीसी और अन्य की दलीलों पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था. एससी ने आलोक वर्मा को बड़ी राहत दी है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आज छुट्टी पर हैं इसलिए जस्टिस संजय किशन कौल ने फैसला सुनते हुए कहा कि केंद्र को उन्हें छुट्टी पर नहीं भेजना चाहिए था. एससी ने केंद्र के आदेश को रद्द कर दिया है. हालांकि आलोक वर्मा 75 दिनों बाद सीबीआई में वापसी करेंगे लेकिन वो कोई जांच नहीं शुरु करवा पाएंगे.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अब वर्मा का केस अब डीपीसीई एक्ट के तहत बनी एक उच्चस्तरीय कमेटी एक हफ्ते के अंदर इस केस विचार करके इस पर एक्शन लेगी. सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि सरकार को फैसला करने से पहले चयन समिति, जिसमें प्रधानमंत्री, लीडर ऑफ अपोजिशन और चीफ जस्टिस होते हैं, से विचार-विमर्श करना चाहिए था. कांग्रेस ने इस फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने सबक सिखाया है.

सीबीआई के डायरेक्टर आलोक कुमार वर्मा और ब्यूरो के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग सार्वजनिक होने के बाद सरकार ने दोनों अधिकारियों को उनके अधिकारों से वंचित कर अवकाश पर भेजने का फैसला किया था. दोनों अधिकारियों ने एक दूसरे पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे.

वर्मा ने केन्द्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) के एक और डिपार्टमेंट ऑफ पर्सोनल एंड ट्रेनिंग (डीओपीटी) के दो सहित 23 अक्टूबर, 2018 के कुल तीन आदेशों को निरस्त करने की मांग की है. उनका आरोप है कि ये आदेश क्षेत्राधिकार के बिना और संविधान के अनुच्छेदों 14, 19 और 21 का उल्लंघन करके जारी किए गये.

केंद्र ने इसके साथ ही 1986 बैच के ओडिशा कैडर के आईपीएस अधिकारी और ब्यूरो के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को जांच एजेंसी के निदेशक का अस्थायी कार्यभार सौंप दिया था.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसेफ की बेंच ने पिछले साल छह दिसंबर को आलोक वर्मा की याचिका पर वर्मा, केंद्र, सीवीसी और अन्य की दलीलों पर सुनवाई पूरी करते हुए फैसला सुरक्षित रखा था.

बेंच ने गैर सरकारी संगठन ‘कॉमन कॉज’ की याचिका पर भी सुनवाई की थी. इस संगठन ने कोर्ट की निगरानी में विशेष जांच दल से राकेश अस्थाना सहित जांच ब्यूरो के तमाम अधिकारियों पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कराने का अनुरोध किया था.

वर्मा का सीबीआई निदेशक के रूप में दो साल का कार्यकाल 31 जनवरी को पूरा हो रहा है. उन्होंने केंद्र के फैसले को चुनौती देने हुए शीर्ष अदालत का रुख किया था.

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के सामने वर्मा को उनकी जिम्मेदारियों से हटाकर अवकाश पर भेजने के अपने फैसले को सही ठहराया था और कहा था कि उनके और अस्थाना के बीच टकराव की स्थिति है जिस वजह से देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी ‘जनता की नजरों में हंसी’ का पात्र बन रही है.

अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने बेंच से कहा था केंद्र के पास ‘हस्तक्षेप करने’ और दोनों अधिकारियों से शक्तियां लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजने का ‘अधिकार’ है.

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