सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या केस सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा

नई दिल्ली. अयोध्या मामले पर बुधवार को 40वें दिन सभी पक्षों की सुनवाई पूरी हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने विवादित जमीन पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सुनवाई के दौरान कोर्ट में गहमागहमी रही। मुस्लिम पक्ष के वकील ने हिंदू महासभा का दिया नक्शा फाड़ दिया था। इस पर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि ऐसा होता रहा तो हम उठकर चले जाएंगे। चर्चा है कि सबसे बड़े दावेदारों में से एक सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जमीन पर मालिकाना हक छोड़ने की अर्जी दाखिल की है, लेकिन चर्चा सुप्रीम कोर्ट के बाहर है। लेकिन, ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद के संयोजक जफरयाब जिलानी ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। 134 साल पुराने अयोध्या विवाद मामले में सुन्नी वक्फ बोर्ड 58 साल से दावेदार है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसे रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़े के साथ बराबर की जमीन दी थी।

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आज शाम 5 बजे सुनवाई खत्म करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सभी पक्षों की दलीलें 4 बजे तक पूरी हो गईं।

बुधवार को कोर्ट रूम में क्या हुआ

  • हिंदू महासभा के वकील विकास सिंह ने विवादित जगह और मंदिर की मौजूदगी साबित करने के लिए पूर्व आईपीएस अफसर किशोर कुणाल की  किताब ‘अयोध्या रिविजिटेड’ का हवाला देना चाहा। धवन ने इसे रिकॉर्ड का हिस्सा नहीं बताते हुए विरोध किया।
  • विकास सिंह ने एक नक्शा पेश किया और उसकी कॉपी धवन को भी दी। धवन ने  विरोध करते हुए नक्शे की कॉपी फाड़ना शुरू कर दी।
  • धवन के तरीके पर चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताते हुए कहा- आप चाहें तो पूरे पेज फाड़ सकते हैं।
  • चीफ जस्टिस ने यह भी कहा- अगर इसी तरह चलता रहा, तो सुनवाई अभी पूरी कर दी जाएगी। फिर जिस भी पक्ष को दलील देनी होगी, वह लिखित में ले ली जाएगी।

‘मुस्लिम अयोध्या की अन्य मस्जिदों में नमाज अदा कर सकते हैं’

मंगलवार को सुनवाई के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील के पाराशरण ने कहा कि बाबर ने अयोध्या में मस्जिद बनाकर जो भूल की, उसे सुधारे जाने की जरूरत है। अयोध्या में कई (50-60) मस्जिदें हैं, जहां मुस्लिम नमाज अदा कर सकते हैं, लेकिन हिंदू भगवान राम के जन्मस्थान यानी अयोध्या को नहीं बदल सकते। इसी साल 6 अगस्त से चीफ जस्टिस की अगुआई वाली 5 जजों की बेंच में नियमित सुनवाई चल रही है।

पाराशरण सुप्रीम कोर्ट में महंत सुरेश दास की तरफ से पैरवी कर रहे हैं। सुरेश दास पर सुन्नी वक्फ बोर्ड और अन्य द्वारा केस दायर किया गया था। पाराशरण ने कहा, ‘‘सम्राट बाबर ने भारत को जीता और उसने अयोध्या यानी भगवान राम के जन्मस्थान में मस्जिद बनवाकर ऐतिहासिक भूल कर दी। ऐसा करके उसने (बाबर) खुद को सभी नियम-कानून से ऊपर रख लिया।’’ न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट अयोध्या मामले में 4-5 नवंबर को फैसला सुना सकता है।

‘एक बार जो मंदिर था, वह मंदिर ही रहेगा’
5 जजों की बेंच में चीफ जस्टिस के अलावा जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एसए नजीर हैं। बेंच ने मंगलवार को पाराशरण से कई कानूनी मुद्दों कानून की सीमाएं जैसे सवाल पूछे। बेंच ने कहा, ‘‘उनका (मुस्लिम पक्ष) का कहना है कि एक बार मस्जिद हो गई, तो वह हमेशा मस्जिद ही रहेगी। क्या आप इससे सहमत हैं?’’

इस पर पाराशरण ने कहा, ‘‘मैं इसका समर्थन नहीं करता। मैं कहूंगा- एक बार कोई मंदिर बन गया, तो वह हमेशा मंदिर ही जाना जाएगा।’’

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विवादित जमीन को 3 हिस्सों में बांटने के लिए कहा था
2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि अयोध्या का 2.77 एकड़ का क्षेत्र तीन हिस्सों में समान बांट दिया जाए। एक हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड, दूसरा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा रामलला विराजमान को मिले। हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 14 याचिकाएं दाखिल की गई थीं।

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