लखीमपुर ज़िले में डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव द्वारा इलाज में लापरवाही

लखीमपुर ज़िले में डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव द्वारा इलाज में लापरवाही बरतने के कारण नवजात की मौत का मामला प्रकाश में आया है ।

लखीमपुर के पलिया तहसील के सरकारी प्राथमिक चिकित्सालय में संविदा पर कार्यरत डॉ. शिल्पी श्रीवास्तव द्वारा इलाज में लापरवाही बरतने के कारण एक नवजात की मौत हो गई ।

पलिया तहसील के मोहल्ला बाज़ार निवासी संजय गुप्ता ने अपनी पुत्रवधु दीक्षा गुप्ता पत्नी आयुष गुप्ता की गर्भावस्था में पलिया के सरकारी प्राथमिक चिकित्सालय में 28 अगस्त 2018 को शिशु जन्म से पूर्व जाँच आदि कराकर अस्पताल का मार्त एवं बाल सुरक्षा कार्ड बनवाया था । इसके बाद अस्पताल में संविदा पर कार्यरत डॉ.शिल्पी श्रीवास्तव द्वारा इलाज शुरू किया गया तथा जब 28 जनवरी 2019 को उनकी पुत्रवधु को प्रसव पीड़ा हुई तब उन्होंने डॉ. शिल्पी से सम्पर्क किया तो डॉ. शिल्पी ने पलिया से 12 किलोमीटर दूर भीरा-खीरी स्थित प्राइवेट अस्पताल वन बीट दसमेश हॉस्पिटल एण्ड ट्रामा सेंटर में डिलीवरी कराने को कहा ।

पीड़ित संजय गुप्ता का कहना है कि उनकी पुत्रवधु को प्रसव पीड़ा अधिक थी, जिस कारण मज़बूरी वश उन्होंने प्राइवेट हॉस्पिटल वन बीट में भर्ती कराया परन्तु वहां उनकी पुत्रवधु को देखने न तो कोई नर्स आई और न ही डॉ. शिल्पी आई, जिस कारण उनकी पुत्रवधु तीव्र दर्द से तड़पती रहीं और 29 जनवरी 2019 को प्रातः स्वतः प्रसव हो गया, जिस कारण पुत्रवधु को काफ़ी शारीरिक क्षति हुई है । उनकी पुत्रवधु को जो पुत्र पैदा हुआ था उसकी तबियत ख़राब हो गई, जिस कारण वहां मौजूद नर्सों द्वारा उसे बच्चे वाली सुरक्षा मशीन में रखवा दिया । दिन के 3 बजे जब इसकी जानकारी डॉ.शिल्पी को हुई तब उन्होंने हॉस्पिटल पहुंचकर बच्चे को मशीन से बाहर निकालने को कहा तब उन्होंने तथा वहां मौजूद डॉ. अंजनी ने डॉ. शिल्पी का विरोध किया कि बच्चे को अभी मशीन से न निकाला जाए परन्तु डॉ. अंजनी के न होने पर डॉ. शिल्पी द्वारा अस्पताल स्टॉफ पर अधिक प्रेशर बनाकर तथा नर्सों को डांटकर बच्चे को मशीन से निकलवा दिया ।

इसके अगले दिन उनके नवजात पौत्र की तबियत बिगड़ गई इसको देखते हुए डॉ. अंजनी ने पुनः मशीन में रखकर बच्चे की तबियत स्थिर की तथा उसे बरेली के डॉ. अशोक मेहंदीरत्ता के लिए रेफर कर दिया । जहाँ इलाज के दौरान उनके पौत्र की मृत्यु हो गई । वहां डॉक्टर ने बताया कि बच्चा स्वतः पैदा होने के कारण गन्दा पानी उसके पेट तथा शरीर में चला जाने के कारण तथा मशीन से 24 घंटे पहले बाहर निकाल लेने पर बच्चे का ब्रेन डैमेज हो गया, जिस कारण उसकी मृत्यु हो गई ।

परिजनों का आरोप है कि डॉ. शिल्पी सरकारी प्राथमिक चिकित्सालय में देखती है परन्तु डिलीवरी के लिए पलिया से 12 किलोमीटर दूर स्थित प्राइवेट हॉस्पिटल वन बीट में बुलाती है, जहाँ उनसे मोटी फीस जमा कराई   गई तथा फीस जमा कर देने के बाद वह समय से न पहुंचकर जच्चा बच्चा के इलाज में घोर लापरवाही बरती । पीड़ित परिवार पिछले दिनों सीएमओ. खीरी तथा अपर पुलिस अधीक्षक को प्रार्थना पत्र देकर डॉ. शिल्पी द्वारा प्राइवेट अस्पताल वन बीट दशमेश हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर भीरा में प्रैक्टिस पर रोक लगाने व उनके विरुद्ध इलाज में घोर लापरवाही बरतने तथा उनके विरुद्ध जानबूझकर हत्या करने का मुकदमा दर्ज करके उचित कार्यवाही की मांग की ताकि भविष्य में किसी अन्य के साथ डॉ. शिल्पी इस तरह का घिनोना कार्य न करें ।

रिपोर्ट : मो. तलहा हसन खान
लखीमपुर, उत्तर प्रदेश

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