मालदीव के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह को भारत-अमेरिका से मदद मिलने की उम्मीद

माले. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को मालदीव के नए राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मालदीव जाकर मोदी ने दक्षिण एशिया में समीकरण बदलने की कोशिश की। मोदी का यह दौरा इसलिए अहम रहा, क्योंकि मालदीव में पिछले पांच साल चीन का प्रभाव काफी ज्यादा रहा। इसका असर भारत-मालदीव के रिश्तों पर भी पड़ रहा था। चीन ने मालदीव की मदद से हिंद महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी थीं। नए राष्ट्रपति सोलिह की पार्टी मालदीवियन डेमोक्रेटिक भारत समर्थित मानी जाती है। सितंबर 2018 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने चीन समर्थक अब्दुल्ला यामीन को हरा दिया था।

मोदी ने सबसे पहले दी थी बधाई
सोलिह के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद मोदी ने सबसे पहले उन्हें फोन करके बधाई दी थी। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के चीन की ओर झुकाव से भारत की चिंता बढ़ी हुई थी। अब प्रधानमंत्री मोदी का मालदीव दौरा पड़ोसी देश के साथ भारत के संबंधों में सुधार का संकेत है। वहीं, नए राष्ट्रपति सोलिह को चीन के कर्ज से उबरने के लिए भारत और अमेरिका से मदद मिलने की उम्मीद है।

सोलिह का शपथ समारोह राजधानी माले के स्टेडियम में हुआ। इसमें चीन के संस्कृति और पर्यटन मंत्री लू शुगांग भी शामिल हुए। वहीं, मोदी के साथ भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी मौजूद थे। बीते कुछ साल में भारत-मालदीव के रिश्तों में काफी उतार-चढ़ाव देखे गए। पिछले राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने भारत का साथ छोड़कर चीन से करीबी रिश्ते स्थापित किए थे। चीन ने कूटनीति के तहत मालदीव को विकास के नाम पर कर्ज दिया। वहीं, भारत के आसपास हिंद महासागर में अपनी गतिविधियां बढ़नी शुरू कर दी थीं।

मोदी ने जताई साथ काम करने की मंशा
मालदीव जाने से पहले प्रधानमंत्री ने कई ट्वीट किए। उन्होंने लिखा, ‘‘मालदीव में हालिया चुनाव लोकतंत्र, कानून व्यवस्था और समृद्ध भविष्य के लिए लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। हम एक स्थिर, लोकतांत्रिक, समृद्ध और शांतिपूर्ण मालदीव गणतंत्र देखना चाहते हैं। राष्ट्रपति सोलिह को विकास की प्राथमिकताओं को साकार करने के लिए साथ काम करने की भारत सरकार की मंशा से अवगत कराऊंगा।’’

 

साभार: दैनिक भास्कर

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